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तकनीकी युग में आध्यात्मिकता पर हुआ मंथन, एआई और क्वांटम विषय पर राष्ट्रचिंतना की 36वीं गोष्ठी आयोजित

तकनीकी युग में आध्यात्मिकता पर हुआ मंथन, एआई और क्वांटम विषय पर राष्ट्रचिंतना की 36वीं गोष्ठी आयोजित

ग्रेटर नोएडा। राष्ट्रचिंतना की 36वीं गोष्ठी का आयोजन कैलाश इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग, नॉलेज पार्क-3, ग्रेटर नोएडा के सभागार में किया गया। ‘तकनीकी के युग में आध्यात्मिकता : एआई और क्वांटम’ विषय पर आयोजित इस गोष्ठी में तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आध्यात्मिकता के आपसी संबंधों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रो. विवेक कुमार ने किया। विषय का परिचय कराते हुए प्रो. विवेक कुमार ने कहा कि अपने आप को जानना और स्वयं को इस ब्रह्मांड से जोड़ना ही आध्यात्मिकता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच मनुष्य के लिए अपनी आंतरिक चेतना और प्रकृति से जुड़ाव को समझना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं जीआई4क्यूसी फोरम के निदेशक आनंद प्रकाश ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एआई इंजीनियरों द्वारा विकसित की गई मशीनी बुद्धिमत्ता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार ईश्वर की बनाई सृष्टि से श्रेष्ठ कोई रचना नहीं हो सकती, उसी प्रकार इंजीनियर्ड इंटेलिजेंस भी मनुष्य से ऊपर नहीं हो सकती। उन्होंने मैटर के ड्यूल नेचर सिद्धांत को आध्यात्मिकता से जोड़ते हुए तकनीक और चेतना के बीच संबंध को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के निदेशक संदीप गोयल ने कहा कि योगीराज श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में कहा है कि “कण-कण में मैं हूं और मुझमें कण-कण है।” उन्होंने कहा कि तकनीक मानव जीवन को सरल बनाने का माध्यम है। इसलिए हमें टेक्नोलॉजी का उपयोग अपने सहायक के रूप में करना चाहिए, न कि उसका दास बन जाना चाहिए। गोष्ठी में तकनीकी विकास के साथ मानवीय मूल्यों, आध्यात्मिक चेतना और आत्मबोध के महत्व पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि एआई और क्वांटम जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के दौर में मानव जीवन की दिशा और उद्देश्य को समझने के लिए आध्यात्मिक दृष्टिकोण भी आवश्यक है। इस अवसर पर राजेंद्र सोनी, संदीप सिंह, डॉ. बी.के. श्रीवास्तव, सुरजीत उपाध्याय, एन.सी. शर्मा, अरुण सिंह, धनेश शर्मा, साक्षी मावी, आकांक्षा सहित बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं, प्रबुद्धजन एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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