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शारदाकेयर हेल्थसिटी ने थैलेसीमिया की रोकथाम के लिए स्क्रीनिंग और आनुवंशिक परामर्श पर दिया जोर

शारदाकेयर हेल्थसिटी ने थैलेसीमिया की रोकथाम के लिए स्क्रीनिंग और आनुवंशिक परामर्श पर दिया जोर

विशेषज्ञों ने जागरूकता बढ़ाने, समय पर जांच कराने और परिवारों को सही चिकित्सकीय सलाह देने की जरूरत बताई

ग्रेटर नोएडा, 13 अक्टूबर। शारदाकेयर हेल्थसिटी ने थैलेसीमिया की रोकथाम और इसके गंभीर रूपों के जोखिम को कम करने के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में समय पर जांच, आनुवंशिक परामर्श और जन-जागरूकता को इस बीमारी से बचाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि थैलेसीमिया के उपचार के साथ-साथ इसकी रोकथाम पर ध्यान देना भी आवश्यक है, ताकि प्रभावित परिवारों को लंबे समय तक चलने वाली चिकित्सा और आर्थिक चुनौतियों से राहत मिल सके।

शारदाकेयर हेल्थसिटी और शारदा विश्वविद्यालय की ओर से शारदा अस्पताल, रोटरी क्लब ऑफ दिल्ली सफदरजंग तथा क्रिएट लास्टिंग इम्पैक्ट के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम की थीम ‘उन्मूलन की ओर पहला कदम’ रही। इसमें चिकित्सा विशेषज्ञों, स्वास्थ्यकर्मियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और थैलेसीमिया से प्रभावित परिवारों ने भाग लिया। कार्यक्रम में बीमारी के कारणों, पहचान, उपचार और रोकथाम के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।

शारदाकेयर हेल्थसिटी के हेमेटोलॉजी एवं बोन मैरो प्रत्यारोपण विभाग के वाइस चेयरमैन डॉ. पवन कुमार सिंह ने पैनल चर्चा का संचालन किया। उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया की रोकथाम के लिए जागरूकता, समय पर जांच और आनुवंशिक परामर्श को प्राथमिकता देना जरूरी है। चिकित्सा क्षेत्र में हुई प्रगति से उपचार के विकल्प बेहतर हुए हैं, लेकिन आनुवंशिक जोखिमों की समय रहते पहचान करना और लोगों को सही निर्णय लेने में मदद देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसके लिए स्वास्थ्य संस्थानों, चिकित्सा विशेषज्ञों और समुदायों के बीच समन्वय आवश्यक है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शारदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. सिबाराम खारा शामिल हुए। इसके अलावा रोटरी क्लब ऑफ दिल्ली सफदरजंग की अध्यक्ष सुमति पुरी, एजी रान, डॉ. प्रिया ओबेरॉय, मुक्ता बंसल, एम्स नई दिल्ली के क्लिनिकल हेमेटोलॉजी एवं बोन मैरो प्रत्यारोपण विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मुकुल अग्रवाल, शोभा तुली, एफएमआरआई गुरुग्राम के हेमेटोलॉजी एवं बोन मैरो प्रत्यारोपण विभाग के प्रिंसिपल डायरेक्टर एवं प्रमुख डॉ. राहुल भार्गव, जितेंद्र नंदा और मैरेंगो एशिया हॉस्पिटल गुरुग्राम के क्लिनिकल डायरेक्टर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मीत कुमार सहित अन्य विशेषज्ञ मौजूद रहे।

विशेषज्ञों ने समझाई बीमारी की प्रकृति

कार्यक्रम के दौरान डॉ. राहुल भार्गव ने ‘थैलेसीमिया को समझना’ विषय पर सत्र आयोजित किया। इसमें उन्होंने बीमारी के आनुवंशिक स्वरूप, एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक इसके पहुंचने की प्रक्रिया, शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव और रोकथाम के महत्व की जानकारी दी।

वहीं, शोभा तुली ने ‘माता-पिता के नजरिये से थैलेसीमिया का सफर’ विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने थैलेसीमिया से प्रभावित परिवारों की दीर्घकालिक चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए विश्वसनीय चिकित्सकीय सलाह, भावनात्मक सहयोग और सामुदायिक जागरूकता की आवश्यकता बताई। रोटरी क्लब की अध्यक्ष सुमति पुरी ने भी बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और बचाव के उपायों को प्रोत्साहित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। इस दौरान थैलेसीमिया और उसकी रोकथाम से संबंधित दो जागरूकता वीडियो भी प्रदर्शित किए गए। कार्यक्रम के अंत में डॉ. प्रिया ओबेरॉय ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

क्या है थैलेसीमिया और क्यों जरूरी है जांच?

थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त संबंधी बीमारी है, जो शरीर में पर्याप्त हीमोग्लोबिन बनने की क्षमता को प्रभावित करती है। हीमोग्लोबिन रक्त में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। बीमारी की गंभीरता के आधार पर मरीजों को नियमित रक्त चढ़ाने, लगातार चिकित्सकीय निगरानी और लंबे समय तक उपचार की आवश्यकता हो सकती है। इससे मरीजों के साथ-साथ उनके परिवारों पर भी भावनात्मक और आर्थिक दबाव पड़ता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कैरियर स्क्रीनिंग और आनुवंशिक परामर्श के माध्यम से व्यक्ति यह समझ सकते हैं कि उनमें थैलेसीमिया से संबंधित आनुवंशिक बदलाव मौजूद हैं या नहीं और भावी संतान में बीमारी का जोखिम कितना हो सकता है। इसके आधार पर योग्य चिकित्सकीय विशेषज्ञों से परामर्श लेकर सोच-समझकर निर्णय लिए जा सकते हैं।

इस पहल के माध्यम से शारदाकेयर हेल्थसिटी ने बीमारी के उपचार के साथ-साथ बचाव पर आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सा विशेषज्ञों, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और प्रभावित परिवारों को एक मंच पर लाकर थैलेसीमिया के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा इसकी रोकथाम के लिए सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करना रहा।

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