राम-ईश इंटरनेशनल स्कूल में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और AI पर जिला स्तरीय कार्यशाला
राम-ईश इंटरनेशनल स्कूल में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और AI पर जिला स्तरीय कार्यशाला

ग्रेटर नोएडा। शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी नवाचार और विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से राम-ईश इंटरनेशनल स्कूल, ग्रेटर नोएडा में 29 अगस्त को जिला स्तरीय विचार-विमर्श एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग विकसित करने के साथ-साथ उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित भविष्य के लिए तैयार करना रहा।कार्यक्रम में ग्रेटर नोएडा के 16 प्रतिष्ठित विद्यालयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान छह टीमों ने विभिन्न प्रोजेक्ट, गतिविधियों और तकनीकी टूल्स के माध्यम से यह प्रदर्शित किया कि कक्षा शिक्षण में कोडिंग, तार्किक चिंतन, समस्या समाधान और एल्गोरिदम आधारित सोच को खेल एवं प्रोजेक्ट आधारित गतिविधियों के जरिए किस प्रकार प्रभावी ढंग से विकसित किया जा सकता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ राम-ईश इंटरनेशनल स्कूल की प्रधानाचार्या शिखा सिंह के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में तकनीक शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है और विद्यार्थियों को बदलती तकनीकी दुनिया के अनुरूप तैयार करना समय की आवश्यकता है।कार्यशाला में मॉडल स्कूल, नोएडा के प्रधानाचार्य नीरज अवस्थी, एस.डी.आर.वी. कॉन्वेंट स्कूल की प्रधानाचार्या गार्गी घोष कंसबनिक तथा गल्गोटियास विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. विश्वदीप सिंह बघेला ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे। वक्ताओं ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के संदर्भ में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और AI शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि तार्किक सोच, रचनात्मकता और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना भी जरूरी है।राम-ईश इंटरनेशनल स्कूल की नेहा सेठ और नेहा तिवारी ने विद्यालय में AI लैब और कोडिंग क्लब शुरू करने के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि तकनीक आधारित गतिविधियों को नियमित शिक्षण का हिस्सा बनाकर विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता और रुचि को किस प्रकार बढ़ाया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच संवाद भी हुआ, जिसमें AI, कोडिंग और भविष्य की शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। अंत में प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति जताई कि ऐसे जिला स्तरीय आयोजन नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि शिक्षक और विद्यार्थी दोनों तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया और AI-संचालित भविष्य के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो सकें।




