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हरिश्चंद्र भाटी ने गुर्जर समाज की राजनीतिक भागीदारी का मुद्दा उठाया, तीन महीने में सरकार से वार्ता की मांग

हरिश्चंद्र भाटी ने गुर्जर समाज की राजनीतिक भागीदारी का मुद्दा उठाया, तीन महीने में सरकार से वार्ता की मांग

ग्रेटर नोएडा। अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरिश्चंद्र भाटी ने कहा कि गुर्जर समाज को राजनीतिक, प्रशासनिक और संवैधानिक संस्थाओं में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। समाज की शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक भागीदारी से जुड़ी मांगों को लेकर महासभा ने केंद्र सरकार को 10 सूत्रीय मांग पत्र भेजा है। उन्होंने सरकार से तीन महीने के भीतर महासभा के प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता करने की मांग की। यह बातें उन्होंने गुरुवार को स्वर्ण नगरी में आयोजित प्रेस वार्ता में कहीं।हरिश्चंद्र भाटी ने कहा कि 27 अक्टूबर को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती के अवसर पर गुर्जर-कुर्मी-पटेल राष्ट्रीय एकता दिवस आयोजित किया गया था। इसमें देश-विदेश से समाज के प्रतिनिधियों और युवाओं ने भाग लिया। उन्होंने सम्राट मिहिर भोज, नागभट्ट और 1857 की क्रांति में कोतवाल धन सिंह गुर्जर सहित समाज के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख किया।उन्होंने अंग्रेजी शासन के दौरान वर्ष 1871 में लागू क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट का जिक्र करते हुए कहा कि इस कानून से प्रभावित समुदायों को लंबे समय तक सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा। स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1952 में इन समुदायों को विमुक्त किया गया, लेकिन शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सम्मान के क्षेत्र में अभी भी अधिक प्रयासों की आवश्यकता है।

भाटी ने कहा कि समाज की भागीदारी केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। शिक्षा, प्रशासन, न्यायपालिका, मीडिया और रोजगार के क्षेत्र में भी युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए। महासभा के 10 सूत्रीय मांग पत्र में राजनीतिक प्रतिनिधित्व, कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को शैक्षिक सुविधाएं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग, रोजगार एवं कौशल विकास, मीडिया में भागीदारी और सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि मांग पत्र राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, अन्य केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भेजा गया है। भाटी ने कहा कि यदि तीन महीने के भीतर सरकार की ओर से सकारात्मक पहल नहीं होती है तो महासभा समाज के बीच जाकर आगे की लोकतांत्रिक रणनीति तय करेगी।प्रेस वार्ता में उन्होंने दहेज प्रथा और अनावश्यक मृत्यु भोज जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने की अपील भी की। उन्होंने युवाओं से शिक्षा और अनुशासन को प्राथमिकता देने तथा अपनी मांगों को शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से उठाने का आह्वान किया।इस दौरान हरिश्चंद्र भाटी ने सक्रिय राजनीति से अलग होने की घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि भाजपा उत्तर प्रदेश की प्रदेश कार्यसमिति में नामित किए जाने पर उन्होंने पार्टी नेतृत्व का आभार जताया है, लेकिन 75 वर्ष से अधिक आयु, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और बड़े बेटे के निधन के बाद की व्यक्तिगत परिस्थितियों के चलते सक्रिय राजनीति से अलग होने का निर्णय लिया है। इस संबंध में उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को त्यागपत्र भेजकर उसे स्वीकार करने का अनुरोध किया है।

उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय गुर्जर महासभा समाज की एकता, अधिकारों, शिक्षा और रोजगार के मुद्दों को आगे भी लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से उठाती रहेगी।

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