ग्रेटर नोएडा में ‘बिलियन फाउंडर्स लैब’ की शुरुआत, 108 विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उद्यमिता का प्रशिक्षण
ग्रेटर नोएडा में ‘बिलियन फाउंडर्स लैब’ की शुरुआत, 108 विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उद्यमिता का प्रशिक्षण
तकनीक से वंचित विद्यार्थियों को नवाचार और निर्माण से जोड़ने की पहल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से समाधान खोजने पर जोर

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा के साईं अक्षरधाम विद्यापीठ में‘लर्न विद लीडर्स’ की ओर से ‘बिलियन फाउंडर्स लैब’ की शुरुआत की गई। इस पहल के अंतर्गत 108 विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, समस्या समाधान, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक और रचनात्मक सोच से जोड़ना है, जिन्हें अब तक अत्याधुनिक तकनीकी संसाधनों तक अपेक्षाकृत कम पहुंच मिली है।कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने चैटजीपीटी, क्लॉड और जेमिनी जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित साधनों का प्रयोग किया। प्रशिक्षण के साथ ही विद्यार्थियों की जिज्ञासा और सोच में बदलाव देखने को मिला। उन्होंने सवाल किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से अपराध कम करने में किस प्रकार योगदान दिया जा सकता है, अपना अनुप्रयोग कैसे बनाया जा सकता है और कूटलेखन की शुरुआत किस तरह की जाए।
केवल तकनीक का इस्तेमाल नहीं, निर्माण की सोच विकसित करना लक्ष्य
‘बिलियन फाउंडर्स लैब’ का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साधनों का इस्तेमाल सिखाना नहीं, बल्कि उन्हें वास्तविक समस्याओं की पहचान करने, उनके समाधान खोजने और अपने विचारों का प्रारूप तैयार करने के लिए सक्षम बनाना है।कार्यक्रम में बताया गया कि जनरेटिव यानी सृजनात्मक कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने किसी विचार को प्रारूप में बदलने की कई पारंपरिक बाधाओं को कम कर दिया है। इससे विद्यार्थियों के लिए नए विचारों को प्रयोग में लाने और उन्हें आगे विकसित करने के अवसर बढ़े हैं।‘लर्न विद लीडर्स’ की सह-संस्थापक गुंजन अग्रवाल ने कहा कि ऐसे विद्यार्थियों तक अवसर पहुंचाना बेहद जरूरी है, जिनमें भविष्य में ऐसी कंपनी या संस्था खड़ी करने की क्षमता है, जिसका आज अस्तित्व ही नहीं है। उन्होंने कहा कि उद्देश्य बच्चों को केवल चैटजीपीटी चलाना सिखाना नहीं, बल्कि उन्हें समस्याओं की पहचान करने, समाधान तैयार करने और भविष्य में नए उत्पाद, उद्यम तथा रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए तैयार करना है।
विद्यार्थियों में दिखी रचनात्मकता
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन भी किया। छात्रा लक्ष्मी प्रजापति ने कूटलेखन सीखकर भविष्य में अपराध कम करने में मददगार अनुप्रयोग विकसित करने की इच्छा जताई। वहीं छात्र मोहित ने निर्देश आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से भगवान शिव की कल्पना पर आधारित चित्र तैयार किया। विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से खिंचवाई गई तस्वीर को भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से कार्टून शैली में बदलकर अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। विद्यालय की प्रधानाचार्या लक्ष्मी सूर्यकला ने कहा कि विद्यार्थियों को भले ही अन्य संपन्न परिवेश के बच्चों के समान तकनीकी अवसर नहीं मिले हों, लेकिन उनकी कल्पना और महत्वाकांक्षा में कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों ने यह समझा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल दूसरों के भविष्य को बदलने वाली तकनीक नहीं है, बल्कि वे स्वयं भी इसका उपयोग कर कुछ नया बना सकते हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में ‘निर्माण की खाई’ बड़ी चुनौती
कार्यक्रम की सामग्री में कहा गया कि भारत में डिजिटल खाई के बाद अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में एक नई ‘निर्माण की खाई’ सामने आ सकती है। बड़ी संख्या में लोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उत्पादों और सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन अपेक्षाकृत कम लोग इसका उपयोग नई कंपनियां बनाने, बौद्धिक संपदा विकसित करने और नई आर्थिक गतिविधियां पैदा करने के लिए कर पाएंगे।‘बिलियन फाउंडर्स लैब’ का उद्देश्य इसी अंतर को कम करना है। विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के रचनात्मक उपयोग से शुरुआत कराते हुए आगे समस्या की पहचान, समाधान का प्रारूप तैयार करने और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाने की योजना है।
गांवों और छोटे शहरों तक पहुंचाने की तैयारी
आयोजकों के अनुसार, इस पहल को भविष्य में जरूरतमंद विद्यालयों, गांवों, छोटे शहरों और जमीनी स्तर के समुदायों तक पहुंचाने की योजना है, ताकि प्रतिभा और अवसरों के बीच की दूरी को कम किया जा सके। कार्यक्रम में यह भी स्पष्ट किया गया कि केवल एक कार्यशाला में भाग लेने से कोई विद्यार्थी तुरंत उद्यमी नहीं बन जाता। इस पहल की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि कितने विद्यार्थी आगे भी इस प्रक्रिया से जुड़े रहते हैं, कितनी वास्तविक समस्याओं की पहचान करते हैं, कितने प्रारूप तैयार किए जाते हैं और कितने विद्यार्थियों को आगे गहन मार्गदर्शन प्राप्त होता है।ग्रेटर नोएडा के 108 विद्यार्थियों से शुरू हुई ‘बिलियन फाउंडर्स लैब’ की यह पहल तकनीकी शिक्षा को केवल उपयोग तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों को निर्माता, नवाचारी और भविष्य के उद्यमी के रूप में तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।




