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किराने की दुकान वाले परिवार से परीक्षा-सुरक्षा उद्यम तक पहुंचे आशीष मित्तल परीक्षा में गड़बड़ी की समस्या को खुद महसूस किया, तकनीक के जरिए समाधान खोजने का लिया संकल्प

किराने की दुकान वाले परिवार से परीक्षा-सुरक्षा उद्यम तक पहुंचे आशीष मित्तल

 

परीक्षा में गड़बड़ी की समस्या को खुद महसूस किया, तकनीक के जरिए समाधान खोजने का लिया संकल्प

ग्रेटर नोएडा। इनोवेटिवव्यू के संस्थापक एवं निदेशक आशीष मित्तल ने अपने कारोबारी सफर और परीक्षा सुरक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को साझा करते हुए बताया कि एग्जाम सिक्योरिटी में उनका प्रवेश किसी पूर्व योजना का हिस्सा नहीं था। एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले आशीष मित्तल के पिता किराने की दुकान चलाते थे। दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से बीई की पढ़ाई के दौरान उन्हें परीक्षा प्रणाली से जुड़ी कई ऐसी समस्याओं का अनुभव हुआ, जिसने आगे चलकर उनके उद्यम की नींव रखी।

आशीष मित्तल ने बताया कि कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वह और उनके सह-संस्थापक अंकित खुद प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य परीक्षाओं की प्रक्रिया से गुजर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने देखा कि कई मेहनती विद्यार्थियों को दूसरे उम्मीदवारों द्वारा की जाने वाली नकल और अन्य गड़बड़ियों के कारण नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी अनुभव ने दोनों को यह सोचने के लिए प्रेरित किया कि जब वे इंजीनियरिंग और तकनीक के विद्यार्थी हैं तो इस समस्या के समाधान के लिए तकनीक का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि परीक्षा केवल एक परीक्षा नहीं होती। लाखों युवाओं के लिए परीक्षा उनके शिक्षा, रोजगार और भविष्य के अवसरों से जुड़ी होती है। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी सोच के साथ इनोवेटिवव्यू की शुरुआत हुई और समय के साथ यह परीक्षा सुरक्षा के लिए तकनीक, प्रक्रियाओं और निरंतर नवाचार पर केंद्रित उद्यम के रूप में विकसित हुआ।

फिजिकल सिक्योरिटी से मल्टी-लेयर्ड टेक्नोलॉजी तक

आशीष मित्तल के अनुसार, भारत में परीक्षा सुरक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा के साथ परीक्षा में गड़बड़ी के तरीके भी अधिक जटिल हुए हैं। ऐसे में केवल परीक्षा केंद्र पर उम्मीदवारों की सामान्य जांच पर्याप्त नहीं रह गई है। परीक्षा सुरक्षा अब पंजीकरण और पहचान सत्यापन से शुरू होकर परीक्षा केंद्र, निगरानी, लॉजिस्टिक्स और परीक्षा के दौरान तत्काल प्रतिक्रिया तक फैली हुई है।

उन्होंने बताया कि आधुनिक परीक्षा केंद्रों में एचएचएमडी और डीएफएमडी, बायोमेट्रिक सत्यापन, एआई आधारित सीसीटीवी, जीपीएस ट्रैकिंग, कमांड सेंटर और रियल-टाइम कम्युनिकेशन सिस्टम जैसी कई तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। फेस और फिंगरप्रिंट के अलावा आइरिस तथा पाम-वेन रिकग्निशन जैसी तकनीकें भी पहचान सत्यापन की अतिरिक्त परत उपलब्ध करा सकती हैं।

एआई से संदिग्ध गतिविधियों पर रियल-टाइम नजर

आशीष मित्तल ने बताया कि परीक्षा निगरानी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका भी बढ़ रही है। एआई आधारित सीसीटीवी सिस्टम निर्धारित संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर रियल-टाइम में अलर्ट कमांड सेंटर तक पहुंचा सकता है। इससे परीक्षा अधिकारियों को किसी संभावित समस्या पर जल्द प्रतिक्रिया देने में मदद मिलती है।

उन्होंने कहा कि तकनीक मानव निर्णय की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि परीक्षा अधिकारियों को बेहतर जानकारी, अधिक निगरानी और तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता उपलब्ध कराने के लिए है। उनका मानना है कि परीक्षा का परिणाम उम्मीदवार की मेहनत और योग्यता के आधार पर तय होना चाहिए।

परीक्षा सुरक्षा केवल तकनीक नहीं, जिम्मेदारी भी

आशीष मित्तल ने कहा कि परीक्षा सुरक्षा के क्षेत्र में केवल तकनीक विकसित करना पर्याप्त नहीं है। यहां लाखों युवाओं के करियर और भविष्य से जुड़ी जिम्मेदारी होती है, इसलिए प्रत्येक स्तर पर विश्वसनीयता और जवाबदेही जरूरी है।

उन्होंने कहा कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं और सुरक्षा से जुड़े संगठनों को केवल तकनीकी उत्पाद उपलब्ध कराने के बजाय पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी और जवाबदेही को समझना चाहिए। बड़े पैमाने पर परीक्षा आयोजित करने के लिए तकनीक के साथ-साथ मजबूत प्रक्रियाएं, प्रशिक्षित लोग, विश्वसनीय लॉजिस्टिक्स और लगातार निगरानी भी आवश्यक है।

2028 तक 2 लाख सीबीटी सीटों का लक्ष्य

भविष्य की योजनाओं के बारे में आशीष मित्तल ने बताया कि उनका विजन ऐसे विशेष परीक्षा केंद्र तैयार करना है, जिन्हें शुरुआत से ही परीक्षा की जरूरतों और सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया जाए। उन्होंने बताया कि इनोवेटिवव्यू द्वारा देशभर में 30 हजार से अधिक कंप्यूटर आधारित परीक्षा सीटें तैयार की जा चुकी हैं और 2028 के अंत तक इस क्षमता को 2 लाख सीटों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

उनके अनुसार, भविष्य का परीक्षा इकोसिस्टम ऐसा होना चाहिए जिसमें पंजीकरण और पहचान सत्यापन से लेकर परीक्षा केंद्र, बायोमेट्रिक्स, निगरानी, लॉजिस्टिक्स, कमांड सेंटर और तत्काल प्रतिक्रिया तक सुरक्षा की व्यवस्था एकीकृत रूप से काम करे। इसका उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है जहां प्रत्येक वास्तविक उम्मीदवार को निष्पक्ष अवसर मिले और परीक्षा की विश्वसनीयता बनी रहे।

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