ग्रेटर नोएडा में शुरू हुआ बाउमा कॉनएक्सपो इंडिया 2026
ग्रेटर नोएडा में शुरू हुआ बाउमा कॉनएक्सपो इंडिया 2026

नोएडा। बाउमा कॉनएक्सपो इंडिया 2026 की शुरुआत आज इंडिया एक्सपो सेंटर, ग्रेटर नोएडा में हुई। चार दिवसीय इस कंस्ट्रक्शन और माइनिंग इक्विपमेंट प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर सरकार, उद्योग जगत, विभिन्न देशों के राजनयिक मिशनों और इंफ्रास्ट्रक्चर संगठनों के वरिष्ठ प्रतिनिधि मौजूद रहे। उद्घाटन समारोह में स्टीफन रुमेल, सीईओ, मेस्से मुएनचेन ग्रुप; लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह, एवीएसएम, वीएसएम, डायरेक्टर जनरल, बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन; एंटोनियो बार्टोली, भारत में इटली के राजदूत; और जॉर्ज एंजवाइलर, डिप्टी हेड ऑफ मिशन, जर्मनी के संघीय गणराज्य के दूतावास ने भाग लिया। इसके अलावा इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों, कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशनों, इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों और रिसर्च संस्थानों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
भूपिंदर सिंह, प्रेसिडेंट – आईएमईए, मेस्से मुएनचेन और सीईओ, मेस्से मुएनचेन इंडिया ने कहा इस संस्करण को मिल रही प्रतिक्रिया बताती है कि बाजार निवेश के लिए तैयार है। कंपनियां अपने विकास की योजनाओं के साथ प्रदर्शनी में आई हैं, जबकि खरीदार अपनी तय समयसीमा और काम से जुड़ी जरूरतों के साथ यहां पहुंच रहे हैं। हमारी भूमिका दोनों पक्षों को एक मंच पर लाना, जानकारी लेने से लेकर फैसला करने तक की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाना और महत्वपूर्ण बातचीत को लंबे समय की साझेदारी में बदलने में मदद करना है।
दीपक शेट्टी, प्रेसिडेंट, इंडियन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने कहा भारत का कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट उद्योग तेजी से बदल रहा है। ग्राहकों की बदलती जरूरतों के साथ बेहतर प्रदर्शन करने वाली, टेक्नोलॉजी से लैस और पर्यावरण के अनुकूल मशीनों की मांग बढ़ रही है। ग्राहक ऐसी मशीनें चाहते हैं, जो ज्यादा उत्पादक और कुशल हों, कठिन परिस्थितियों में भरोसेमंद तरीके से काम करें, आधुनिक डिजिटल तकनीक से लैस हों और सुरक्षा तथा पर्यावरण से जुड़े पहलुओं को बेहतर बनाएं। भारतीय मैन्युफैक्चरर्स लगातार इनोवेशन, मजबूत इंजीनियरिंग और देश में ही ज्यादा निर्माण के जरिए इन जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। बाउमा कॉनएक्सपो इंडिया भारतीय मैन्युफैक्चरर्स द्वारा तैयार किए जा रहे इन नए और आधुनिक समाधानों को दिखाने का एक महत्वपूर्ण मंच है। ये समाधान बाजार की बदलती जरूरतों को पूरा करने, भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को आगे बढ़ाने और निर्यात को बढ़ावा देने में मदद करेंगे।
रविंद्र त्यागी, प्रेसिडेंट, बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने कहा कॉन्ट्रैक्टर्स मशीनों का आकलन कुछ व्यावहारिक सवालों के आधार पर करते हैं—एक शिफ्ट में मशीन कितना काम कर सकती है? वह लगातार कितनी भरोसेमंद तरीके से चलेगी? स्पेयर पार्ट्स कितनी जल्दी मिल सकते हैं? सर्विस टीम कितनी तेजी से मदद करती है? यह प्रदर्शनी हमारे सदस्यों को मैन्युफैक्चरर्स से सीधे ये सवाल पूछने और निवेश का फैसला लेने से पहले अपनी साइट की वास्तविक जरूरतों के अनुसार हर मशीन का आकलन करने का अवसर देती है।”पूरी तरह बुक हो चुके इस आठवें संस्करण में 14.5 लाख वर्ग फुट के प्रदर्शनी क्षेत्र में 1,100 से अधिक प्रदर्शक हिस्सा ले रहे हैं। प्रदर्शनी के 18 सितंबर को समाप्त होने तक 100 से अधिक देशों से 75,000 से ज्यादा विजिटर्स के आने की उम्मीद है।
