थैलेसीमिया की रोकथाम के लिए जागरूकता, स्क्रीनिंग और जेनेटिक काउंसलिंग जरूरी: शारदाकेयर हेल्थसिटी
थैलेसीमिया की रोकथाम के लिए जागरूकता, स्क्रीनिंग और जेनेटिक काउंसलिंग जरूरी: शारदाकेयर हेल्थसिटी
विशेषज्ञों ने बीमारी की समय पर पहचान और बचाव के उपायों पर दिया जोर, थैलेसीमिया प्रभावित परिवारों की चुनौतियों पर भी हुई चर्चा

ग्रेटर नोएडा। थैलेसीमिया जैसी आनुवंशिक बीमारी के गंभीर प्रभावों को कम करने के लिए समय पर जांच, जागरूकता और जेनेटिक काउंसलिंग बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से शारदाकेयर हेल्थसिटी की ओर से थैलेसीमिया जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में चिकित्सा विशेषज्ञों, स्वास्थ्यकर्मियों, सामाजिक संगठनों और थैलेसीमिया से प्रभावित परिवारों ने हिस्सा लिया। इस दौरान बीमारी की रोकथाम, पहचान, उपचार और मरीजों के परिवारों को मिलने वाले सहयोग पर विस्तार से चर्चा की गई।
शारदाकेयर हेल्थसिटी और शारदा यूनिवर्सिटी ने शारदा हॉस्पिटल, रोटरी क्लब ऑफ दिल्ली सफदरजंग और क्रिएट लास्टिंग इम्पैक्ट के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम की थीम “द फर्स्ट स्टेप टू इरेडिकेशन (उन्मूलन की ओर पहला कदम)” रखी गई। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को थैलेसीमिया के प्रति जागरूक करना और बीमारी के गंभीर रूपों की रोकथाम के लिए समय पर जांच तथा आनुवंशिक परामर्श को प्रोत्साहित करना था।
शारदाकेयर हेल्थसिटी के हेमेटोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट विभाग के वाइस चेयरमैन डॉ. पवन कुमार सिंह ने पैनल चर्चा का संचालन किया। उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया की रोकथाम के लिए पहले से तैयारी और जागरूकता का दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। चिकित्सा क्षेत्र में हुई प्रगति से इस बीमारी के उपचार में सुधार हुआ है, लेकिन आनुवंशिक जोखिमों की समय रहते पहचान करना और लोगों को सही जानकारी उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसके लिए स्वास्थ्य संस्थानों, चिकित्सा विशेषज्ञों और समाज के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शारदा यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. डॉ. सिबाराम खारा शामिल हुए। इसके अलावा रोटरी क्लब ऑफ दिल्ली सफदरजंग की अध्यक्ष सुमति पुरी, डॉ. प्रिया ओबेरॉय, मुक्ता बंसल, डॉ. मुकुल अग्रवाल, शोभा तुली, डॉ. राहुल भार्गव, जितेंद्र नंदा और डॉ. मीत कुमार सहित कई विशेषज्ञों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. राहुल भार्गव ने “अंडरस्टैंडिंग थैलेसीमिया” विषय पर सत्र आयोजित कर बीमारी की आनुवंशिक प्रकृति, इसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव और रोकथाम के महत्व की जानकारी दी। वहीं, शोभा तुली ने “थैलेसीमिया—एक अभिभावक की नजर से” विषय पर अपने विचार साझा करते हुए बताया कि इस बीमारी से प्रभावित परिवारों को लंबे समय तक चिकित्सा देखभाल, भावनात्मक सहयोग और सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता होती है।
विशेषज्ञों ने बताया कि थैलेसीमिया रक्त से संबंधित एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें शरीर की हीमोग्लोबिन बनाने की क्षमता प्रभावित होती है। बीमारी के गंभीर रूप में मरीजों को नियमित रक्त चढ़ाने, लगातार चिकित्सकीय निगरानी और लंबे समय तक उपचार की जरूरत पड़ सकती है। इसका प्रभाव मरीज के साथ-साथ पूरे परिवार के जीवन पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि कैरियर स्क्रीनिंग और जेनेटिक काउंसलिंग के माध्यम से लोगों को आनुवंशिक जोखिमों की जानकारी मिल सकती है। इससे दंपती प्रशिक्षित स्वास्थ्य विशेषज्ञों से परामर्श लेकर सोच-समझकर निर्णय ले सकते हैं। कार्यक्रम में थैलेसीमिया के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए दो विशेष वीडियो भी प्रदर्शित किए गए। रोटरी क्लब के प्रतिनिधियों ने भी बीमारी की रोकथाम और जागरूकता अभियान को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. प्रिया ओबेरॉय ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
शारदाकेयर हेल्थसिटी ने दोहराया रोकथाम के प्रति संकल्प
इस पहल के माध्यम से शारदाकेयर हेल्थसिटी ने जागरूकता, समय पर जांच और आनुवंशिक परामर्श के जरिए निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने, थैलेसीमिया से प्रभावित परिवारों को सहयोग देने और चिकित्सा विशेषज्ञों व सामाजिक संगठनों के सामूहिक प्रयासों से बीमारी के दीर्घकालिक बोझ को कम करने की दिशा में काम करना




