भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक पुनर्संवाद का शुभारंभ: गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में द्वितीय वार्षिक अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सम्मेलन-2026 का उद्घाटन
भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक पुनर्संवाद का शुभारंभ: गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में द्वितीय वार्षिक अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सम्मेलन-2026 का उद्घाटन

ग्रेटर नोएडा । गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू), ग्रेटर नोएडा एवं आईकेएस हेरिटेज एसोसिएशन (इक्शा) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित द्वितीय वार्षिक अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सम्मेलन-2026 का भव्य शुभारंभ शुक्रवार को गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय परिसर में हुआ। 24 से 26 जुलाई 2026 तक आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन की थीम “आईकेएस: री-वीविंग द थ्रेड्स ऑफ नॉलेज ” रखी गई है। सम्मेलन का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा की विविध बौद्धिक धाराओं को समकालीन संदर्भों में पुनर्संगठित करते हुए वैश्विक अकादमिक विमर्श को नई दिशा प्रदान करना है। उद्घाटन में प्रो सम्पादानन्द मिश्रा ( सेक्रेटरी जनरल इक्शा) ने स्वागत संबोधन प्रसतुत किया और सभी कुलगुरु का स्वागत किया| समारोह में कुलगुरु तौर पर , प्रो राणा प्रताप सिंह ( कुलपति जीबीयू ), प्रो श्रीनिवास वरखेड़ी (केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय) , प्रो शांतिश्री डी पंडित ( कुलपति जेएनयू ), प्रो नीरजा गुप्त ( कुलपति गुजरात यूनिवर्सिटी ) शामिल रहे जिन्होंने ने आईकेएस से जुड़े विभिन विषयों पर आपने विचार प्रकट किए | इस समारोह में देश-विदेश से आए शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, विद्वानों एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के विशेषज्ञों ने सहभागिता की। सम्मेलन के प्रारंभ में आयोजकों ने बताया कि इस वर्ष सम्मेलन को देश एवं विदेश से 385 शोध-सार प्राप्त हुए। कठोर समीक्षा प्रक्रिया के बाद 218 शोध-सार स्वीकार किए गए, 131 शोध-सार अस्वीकृत किए गए, जबकि 36 शोध-सार समीक्षकों की टिप्पणियों के आधार पर आवश्यक संशोधनों के उपरांत स्वीकार किए गए। लगभग ढाई माह की विस्तृत समीक्षा प्रक्रिया के बाद 147 पूर्ण शोध-पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से गुणवत्ता एवं मौलिकता के आधार पर लगभग 75 शोध-पत्रों का प्रस्तुतीकरण हेतु चयन किया गया। इस पूरी अकादमिक समीक्षा प्रक्रिया में देशभर के लगभग 150 विशेषज्ञ समीक्षकों एवं विद्वानों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सम्मेलन के तकनीकी सत्रों के लिए शोध-पत्रों को 13 विषयगत श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इन विषयों पर चर्चा के लिए 16 से 17 समानांतर तकनीकी सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनकी अध्यक्षता विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के वरिष्ठ शिक्षाविद एवं विषय विशेषज्ञ कर रहे हैं।
सम्मेलन के तीन प्रमुख प्लेनरी सत्र भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्वपूर्ण आयामों को समर्पित हैं। प्रथम प्लेनरी सत्र में नालंदा महाविहार की विश्वविख्यात शैक्षणिक परंपरा, उसके वैश्विक प्रभाव तथा तिब्बती बौद्ध परंपरा द्वारा उसकी शिक्षण पद्धति के संरक्षण पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। द्वितीय प्लेनरी सत्र भारतीय दार्शनिक परंपराओं की विविधता, उनके मूल दार्शनिक आधार एवं भारतीय सांस्कृतिक एकात्मता की अवधारणा का विश्लेषण करेगा। तृतीय प्लेनरी सत्र आधुनिक डिजिटल तकनीकों की सहायता से भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, डिजिटलीकरण एवं वैश्विक प्रसार की संभावनाओं पर केंद्रित रहेगा।
इस अवसर पर गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि, “‘आईकेएस: री-वीविंग द थ्रेड्स ऑफ नॉलेज’ केवल एक सम्मेलन की थीम नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान परंपरा को वर्तमान और भविष्य से जोड़ने का एक वैश्विक अभियान है। भारतीय ज्ञान प्रणाली मानवता के समग्र कल्याण, वैज्ञानिक चिंतन, पर्यावरणीय संतुलन और सतत विकास की आधारशिला रही है। आज आवश्यकता है कि हम इस ज्ञान को आधुनिक अनुसंधान, आयुर्वेद , नवाचार और तकनीक के साथ जोड़कर विश्व के समक्ष प्रस्तुत करें। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय इसी दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है और भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक अकादमिक विमर्श के केंद्र में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमें गर्व है कि विश्वविद्यालय शीघ्र ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की ‘मिशन शक्तिसैट’ परियोजना की मेजबानी भी करेगा, जो विज्ञान, नवाचार और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भारत की नई उपलब्धियों का प्रतीक बनेगी।”उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन भारतीय ज्ञान परंपरा को पश्चिमी ज्ञान परंपराओं के प्रतिरोध के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक ज्ञान समुदाय के साथ सार्थक संवाद स्थापित करने के मंच के रूप में देखता है। सम्मेलन भारतीय दर्शन, विज्ञान, समाज, संस्कृति एवं नीति निर्माण से जुड़े विविध ज्ञान-स्रोतों को एक साझा बौद्धिक मंच पर लाकर भविष्य के अनुसंधान एवं नवाचार की नई दिशाएँ निर्धारित करेगा।
आईकेएस हेरिटेज एसोसिएशन (इक्शा) के सम्मेलन संयोजक प्रो. अश्विनी बी. देसाई ने सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि “भारतीय ज्ञान परंपरा को किसी अन्य ज्ञान प्रणाली के प्रतिरोध के रूप में प्रस्तुत करना हमारा उद्देश्य नहीं है। ‘आईकेएस: री-वीविंग द थ्रेड्स ऑफ नॉलेज’ का आशय भारतीय ज्ञान की विविध बौद्धिक परंपराओं को पुनः एक सूत्र में पिरोते हुए उन्हें समकालीन वैश्विक संदर्भों से जोड़ना है। सम्मेलन के प्लेनरी सत्रों, तकनीकी सत्रों और विषयगत पैनलों के माध्यम से भारतीय दर्शन, शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज, नीति निर्माण, सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान संरक्षण के विविध आयामों पर सार्थक एवं भविष्य उन्मुख विमर्श होगा। हमें विश्वास है कि यह सम्मेलन भारतीय ज्ञान परंपरा के समकालीन स्वरूप को समझने और उसे वैश्विक बौद्धिक संवाद का अभिन्न हिस्सा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।”सम्मेलन के आयोजकों ने बताया कि तीन दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश के विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों एवं विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयामों पर अपने शोध प्रस्तुत करेंगे। सम्मेलन के दौरान होने वाले विचार-विमर्श, शोध-पत्रों एवं निष्कर्षों के माध्यम से भारतीय ज्ञान प्रणाली के समकालीन महत्व, वैश्विक प्रासंगिकता तथा भविष्य की संभावनाओं को नई दिशा मिलने की अपेक्षा है।




