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नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में शोध नैतिकता पर राष्ट्रीय सेमिनार | 78 संस्थानों के 303 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा, ओपन एक्सेस और गुणवत्तापूर्ण शोध प्रकाशन पर हुई चर्चा

नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में शोध नैतिकता पर राष्ट्रीय सेमिनार

78 संस्थानों के 303 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा, ओपन एक्सेस और गुणवत्तापूर्ण शोध प्रकाशन पर हुई चर्चा

ग्रेटर नोएडा। नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (एनआईयू) में बुधवार को ओपन एक्सेस और शोध नैतिकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। एडवांसिंग ओपन एक्सेस अवेयरनेस एंड एथिकल पब्लिशिंग फॉर रिसर्च विजिबिलिटी विषय पर आयोजित इस सेमिनार में देश-विदेश के 78 संस्थानों से 303 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें 75 प्रतिभागियों ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रत्यक्ष रूप से, जबकि 228 ने ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता की।विश्वविद्यालय के ऑफिस ऑफ डीन-रिसर्च एंड इनोवेशन (ओडीआरआई) की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम को डायरेक्टरी ऑफ ओपन एक्सेस जर्नल्स (डीओएजे) का सहयोग प्राप्त हुआ। इसमें शिक्षक, वैज्ञानिक, शोधार्थी, स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थी और अकादमिक प्रशासन से जुड़े पेशेवर शामिल हुए।विश्वविद्यालय के चेयरमैन डॉ. देवेश कुमार सिंह, चांसलर प्रो. (डॉ.) विक्रम सिंह, वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) उमा भारद्वाज और डीन-रिसर्च एंड इनोवेशन प्रो. (डॉ.) बी. राजनारायण प्रुष्टी के मार्गदर्शन एवं सहयोग से सेमिनार आयोजित किया गया।

शोध की वैश्विक दृश्यता और नैतिक प्रकाशन पर मंथन

सेमिनार का उद्देश्य शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को ओपन एक्सेस प्रकाशन, शोध की वैश्विक दृश्यता, विश्वसनीय अकादमिक जर्नल की पहचान, शोध नैतिकता, ओपन साइंस और शोध की पुनरुत्पादकता के प्रति जागरूक करना था।

विशेषज्ञ वक्ताओं के रूप में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी, नई दिल्ली के डॉ. तनमय मजूमदार, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की प्रो. (डॉ.) मंजू खारी, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय की डॉ. तन्वी वत्स, आईआईटी रुड़की के डॉ. ऋषिकेश पांडेय और नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के डीन-रिसर्च एंड इनोवेशन प्रो. (डॉ.) बी. राजनारायण प्रुष्टी ने अपने विचार साझा किए।विशेषज्ञ सत्रों में ओपन एक्सेस प्रकाशन के माध्यम से शोध की वैश्विक पहुंच बढ़ाने, ओपन एक्सेस जर्नल के गुणवत्ता मानकों, शोध नैतिकता, प्रकाशन में ईमानदारी और ओपन साइंस जैसे विषयों पर चर्चा हुई। इसके अलावा शोध की पुनरुत्पादकता और शोध के प्रभाव को अधिकतम करने की रणनीतियों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए नैतिक मानकों का पालन जरूरी

कार्यक्रम के संयोजक एवं नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अमरेश मिश्रा ने आयोजन और प्रतिभागियों की सहभागिता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध केवल शोधपत्र प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है। विश्वसनीय प्रकाशन माध्यमों का चयन, नैतिक मानकों का पालन और ज्ञान को व्यापक समुदाय तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।सेमिनार का समापन विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ हुआ। कार्यक्रम ने शोधकर्ताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों को जिम्मेदार प्रकाशन, ओपन एक्सेस और शोध की विश्वसनीयता को बढ़ावा देने के लिए संवाद एवं सहयोग का साझा मंच प्रदान किया।

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