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मां दुर्गा के स्वागत में सजेगा ग्रेटर नोएडा कालीबाड़ी, 15 से शुरू होगा शारदोत्सव

मां दुर्गा के स्वागत में सजेगा ग्रेटर नोएडा कालीबाड़ी, 15 से शुरू होगा शारदोत्सव

बंगाल की कला, संस्कृति और परंपराओं का दिखेगा संगम, अल्पना, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक कार्यक्रम रहेंगे आकर्षण का केंद्र

ग्रेटर नोएडा। मां दुर्गा के स्वागत और दुर्गा पूजा के उल्लास के बीच ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पाई स्थित कालीबाड़ी में शारदोत्सव 2026 की तैयारियां शुरू हो गई हैं। ग्रेटर नोएडा शारदीय सांस्कृतिक समिति की ओर से 15 से 21 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस सात दिवसीय उत्सव में धार्मिक आस्था के साथ बंगाल की समृद्ध कला, संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी। पारंपरिक अल्पना, हस्तशिल्प, मां दुर्गा की आकर्षक प्रतिमा और संगीत-नृत्य की प्रस्तुतियां उत्सव के प्रमुख आकर्षण होंगे।शुक्रवार को कालीबाड़ी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में समिति के अध्यक्ष पद्मनाभ लाहिड़ी ने बताया कि बंगाली समाज के लिए दुर्गा पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भावनाओं, पारिवारिक परंपराओं, कला, संगीत और सामाजिक एकजुटता का महापर्व है। ‘मां आ रही हैं’ का भाव पूरे समाज में विशेष उत्साह का संचार करता है। शारदोत्सव के माध्यम से बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

मां दुर्गा के श्रृंगार में दिखेगी कारीगरों की कलाकारी

समिति अध्यक्ष ने बताया कि दुर्गा पूजा में मां की प्रतिमा और उनके श्रृंगार का विशेष महत्व होता है। कोलकाता के कुम्हारटोली के मूर्तिकार पीढ़ियों से मिट्टी से मां दुर्गा और उनके परिवार की प्रतिमाएं तैयार करते आ रहे हैं। प्रतिमा निर्माण से लेकर पोशाक, मुकुट और आभूषणों की सजावट तक कारीगरों की बारीक कलाकारी देखने को मिलती है। बनारसी और रेशमी कपड़ों के साथ जरी, जरदोजी, गोटा-पट्टी और मोतियों से मां का श्रृंगार किया जाता है। लाल, सफेद और सुनहरे रंगों से सजा मां का स्वरूप शक्ति, पवित्रता और दिव्यता का प्रतीक माना जाता है।

सड़क पर बनाई जाएगी विशाल पारंपरिक अल्पना

शारदोत्सव के दौरान कालीबाड़ी की ओर आने वाली सड़क पर विशाल पारंपरिक अल्पना बनाई जाएगी। बंगाल की लोककला से जुड़ी इस परंपरा में कमल, धान की बालियों, कलात्मक बेल-बूटों और ज्यामितीय आकृतियों के माध्यम से आकर्षक डिजाइन तैयार किए जाते हैं। इस सामूहिक आयोजन में महिलाएं, बच्चे और युवा उत्साहपूर्वक भाग लेंगे।

आनंदमेला और सांस्कृतिक कार्यक्रम बढ़ाएंगे उत्सव की रौनक

सात दिवसीय शारदोत्सव में आनंदमेला के साथ चित्रकला, आवृत्ति, फैंसी ड्रेस, प्रश्नोत्तरी, अंताक्षरी, म्यूजिकल चेयर, समूहगान, समूह नृत्य, ऑर्केस्ट्रा, नाटक और भक्ति संगीत सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों, युवाओं और वयस्कों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। पूजा के दौरान पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान, पुष्पांजलि और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी।

समिति की ओर से 11 अक्टूबर को सुबह छह बजे मां के आगमन के अवसर पर स्वागत कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। श्रद्धालुओं से शंखध्वनि और उलूध्वनि के साथ मां का स्वागत करने की अपील की गई है। इस दिन अल्पना, चित्रकला और आवृत्ति से जुड़े कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं।

21 अक्टूबर को होगा समापन

पद्मनाभ लाहिड़ी ने ग्रेटर नोएडा सहित दिल्ली-एनसीआर के निवासियों और श्रद्धालुओं से शारदोत्सव में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह उत्सव धार्मिक आस्था के साथ बंगाली समाज की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत रखने और लोगों को एक मंच पर जोड़ने का माध्यम है। मूर्तिकारों, कारीगरों, कलाकारों और ढाक वादकों की भागीदारी उत्सव को विशेष बनाती है। सात दिवसीय शारदोत्सव का समापन 21 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ होगा।प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपाध्यक्ष सुचित्रिता दास चटर्जी, महासचिव निहार रंजन बिस्वास, संयुक्त महासचिव रघुपति घोष, कोषाध्यक्ष सौमेन रॉय चौधरी, सहायक कोषाध्यक्ष अजय कुमार दत्ता, आयोजन सचिव हिमाचल नाग, सांस्कृतिक सचिव प्रो. (डॉ.) कथिका चट्टोपाध्याय, भोग सचिव राकेश घोष और पूजा सचिव अर्णब चौधरी उपस्थित रहे। इसके अलावा कार्यकारिणी सदस्य सम्मिता दाम चटर्जी, सुभ्रजीत मित्रा, अमिताभ चक्रवर्ती, मृणाल कांति दास, विजय मंडल और राज मंडल भी मौजूद रहे।

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