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एसडीआरवी कॉन्वेंट स्कूल ने ई-वेस्ट प्रबंधन में स्थापित किया नया कीर्तिमान

एसडीआरवी कॉन्वेंट स्कूल ने ई-वेस्ट प्रबंधन में स्थापित किया नया कीर्तिमान

ग्रेटर नोएडा । विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर एसडीआरवी कॉन्वेंट स्कूल द्वारा ‘करो संभव’ एवं यूनिवर्सिटी ऑफ मेम्फिस, यूएसए, के सहयोग से ई-वेस्ट प्रबंधन एवं संग्रहण पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का संचालन ‘करो संभव’ के स्पेशलिस्ट – अकाउंट मैनेजमेंट, ओंकार मुंगेकर द्वारा किया गया, जो ई-वेस्ट एवं प्लास्टिक वेस्ट प्रबंधन, ईआरपी डिज़ाइन, अनुपालन प्रबंधन, जागरूकता कार्यक्रमों तथा राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सहयोग में कार्यरत एक प्रतिष्ठित संस्था है।कार्यशाला में छात्रों ने अत्यंत उत्साह के साथ भाग लिया तथा अनेक जिज्ञासापूर्ण प्रश्न पूछे, जिनका समाधान मुंगेकर ने धैर्यपूर्वक किया। इस संवादात्मक सत्र ने छात्रों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर छात्रों एवं शिक्षकों द्वारा पर्याप्त मात्रा में ई-वेस्ट का संग्रह भी किया गया।इसी क्रम में, विश्व पृथ्वी दिवस के उपलक्ष्य में विद्यालय की सभी कक्षाओं में विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न अर्थ डे गतिविधियों का भी आयोजन किया गया। इन गतिविधियों के माध्यम से छात्रों ने पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता एवं सतत विकास के महत्व को समझते हुए अपनी रचनात्मकता और जागरूकता का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण ‘एसडीआरवी कॉन्वेंट स्कूल’ एवं ‘करो संभव’ के मध्य एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करना रहा, जिससे ई-वेस्ट प्रबंधन एवं संबंधित गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया जाएगा। इस पहल के साथ, एसडीआरवी कॉन्वेंट स्कूल, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र का पहला विद्यालय बन गया है, जिसने इस प्रकार का सहयोग स्थापित किया है।यह कार्यशाला एसडीआरवी कॉन्वेंट स्कूल के पब्लिक हेल्थ क्लब द्वारा आयोजित की गई, जो विद्यालय की पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या, गार्गी घोष कंसाबनिक ने ओंकार मुंगेकर को एक पौधा एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया तथा इस सहयोग के लिए अपनी शुभकामनाएँ व्यक्त करते हुए सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की दिशा में मिलकर कार्य करने का संदेश दिया, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर और स्वच्छ विश्व का निर्माण किया जा सके।यह पहल विद्यालय के सतत विकास एवं जिम्मेदार नागरिकता के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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