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ग्रेटर नोएडा में 61वें आईएचजीएफ दिल्ली मेले का शुभारंभ, 3000 से अधिक प्रदर्शक और 100 से ज्यादा देशों के खरीदारों के जुटने की उम्मीद

ग्रेटर नोएडा में 61वें आईएचजीएफ दिल्ली मेले का शुभारंभ, 3000 से अधिक प्रदर्शक और 100 से ज्यादा देशों के खरीदारों के जुटने की उम्मीद

केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने किया उद्घाटन, हस्तशिल्प निर्यात को एक अरब डॉलर तक पहुंचाने और युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित करने पर दिया जोर

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 61वें आईएचजीएफ दिल्ली मेला-ऑटम 2026 का मंगलवार को केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने उद्घाटन किया। 13 से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस पांच दिवसीय मेले में भारत के हस्तशिल्प, गृह सज्जा, जीवनशैली, फैशन, फर्नीचर और आंतरिक सज्जा से जुड़े उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रदर्शित किया जा रहा है। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एवं वस्त्र राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा भी उपस्थित रहे।हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) की ओर से आयोजित इस मेले में 17 हॉलों में 3000 से अधिक प्रदर्शक हिस्सा ले रहे हैं। इसके अतिरिक्त इंडिया एक्सपो सेंटर के विभिन्न स्तरों पर स्थित 900 स्थायी शोरूम भी खरीदारों के लिए तैयार किए गए हैं। आयोजन में अमेरिका और यूरोप सहित भारत के प्रमुख निर्यात बाजारों से बड़ी संख्या में खरीदार पहुंचे। मेले में 100 से अधिक देशों के खरीदारों के शामिल होने की उम्मीद है।

केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने मेले के विस्तार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती पहचान की सराहना करते हुए कहा कि आईएचजीएफ दिल्ली मेला भारतीय निर्माताओं और निर्यातकों को विदेशी खरीदारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने उद्योग से नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों की तलाश करने, उभरते बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाने और निर्यात को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने ईपीसीएच और उद्योग जगत से हस्तशिल्प निर्यात के लिए एक अरब डॉलर का लक्ष्य निर्धारित करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि हस्तशिल्प क्षेत्र में नए निर्यातकों और युवा उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है। अनुभवी निर्यातकों को युवाओं का मार्गदर्शन करना चाहिए, ताकि नई प्रतिभाओं को डिजाइन, हस्तशिल्प और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकें। उन्होंने पहली बार निर्यात करने वालों की संख्या कम से कम 10 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए भी सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया।

गिरिराज सिंह ने हस्तशिल्प क्षेत्र को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के लिए मौजूदा शिल्प समूहों के विकास, नए समूहों के निर्माण और जिलावार हथकरघा, हस्तशिल्प एवं वस्त्र क्षमताओं की पहचान करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने उत्पादकों और निर्यातकों को नए बाजारों तक पहुंचाने तथा उनके उत्पादों को वैश्विक खरीदारों के सामने बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने के लिए सुविधा केंद्र स्थापित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने डिजिटल मंचों के माध्यम से भारतीय हस्तशिल्प को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ावा देने की संभावनाओं को भी रेखांकित किया।उद्घाटन समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री ने ईयूडीआर अनुपालन एप्लिकेशन का भी शुभारंभ किया। ईपीसीएच की इस पहल का उद्देश्य लकड़ी और लकड़ी से बने उत्पादों की वैध खरीद, उनके स्रोत तथा आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी सुनिश्चित करना है। इससे उत्पादों की उत्पत्ति और परिवहन संबंधी जानकारी को बेहतर तरीके से दर्ज करने तथा पारदर्शिता को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एवं वस्त्र राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने कहा कि आईएचजीएफ दिल्ली मेला एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन के रूप में विकसित हुआ है। यह केवल व्यापार और आर्थिक विकास का माध्यम नहीं है, बल्कि भारत की पारंपरिक कलाओं, शिल्प कौशल और पीढ़ियों से चली आ रही विरासत को संरक्षित करने का भी महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में प्रदर्शकों के योगदान की सराहना की।

ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने कहा कि आईएचजीएफ दिल्ली मेला भारतीय हस्तशिल्प के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सोर्सिंग मंच है। प्रत्येक संस्करण नए व्यापारिक अवसर पैदा करने, खरीदारों के साथ संबंध मजबूत करने और भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों में पहचान दिलाने में योगदान देता है। उन्होंने प्रदर्शकों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय हस्तशिल्प एवं वस्त्रों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

ईपीसीएच के महानिदेशक की भूमिका में मुख्य संरक्षक और इंडिया एक्सपो मार्ट लिमिटेड के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि स्टॉल लगाने का न्यूनतम शुल्क 8,500 रुपये से घटाकर 2,500 रुपये करने के बाद पंजीकरण में 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि हस्तशिल्प क्षेत्र में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, ग्रामीण कारीगरों और पारंपरिक शिल्प समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने जलकुंभी शिल्प को बढ़ावा देने वाली पहल का भी उल्लेख किया।

ईपीसीएच के उपाध्यक्ष सागर मेहता ने कहा कि प्रदर्शकों ने अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की बदलती पसंद और बाजार के रुझानों को ध्यान में रखते हुए नए उत्पादों के डिजाइन और विकास पर काम किया है। वहीं, मेला स्वागत समिति के अध्यक्ष अवधेश अग्रवाल ने कहा कि इस आयोजन से नए व्यापारिक संबंध विकसित होते हैं और डिजाइन आधारित, बेहतर मूल्य वाले उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है।स्वागत समिति के उपाध्यक्ष प्रदीप मुछाला, प्रियेश भंडारी, राजेश कुमार जैन, सलमान आजम और आरबी लाहोटी ने भी मेले को अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने, नए खरीदारों तक पहुंच बनाने और भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा करने वाला मंच बताया। ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राजेश रावत ने कहा कि बदलते वैश्विक रुझानों के अनुरूप उत्पादों में विविधता और डिजाइन आधारित उत्पादों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।मेले के दौरान अगले तीन दिनों में वैश्विक खरीदारों के रुझान, उत्पादन एवं खरीद प्रक्रिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग, ऑनलाइन दृश्यता, ईयूडीआर अनुपालन, यूरोपीय संघ के पैकेजिंग नियम, भारत के मुक्त व्यापार समझौते तथा निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं जैसे विषयों पर ज्ञान सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों का उद्देश्य निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार की आवश्यकताओं, नए नियमों और व्यापार विस्तार की संभावनाओं से परिचित कराना है।ईपीसीएच के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत से हस्तशिल्प का कुल निर्यात 33,168 करोड़ रुपये यानी 3,754 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। ऐसे में आईएचजीएफ दिल्ली मेला भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक बाजार में नई पहचान दिलाने, कारीगरों को अवसर उपलब्ध कराने और निर्यात वृद्धि को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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