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भाजपा नेता सैयद अहसान अख्तर को जान से मारने की धमकी, समर्थकों ने उठाई सुरक्षा और सख्त कार्रवाई की मांग । बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा के समर्थन की अपील के बाद मिली कथित धमकियां, पुलिस में शिकायत दर्ज

भाजपा नेता सैयद अहसान अख्तर को जान से मारने की धमकी, समर्थकों ने उठाई सुरक्षा और सख्त कार्रवाई की मांग

बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा के समर्थन की अपील के बाद मिली कथित धमकियां, पुलिस में शिकायत दर्ज

नोएडा। भारतीय जनता पार्टी के युवा नेता एवं भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के नेता सैयद अहसान अख्तर को बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में अल्पसंख्यक समाज से भाजपा के पक्ष में मतदान की अपील करने के बाद कथित रूप से जान से मारने की धमकियां और अभद्र संदेश मिलने का मामला सामने आया है। इस संबंध में उन्होंने संबंधित पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए अपनी जान को खतरा बताया है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।घटना के बाद उनके समर्थकों में आक्रोश देखने को मिल रहा है। समर्थकों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को अपनी राजनीतिक विचारधारा व्यक्त करने या किसी दल का समर्थन करने के कारण धमकियां मिलना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उनका कहना है कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी राजनीतिक राय रखने, किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का अधिकार देता है।समर्थकों ने उत्तर प्रदेश सरकार, उत्तर प्रदेश पुलिस और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों की जल्द पहचान की जाए, उन्हें गिरफ्तार किया जाए तथा सैयद अहसान अख्तर को प्राप्त धमकियों की गंभीरता को देखते हुए पर्याप्त पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।समर्थकों का कहना है कि लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक आवाज़ को भय और हिंसा के माध्यम से दबाने का प्रयास स्वीकार्य नहीं है। यदि किसी राजनीतिक कार्यकर्ता को केवल अपने विचार व्यक्त करने पर जान से मारने की धमकियां मिलती हैं, तो यह कानून व्यवस्था और लोकतांत्रिक व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

समर्थकों ने कहा, “हम सैयद अहसान अख्तर के साथ मजबूती से खड़े हैं। लोकतंत्र में विचारों का जवाब विचारों से दिया जाना चाहिए, धमकियों से नहीं। प्रशासन दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करे और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में कोई भी लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करने का साहस न कर सके।”

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