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अभिभावक-शिक्षक संवाद से सशक्त होगा विद्यार्थियों का भविष्य : द्रोणाचार्य पी. जी . कॉलेज में गरिमामय अभिभावक-शिक्षक मिलन समारोह

अभिभावक-शिक्षक संवाद से सशक्त होगा विद्यार्थियों का भविष्य : द्रोणाचार्य पी. जी . कॉलेज में गरिमामय अभिभावक-शिक्षक मिलन समारोह

अभिभावकों को स्मृति-चिह्न प्रदान कर किया सम्मानित, शैक्षणिक प्रगति एवं सर्वांगीण विकास पर हुआ सार्थक मंथन

दनकौर। श्री द्रोणाचार्य (पी.जी.) कॉलेज, दनकौर के कला विभाग द्वारा विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति, अनुशासन, नियमित उपस्थिति एवं सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास को केंद्र में रखते हुए अभिभावक-शिक्षक मिलन समारोह का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महाविद्यालय, शिक्षक एवं अभिभावकों के मध्य प्रभावी संवाद एवं समन्वय स्थापित करते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सामूहिक सहभागिता सुनिश्चित करना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के सचिव रजनीकान्त अग्रवाल एवं प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स के दिशा-निर्देशन में किया गया। इस अवसर पर उपस्थित अभिभावकों को महाविद्यालय की ओर से स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान अभिभावकों के सहयोग, सहभागिता एवं महाविद्यालय के प्रति उनके विश्वास के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक रहा।

मिलन समारोह के दौरान विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति, नियमित उपस्थिति, अनुशासन, व्यवहार, अध्ययन की आदतों एवं आगामी शैक्षणिक गतिविधियों से संबंधित विषयों पर शिक्षकों एवं अभिभावकों के बीच विस्तृत एवं सार्थक चर्चा हुई। अभिभावकों ने विद्यार्थियों की प्रगति से जुड़े अपने अनुभव, विचार एवं महत्वपूर्ण सुझाव भी साझा किए।

इस अवसर पर सुभाष भाटी जी ने महाविद्यालय के शैक्षणिक एवं अनुशासित वातावरण की सराहना करते हुए कहा कि उनके परिवार के सदस्य महाविद्यालय में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और वे महाविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था एवं वातावरण से अत्यंत संतुष्ट हैं। उन्होंने विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सकारात्मक एवं अनुशासित वातावरण की विशेष प्रशंसा की।

वहीं मास्टर देवकरण सिंह नागर जी ने महाविद्यालय की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने श्री द्रोणाचार्य (पी.जी.) कॉलेज को एक छोटे से पौधे से विशाल वटवृक्ष के रूप में विकसित होते देखा है। उन्होंने कहा कि संस्थापक स्वर्गीय वेद प्रकाश अग्रवाल जी ने जिस शिक्षा के स्वप्न को देखा था, वह आज साकार रूप ले रहा है और महाविद्यालय निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।महाविद्यालय के सचिव रजनीकान्त अग्रवाल ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि अभिभावक-शिक्षक मिलन समारोह का उद्देश्य अभिभावकों को महाविद्यालय की शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ना, विद्यार्थियों की प्रगति पर संयुक्त रूप से विचार करना तथा संस्थान के विकास के लिए अभिभावकों के महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त करना है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास महाविद्यालय का सर्वोच्च लक्ष्य है और इस दिशा में महाविद्यालय निरंतर प्रयासरत है।प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स ने कहा कि विद्यार्थी के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में शिक्षक और अभिभावक दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने अभिभावकों से विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति, अध्ययन, अनुशासन एवं सकारात्मक व्यवहार पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ बेहतर संस्कार एवं जिम्मेदार नागरिक बनने के अवसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दौरान अंग्रेजी विभाग की डॉ. अजमत आरा ने प्रभावशाली पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से अभिभावकों को महाविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों, विभिन्न विभागों, उपलब्ध सुविधाओं, सह-शैक्षणिक गतिविधियों, विद्यार्थियों की उपलब्धियों एवं महाविद्यालय की उल्लेखनीय विकास यात्रा से विस्तारपूर्वक अवगत कराया। प्रस्तुति के माध्यम से अभिभावकों को महाविद्यालय की कार्यप्रणाली तथा विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध विभिन्न शैक्षणिक अवसरों की समग्र जानकारी प्राप्त हुई। अभिभावकों ने प्रस्तुति की सराहना करते हुए महाविद्यालय की उपलब्धियों एवं प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त की। कला संकाय के विभागाध्यक्ष डॉ. देवानन्द सिंह ने भी अभिभावकों से संवाद करते हुए महाविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों एवं विद्यार्थियों की प्रगति में उनके सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने अभिभावकों से महाविद्यालय के साथ निरंतर सहयोग एवं समन्वय बनाए रखने की अपील की, ताकि विद्यार्थियों की प्रतिभा, क्षमता एवं भविष्य को उचित दिशा प्रदान करते हुए उन्हें सफलता के शिखर तक पहुँचाया जा सके। कार्यक्रम का सशक्त एवं प्रभावशाली मंच संचालन डॉ. निशा शर्मा द्वारा किया गया। उनकी ओजपूर्ण वाणी, सहज संवाद शैली एवं उत्कृष्ट शब्द-संयोजन ने कार्यक्रम को जीवंत एवं सुव्यवस्थित बनाए रखा। उन्होंने कार्यक्रम के प्रत्येक चरण को गरिमापूर्ण ढंग से प्रस्तुत करते हुए उपस्थित अभिभावकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को भावनात्मक रूप से जोड़े रखा। कार्यक्रम के अंत में उप-प्राचार्या एवं आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. रश्मि गुप्ता ने सभी अभिभावकों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा—

“जब अभिभावक और शिक्षक एक साथ विद्यार्थी के भविष्य को दिशा देते हैं, तब शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि संस्कार, व्यक्तित्व एवं जीवन-निर्माण का सशक्त माध्यम बन जाती है।” उन्होंने कहा कि विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास के लिए महाविद्यालय और अभिभावकों के बीच निरंतर संवाद, विश्वास एवं सहयोग अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम में अभिभावकों की सक्रिय एवं सकारात्मक उपस्थिति ने कार्यक्रम को सार्थकता प्रदान की। अभिभावक-शिक्षक संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति एवं व्यक्तिगत विकास के लिए भविष्य की कार्ययोजना पर भी विचार-विमर्श हुआ। कार्यक्रम का समापन सकारात्मक संवाद, पारस्परिक विश्वास एवं सहयोग की भावना के साथ राष्ट्रगान के द्वारा हुआ। समारोह ने यह संदेश दिया कि महाविद्यालय, शिक्षक और अभिभावक जब एकजुट होकर विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में सहभागी बनते हैं, तो शिक्षा की दिशा और प्रभाव दोनों अधिक सशक्त एवं सार्थक हो जाते हैं। इस अवसर पर महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, सहायक आचार्यगण एवं गैर-शिक्षणेत्तर कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

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