दनकौर में 103वां श्री कृष्ण जन्मोत्सव द्रोण मेला शुरू, जन्माष्टमी के दिन उमड़ी भारी भीड़।
दनकौर में 103वां श्री कृष्ण जन्मोत्सव द्रोण मेला शुरू
श्री द्रोणाचार्य गौशाला समिति के सानिध्य में 12 दिवसीय मेले का आयोजन, दंगल से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक होंगे आकर्षण

ग्रेटर नोएडा। दनकौर स्थित ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी में श्री द्रोणाचार्य गौशाला समिति के सानिध्य में 103वां श्री कृष्ण जन्मोत्सव द्रोण मेला शुक्रवार से शुरू हो गया। जन्माष्टमी पर्व के अवसर पर आयोजित यह 12 दिवसीय मेला 4 सितंबर से 15 सितंबर तक चलेगा। मेले का शुभारंभ एसीपी रवि शंकर एवं दनकौर कोतवाली प्रभारी मनोज कुमार चौहान ने किया।
दनकौर को गुरु द्रोणाचार्य की कर्मस्थली और भील युवराज एकलव्य की तपोभूमि के रूप में जाना जाता है। यहां स्थित प्रसिद्ध श्री द्रोणाचार्य मंदिर परिसर में पिछले 102 वर्षों से श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर द्रोण मेला आयोजित होता आ रहा है।
शुभारंभ अवसर पर एसीपी रवि शंकर ने कहा कि समरसता और आपसी सौहार्द से जुड़े ऐसे धार्मिक मेले भारतीय सभ्यता और संस्कृति की पहचान हैं। उन्होंने मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं।
तीन दिन होगा भव्य दंगल
मेले का प्रमुख आकर्षण 6, 7 और 8 सितंबर को श्री डॉट तालाब में आयोजित होने वाला विशाल दंगल रहेगा। मेला समिति के अध्यक्ष राकेश गर्ग और प्रबंधक रजनीकांत अग्रवाल ने बताया कि क्षेत्रवासियों की मांग पर इस वर्ष सभी कुश्तियां पारंपरिक मिट्टी के अखाड़े में आयोजित की जाएंगी।
6 सितंबर को 1100 रुपये से लेकर 11 हजार रुपये तक की कुश्तियां होंगी।
7 सितंबर को 5100, 11 हजार और 21 हजार रुपये की कुश्तियां आयोजित की जाएंगी।
वहीं 8 सितंबर को 21 हजार, 51 हजार रुपये और सबसे बड़ी द्रोण बुर्ज कुश्ती 1.51 लाख रुपये की होगी, जिसमें नामी पहलवान हिस्सा लेंगे।
दंगल का आयोजन पहलवान एवं रेफरी मनोज त्यागी तथा उनके साथियों के सानिध्य में होगा। समिति के प्रबंधक रजनीकांत अग्रवाल ने बताया कि सभी कुश्तियों का निर्णय पारंपरिक तरीके से चित्र-पाठ के आधार पर किया जाएगा।
मंच पर होंगे रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम
मेले के दौरान श्री द्रोण नाट्य मंडल मंच पर 4 सितंबर को श्री कृष्ण जन्मोत्सव की प्रस्तुति होगी। इसके बाद 5 से 15 सितंबर तक रागिनी महोत्सव, कवि सम्मेलन, स्थानीय कलाकारों द्वारा नाटक, स्कूलों के छात्र-छात्राओं के सांस्कृतिक कार्यक्रम, पंजाबी एवं राजस्थानी नृत्य प्रस्तुतियां और विभिन्न मनोरंजक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
मेले में ‘सीता स्वयंवर’, ‘वीर हकीकत राय’ और ‘वीर अभिमन्यु’ जैसे नाटकों का भी मंचन होगा। इसके अलावा सूफी सिंगर इकबाल की प्रस्तुति, स्पेशल इफेक्ट मैजिशियन, टैलेंट शो और सांस्कृतिक नृत्य कार्यक्रम मेले के प्रमुख आकर्षण रहेंगे।
एकलव्य की तपोभूमि से जुड़ा है इतिहास
मान्यता के अनुसार इसी क्षेत्र में गुरु द्रोणाचार्य ने पांडवों को शिक्षा-दीक्षा दी थी। दनकौर क्षेत्र के जंगलों में भील युवराज एकलव्य ने गुरु द्रोणाचार्य की प्रतिमा को गुरु मानकर धनुर्विद्या का अभ्यास किया था। एकलव्य द्वारा कुत्ते के मुंह को तीरों से भर देने की घटना और गुरु दक्षिणा में अपना अंगूठा अर्पित करने की कथा आज भी इस क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान से जुड़ी हुई है।
मेले के आयोजन को लेकर क्षेत्रवासियों में खासा उत्साह है और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं व दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है।




