GautambudhnagarGreater noida news

सुस्ती और थकान को न करें नजरअंदाज, थायराइड हो सकता है वजह बच्चों से लेकर महिलाओं तक तेजी से बढ़ रहे थायराइड के मामले, विशेषज्ञों ने समय पर जांच और इलाज की दी सलाह

सुस्ती और थकान को न करें नजरअंदाज, थायराइड हो सकता है वजह

बच्चों से लेकर महिलाओं तक तेजी से बढ़ रहे थायराइड के मामले, विशेषज्ञों ने समय पर जांच और इलाज की दी सलाह

ग्रेटर नोएडा।थायराइड अब केवल बड़ों की बीमारी नहीं रह गई है। बदलती जीवनशैली, खराब खानपान, बढ़ता तनाव और हार्मोनल असंतुलन के कारण बच्चों, किशोरों और महिलाओं में इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान और सही इलाज से थायराइड को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन लापरवाही गंभीर समस्याओं की वजह बन सकती है। डॉ. एन के सोनी, सीनियर कंसलटेंट एंड हेड – इंटरनल मेडिसिन एंड डायबेटोलॉजी, यथार्थ हॉस्पिटल, ओमेगा-1, ग्रेटर नोएडा ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में बच्चों और किशोरों में थायराइड के मामले तेजी से बढ़े हैं। कई बार माता-पिता बच्चों की सुस्ती, चिड़चिड़ापन या पढ़ाई में कमजोरी को सामान्य व्यवहार समझ लेते हैं, जबकि इसके पीछे थायराइड जैसी गंभीर समस्या हो सकती है।उन्होंने कहा कि आजकल ओपीडी में ऐसे कई बच्चे आ रहे हैं जो हर समय थके हुए रहते हैं, पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पाते या अचानक बहुत चिड़चिड़े हो जाते हैं। परिवार अक्सर इसे बच्चों का स्वभाव समझकर नजरअंदाज कर देता है, जबकि कई मामलों में इसकी वजह थायराइड निकलती है।डॉ. सोनी के अनुसार, थायराइड शरीर की एक छोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण ग्रंथि है, जो शरीर की ऊर्जा और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है। जब यह धीमी हो जाती है तो हर समय थकान महसूस होना, वजन बढ़ना, त्वचा का सूखना और मन उदास रहना जैसी समस्याएं होती हैं। वहीं जब थायराइड ज्यादा सक्रिय हो जाता है तो वजन तेजी से कम होने लगता है, दिल की धड़कन तेज रहती है और घबराहट बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण भी थायराइड की समस्या बढ़ाने का एक बड़ा कारण बनता जा रहा है। उन्होंने बताया कि 30 से 50 वर्ष की महिलाएं थायराइड से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं, क्योंकि इस दौरान शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं। हालांकि अब बच्चों में बढ़ते मामले ज्यादा चिंता पैदा कर रहे हैं। बच्चों में थायराइड का असर केवल शरीर पर नहीं बल्कि उनके पूरे विकास पर पड़ता है। इससे लंबाई रुक सकती है, पढ़ाई में ध्यान कम हो सकता है और याददाश्त भी प्रभावित हो सकती है। डॉ. सोनी ने कहा कि बच्चों में बढ़ते थायराइड के पीछे खराब लाइफस्टाइल सबसे बड़ी वजह बन रही है। जंक फूड, बढ़ता मोटापा, घंटों मोबाइल और वीडियो गेम्स पर समय बिताना, शारीरिक गतिविधियों की कमी और तनाव बच्चों के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ रहे हैं। उन्होंने माता-पिता को सलाह दी कि अगर बच्चा अचानक सुस्त रहने लगे, जल्दी थक जाए, पढ़ाई में पिछड़ने लगे या हर समय सोना चाहे तो इसे केवल आलस समझकर नजरअंदाज न करें। वहीं डॉ. आशीष गुप्ता, कंसल्टेंट – एंडोक्रिनोलॉजी, डायबिटीज़ एवं मेटाबॉलिक डिसऑर्डर्स, यथार्थ हॉस्पिटल, नोएडा एक्सटेंशन ने बताया कि थायराइड आज के समय में एक बेहद आम समस्या बन चुकी है, खासकर महिलाओं में। गर्दन के सामने मौजूद छोटी सी थायराइड ग्रंथि शरीर की ऊर्जा, वजन, हार्मोन और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है। जब यह सही तरीके से काम नहीं करती, तब थायराइड की समस्या शुरू होती है।उन्होंने बताया कि थायराइड मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है – हाइपोथायराइड और हाइपरथायराइड। हाइपोथायराइड में थायराइड ग्लैंड जरूरत से कम हार्मोन बनाती है, जिससे थकान, वजन बढ़ना, ठंड ज्यादा लगना, बाल झड़ना और शरीर में सुस्ती जैसी समस्याएं होती हैं। वहीं हाइपरथायराइड में थायराइड ग्लैंड जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है, जिससे तेजी से वजन कम होना, घबराहट, दिल की धड़कन तेज होना, ज्यादा पसीना आना, हाथ कांपना और नींद न आने जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। डॉ. गुप्ता ने कहा कि भारत में हाइपोथायराइड ज्यादा कॉमन माना जाता है और इसके मामले महिलाओं में अधिक देखे जाते हैं। हालांकि दोनों ही तरह के थायराइड को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। हाइपरथायराइड दिल पर तेजी से असर डाल सकता है, जबकि लंबे समय तक अनियंत्रित हाइपोथायराइड शरीर की कार्यक्षमता और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।उन्होंने बताया कि कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या थायराइड की दवा जिंदगीभर चलती है। इसका जवाब व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है। खासकर हाइपोथायराइड में कई मरीजों को लंबे समय तक या जीवनभर दवा लेनी पड़ सकती है, लेकिन नियमित जांच और सही इलाज से इसे अच्छी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, थायराइड से बचाव के लिए संतुलित आहार, आयोडीन युक्त नमक, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और कम स्क्रीन टाइम बेहद जरूरी है। बच्चों को रोज कम से कम 45 मिनट आउटडोर खेलों के लिए प्रेरित करना चाहिए। डॉक्टरों ने सलाह दी कि शरीर में लगातार थकान, अचानक वजन बढ़ना या घटना, सुस्ती, घबराहट या व्यवहार में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें तो उन्हें नजरअंदाज न करें और समय रहते थायराइड की जांच जरूर कराएं। नियमित TSH टेस्ट और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लेने से मरीज सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

Related Articles

Back to top button