प्रदर्शनी से लेकर उपकरण खरीद के फैसले तक :
प्रदर्शनी के पहले दिन मशीन और उपकरण बनाने वाली कंपनियों को कॉन्ट्रैक्टर्स, फ्लीट मालिकों, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स और संस्थागत खरीदारों से सीधे मिलने का अवसर मिला। खरीदार आने वाली परियोजनाओं, अपने फ्लीट को बढ़ाने और पुराने उपकरणों को बदलने के लिए नई मशीनों का आकलन कर रहे हैं। प्रदर्शनी में चर्चा मुख्य रूप से उन व्यावहारिक बातों पर हो रही है, जो किसी मशीन की उपयोगिता और लागत तय करती हैं। इनमें एक शिफ्ट में मशीन कितना काम कर सकती है, कितना ईंधन इस्तेमाल करती है, वह संबंधित काम के लिए कितनी सही है और पूरी परियोजना के दौरान उसके लिए सर्विस और तकनीकी सहायता कितनी आसानी से उपलब्ध होगी, जैसी बातें शामिल हैं।खरीदार निवेश का फैसला लेने से पहले ऑपरेटर की सुरक्षा, मेंटेनेंस की जरूरत, सर्विस की तेजी और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता पर भी ध्यान दे रहे हैं।
वास्तविक कामकाजी परिस्थितियों में मशीनों के प्रदर्शन पर जोर
भारत में तेजी से आगे बढ़ रही इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक परियोजनाओं के कारण ऐसी मशीनों की मांग बढ़ रही है, जो कठिन परिस्थितियों में भी लगातार बेहतर प्रदर्शन कर सकें। मैन्युफैक्चरर्स के लिए इसका मतलब ऐसी इंजीनियरिंग और तकनीक दिखाना है, जो भारतीय परियोजनाओं की वास्तविक जरूरतों पर खरी उतर सके। वहीं खरीदार केवल मशीन की तकनीकी खूबियों तक सीमित नहीं हैं। वे मशीन की उत्पादकता, ईंधन की बचत, लगातार काम करने की क्षमता, मेंटेनेंस और तकनीकी सहायता को भी ध्यान में रख रहे हैं। प्रदर्शनी में आने वाली प्रोजेक्ट और खरीद टीमें अलग-अलग मशीनों को एक ही जगह देख और तुलना कर सकती हैं। वे सीधे मैन्युफैक्चरर्स से बात कर यह समझ सकती हैं कि कौन-सी मशीन उनके प्रोजेक्ट के इलाके, काम करने की परिस्थितियों और समयसीमा के लिए बेहतर है।
कॉन्ट्रैक्टर्स कर रहे हैं सप्लायर्स की क्षमताओं का आकलन : उपकरण का प्रदर्शन निवेश से जुड़े फैसले का केवल एक हिस्सा है। कॉन्ट्रैक्टर्स यह भी देख रहे हैं कि सप्लायर परियोजनाओं को बिना रुकावट चलाने के लिए जरूरी सर्विस नेटवर्क, रिप्लेसमेंट पार्ट्स और तकनीकी सहायता कितनी तेजी और भरोसे के साथ उपलब्ध करा सकते हैं।
यह प्रदर्शनी कॉन्ट्रैक्टर्स को मैन्युफैक्चरर्स से सीधे सवाल करने, अलग-अलग विकल्पों की तुलना करने और अपने प्रोजेक्ट साइट की वास्तविक जरूरतों के अनुसार सप्लायर की क्षमताओं को परखने का अवसर देती है।
बिहार ने मैन्युफैक्चरर्स और निवेशकों के सामने पेश किए नए अवसर : बिहार सरकार 2026 के इस संस्करण में स्टेट पार्टनर के रूप में भाग ले रही है। राज्य प्रदर्शनी में शामिल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स, निवेशकों और प्रोजेक्ट से जुड़े प्रतिनिधियों के सामने इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन और औद्योगिक क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों को पेश कर रहा है। चार दिनों के दौरान 15 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से खरीदारों के प्रतिनिधिमंडल के आने की उम्मीद है। ये प्रतिनिधि नई परियोजनाओं, फ्लीट बढ़ाने, टेक्नोलॉजी अपग्रेड और पुराने उपकरणों को बदलने से जुड़ी जरूरतों के साथ प्रदर्शनी में हिस्सा ले रहे हैं। इनकी भागीदारी से मैन्युफैक्चरर्स को यह समझने का अवसर मिलेगा कि अलग-अलग राज्यों, भौगोलिक क्षेत्रों, प्रोजेक्ट के प्रकार और कामकाजी परिस्थितियों के अनुसार मशीनों और उपकरणों की जरूरतें किस तरह बदलती हैं।




