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विश्व हेपेटाइटिस दिवस: समय पर जांच और टीकाकरण से हेपेटाइटिस पर पाया जा सकता है काबू, लिवर को रखें स्वस्थ

विश्व हेपेटाइटिस दिवस: समय पर जांच और टीकाकरण से हेपेटाइटिस पर पाया जा सकता है काबू, लिवर को रखें स्वस्थ

ग्रेटर नोएडा । हेपेटाइटिस एक ऐसी गंभीर लिवर बीमारी है जो अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे बढ़ती है, इसलिए इसे “साइलेंट डिजीज” भी कहा जाता है। समय पर पहचान न होने पर यह लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर और लिवर कैंसर जैसी जानलेवा जटिलताओं का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता, नियमित स्क्रीनिंग, समय पर टीकाकरण और शुरुआती उपचार से हेपेटाइटिस के अधिकांश मामलों को रोका और प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, मॉडल टाउन के विशेषज्ञों ने लोगों से लिवर के स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने और जोखिम होने पर समय पर जांच कराने की अपील की।

डॉ. अपूर्व पांडे, एडिशनल डायरेक्टर एवं विभागाध्यक्ष, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, मॉडल टाउन, नई दिल्ली ने कहा, “हेपेटाइटिस आज भी एक गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है, क्योंकि यह अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे बढ़ता है और अधिकांश मरीजों में तब तक पता नहीं चलता, जब तक लिवर को काफी नुकसान नहीं पहुंच जाता। हमारी ओपीडी में हर महीने लगभग 100–150 हेपेटाइटिस के मरीज आते हैं और पिछले कुछ वर्षों में इसके मामलों में वृद्धि देखी गई है, जिसका प्रमुख कारण बेहतर जागरूकता और व्यापक स्क्रीनिंग है। शुरुआत में लगातार थकान, मांसपेशियों में दर्द, बिना कारण वजन कम होना और बाद में पीलिया जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। हेपेटाइटिस-बी संक्रमित रक्त, असुरक्षित यौन संबंध, दूषित सुई और संक्रमित मां से बच्चे में फैलता है, जबकि हेपेटाइटिस-सी मुख्य रूप से संक्रमित रक्त के संपर्क से फैलता है। हेपेटाइटिस-बी से टीकाकरण द्वारा बचाव संभव है, वहीं हेपेटाइटिस-सी का समय पर पहचान और आधुनिक एंटीवायरल दवाओं से 95 प्रतिशत से अधिक मामलों में सफल उपचार किया जा सकता है। समय पर जांच, शीघ्र उपचार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी गंभीर जटिलताओं से प्रभावी रूप से बचा जा सकता है।”डॉ. राकेश कुमार जगदीश, निदेशक – गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एवं इंटरवेंशनल एंडोस्कोपी, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा एक्सटेंशन * ने कहा, *”हेपेटाइटिस आज भी एक गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती है, क्योंकि इसके लक्षण अक्सर शुरुआती चरण में दिखाई नहीं देते और मरीजों को तब तक बीमारी का पता नहीं चलता जब तक लिवर को काफी नुकसान नहीं पहुंच जाता। हमारी ओपीडी में हर महीने लगभग 15–20 हेपेटाइटिस के मरीज आते हैं। समय पर टीकाकरण, नियमित जांच और शुरुआती उपचार से लिवर सिरोसिस, लिवर कैंसर और लिवर फेलियर जैसी गंभीर जटिलताओं से बचाव संभव है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, स्वस्थ वजन बनाए रखना, शराब और तंबाकू से दूरी तथा सुरक्षित चिकित्सा प्रक्रियाओं का पालन लिवर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मधुमेह, मोटापा या परिवार में लिवर रोग का इतिहास रखने वाले लोगों को नियमित लिवर जांच अवश्य करानी चाहिए।”डॉ. आलोक दुबे, कंसल्टेंट – रोबोटिक एवं लैप्रोस्कोपिक जीआई सर्जरी एवं लिवर ट्रांसप्लांट, यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल नॉएडा 110 ने कहा हेपेटाइटिस को “साइलेंट किलर” इसलिए कहा जाता है क्योंकि शुरुआती चरण में इसके लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते। जब तक मरीज को कमजोरी, भूख कम लगना, पीलिया, गहरे रंग का पेशाब या पेट में सूजन जैसे संकेत महसूस होते हैं, तब तक लिवर काफी हद तक प्रभावित हो चुका होता है। वर्तमान समय में बच्चों और युवाओं में हेपेटाइटिस ए और ई के मामले अधिक देखने को मिल रहे हैं, जिनका प्रमुख कारण दूषित भोजन और प्रदूषित पानी है। वहीं, हेपेटाइटिस बी के मामले भी लगातार सामने आते हैं, जो संक्रमित रक्त, असुरक्षित सुई, असुरक्षित यौन संबंध या संक्रमित मां से शिशु में फैल सकता है। समय पर जांच, हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण, स्वच्छ भोजन-पानी और व्यक्तिगत स्वच्छता इस संक्रमण से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं। किसी भी संदिग्ध लक्षण को नजरअंदाज न करें और तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लें।अस्पताल के विशेषज्ञों ने अपील की कि हेपेटाइटिस के प्रति जागरूकता बढ़ाना, समय पर टीकाकरण कराना, नियमित स्वास्थ्य जांच कराना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। समय पर पहचान और उपचार से लिवर को सुरक्षित रखते हुए गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

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