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एआई के साथ बदल रही शिक्षा की परिभाषा: इनोवेटिव ग्रुप ऑफ कॉलेजेज ने दिखाई भविष्य की राह

एआई के साथ बदल रही शिक्षा की परिभाषा: इनोवेटिव ग्रुप ऑफ कॉलेजेज ने दिखाई भविष्य की राह

देशभर के विशेषज्ञों ने शिक्षण, अधिगम एवं अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावी उपयोग पर साझा किए विचार

ग्रेटर नोएडा।कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) आज शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन का माध्यम बन रही है। इसी परिवर्तनकारी दौर में इनोवेटिव ग्रुप ऑफ कॉलेजेज, ग्रेटर नोएडा द्वारा “शिक्षण, अधिगम एवं अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एकीकरण”विषय पर एक सप्ताह का राष्ट्रीय स्तर का संकाय विकास कार्यक्रम (Faculty Development Program – FDP) सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। 22 मई से 30 मई 2026 तक आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के शिक्षकों, शोधार्थियों एवं शिक्षाविदों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता की नवीनतम तकनीकों, डिजिटल शिक्षण उपकरणों एवं शोध कार्यों में एआई के प्रभावी उपयोग से परिचित कराना था, जिससे वे विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण, तकनीक-संपन्न एवं नवाचार आधारित शिक्षा प्रदान कर सकें।इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञ वक्ताओं ने अपने विचार एवं अनुभव साझा किए। प्रमुख वक्ताओं में सतीश कुमार शर्मा (AAO, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार), डॉ. अंकित अवस्थी (हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़), डॉ. रोजालीना दास (लिंगायस विद्यापीठ, हरियाणा), डॉ. धर्मेंद्र कुमार (गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय, बिहार), डॉ. अंकुश बलाराम पवार (VIMEET, महाराष्ट्र), डॉ. महेश एम. गोयानी (गुजरात), डॉ. नितीश कौशिक (बनस्थली विद्यापीठ, राजस्थान) तथा डॉ. धर्मेन्द्र कुमार दुबे (SDJ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, सूरत)शामिल रहे।

विशेषज्ञों ने एआई आधारित शिक्षण पद्धतियों, शोध लेखन, डेटा विश्लेषण, मशीन लर्निंग, शैक्षणिक उत्पादकता बढ़ाने वाले आधुनिक उपकरणों तथा उच्च शिक्षा में उभरती तकनीकों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को विभिन्न एआई टूल्स एवं प्लेटफॉर्म्स के व्यावहारिक उपयोग का प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया, जिससे वे अपने शिक्षण एवं शोध कार्यों को अधिक प्रभावी, रचनात्मक एवं परिणामोन्मुख बना सकें।

अपने संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि शिक्षा जगत में एक नई क्रांति का आधार है। इसके माध्यम से शिक्षण को अधिक व्यक्तिगत, शोध को अधिक सटीक तथा ज्ञान के प्रसार को अधिक व्यापक बनाया जा सकता है। एआई का प्रभावी उपयोग शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक सिद्ध होगा।

इस अवसर पर इनोवेटिव ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के चेयरमैन डॉ. के. आर. शर्मा ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का समावेश समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संस्थान का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को भविष्य की तकनीकों से जोड़ते हुए उन्हें वैश्विक अवसरों के लिए तैयार करना है। उन्होंने इस प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रमों को ज्ञान, नवाचार और उत्कृष्टता का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। तितिक्षा शर्मा ने अपने संदेश में कहा कि एआई आधारित शिक्षा विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता को नई दिशा प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों को अपनाकर ही शिक्षा संस्थान आने वाले समय की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकते हैं। उषा शर्मा ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ तकनीकी दक्षता आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। शिक्षकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों से परिचित कराना शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

देवाशीष गौर ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप तकनीकी नवाचारों को शिक्षा प्रणाली का अभिन्न अंग बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इनोवेटिव ग्रुप ऑफ कॉलेजेज भविष्य उन्मुख शिक्षा प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है और विद्यार्थियों को उद्योग एवं समाज की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार कर रहा है।

कार्यक्रम के सफल समापन पर प्रतिभागियों ने इसे अत्यंत उपयोगी, ज्ञानवर्धक एवं समय की आवश्यकता के अनुरूप बताया। शिक्षकों ने माना कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम उन्हें नवीनतम तकनीकों के साथ अद्यतन रखते हैं तथा शिक्षण और अनुसंधान को अधिक प्रभावशाली बनाने में सहायता प्रदान करते हैं।कार्यक्रम के सफल आयोजन पर चेयरमैन डॉ. के. आर. शर्मा, तितिक्षा शर्मा, उषा शर्मा एवं देवाशीष गौर ने आयोजन समिति, विशेषज्ञ वक्ताओं एवं प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार की पहलें भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने और वैश्विक मानकों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।

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