गलगोटिया विश्वविद्यालय में भारत-जापान संवाद का साक्षी बनी जेवर विधानसभा
गलगोटिया विश्वविद्यालय में भारत-जापान संवाद का साक्षी बनी जेवर विधानसभा
जापानी प्रतिनिधिमंडल के साथ शिक्षा, संस्कृति, तकनीक और औद्योगिक सहयोग पर मंथन, जेवर विधायक ने भारत की मानवीय संस्कृति को बताया दुनिया के लिए प्रेरणा

ग्रेटर नोएडा। गलगोटिया विश्वविद्यालय में आज भारत-जापान संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जापान के यामानाशी प्रीफेक्चर से आए विशिष्ट प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत-जापान के बीच शिक्षा, संस्कृति, तकनीक, उद्योग एवं कौशल विकास के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर संवाद हुआ।
इस अवसर पर यामानाशी प्रीफेक्चर, जापान के गवर्नर श्री कोतारो नागासाकी, वाइस-गवर्नर जुनिची इशिबेरा, सलाहकार नरेंद्र उपाध्याय, गलगोटिया विश्वविद्यालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. ध्रुव गलगोटिया, उत्तर प्रदेश सरकार में पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह जी, गलगोटिया विश्वविद्यालय के चांसलर सुनील गलगोटिया तथा यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के एसीईओ शैलेन्द्र भाटिया, मनीष मीणा के साथ एसीईओ ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण सुनील कुमार सिंह और प्रेरणा सिंह भी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के दौरान भारत और जापान के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक एवं मानवीय संबंधों के साथ-साथ आधुनिक दौर में शिक्षा, तकनीकी नवाचार, उद्योग, निवेश और कौशल विकास के क्षेत्र में साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने पर विचार-विमर्श हुआ।इस अवसर पर जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह ने जापानी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि “भारत उस महान संस्कृति की भूमि है, जिसमें दया, करुणा और अहिंसा केवल विचार नहीं, बल्कि जीवन के मूल मूल्य हैं। भारत ने इतिहास के कठिन दौर में भी मानवता का साथ नहीं छोड़ा। जब फारस से पारसी समुदाय के लोग उत्पीड़न से बचकर भारत आए, तब भारत ने उन्हें अपनी धरती पर सम्मान और सुरक्षा के साथ स्थान दिया। यह भारत की उस संस्कृति का प्रमाण है, जिसमें संकट में पड़े व्यक्ति के लिए सबसे पहले मानवता देखी जाती है।” धीरेन्द्र सिंह ने आगे कहा कि “गौतम बुद्ध ने भारत की धरती से करुणा, शांति और मानवता का जो संदेश दिया, वह सुदूर पूर्व तक पहुंचा और जापान ने भी उस महान दर्शन को आत्मसात किया। भारत और जापान के संबंधों की सबसे बड़ी ताकत यही साझा मानवीय एवं सांस्कृतिक विरासत है।”*
जेवर के विधायक धीरेन्द्र सिंह ने अंत में कहा कि *”भारत की संस्कृति का मूल मंत्र “वसुधैव कुटुम्बकम्” है, मतलब पूरी दुनिया एक परिवार है। भारत ने सदैव सभी देशों और समाजों को मानवता की दृष्टि से देखा है। आज के मौजूदा वैश्विक परिवेश में जब विभिन्न देश अपने आर्थिक एवं सामरिक हितों के लिए मानवता के मूल्यों से समझौता करते दिखाई देते हैं, तब भारत और जापान जैसे देशों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे दुनिया के सामने शांति, करुणा, सह-अस्तित्व और मानवता का मार्ग प्रस्तुत करें।”*
जेवर के विधायक धीरेन्द्र सिंह ने कहा कि *”भारत-जापान की मित्रता केवल दो देशों के बीच आर्थिक या औद्योगिक साझेदारी नहीं है, बल्कि यह दो प्राचीन और गौरवशाली संस्कृतियों के बीच आत्मीय संबंध है। आज जेवर और उत्तर प्रदेश की धरती पर जापान के साथ बढ़ता सहयोग इस मित्रता को विकास का नया आयाम दे रहा है।”*
कार्यक्रम में उपस्थित जापानी प्रतिनिधिमंडल ने भी भारत के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने तथा शिक्षा, संस्कृति, तकनीक और उद्योग के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। गलगोटिया विश्वविद्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम भारत-जापान मैत्री, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और भविष्य की विकासात्मक साझेदारी का महत्वपूर्ण मंच बना, जहां दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने मिलकर एक ऐसे भविष्य की कल्पना साझा की, जिसमें विकास के साथ मानवता और सांस्कृतिक मूल्यों को भी समान महत्व मिले।




