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जीआईएमएस ग्रेटर नोएडा ने नैतिक स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु नीडोनॉमिक्स फाउंडेशन के साथ समझौता ज्ञापन पर किए हस्ताक्षर 

जीआईएमएस ग्रेटर नोएडा ने नैतिक स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु नीडोनॉमिक्स फाउंडेशन के साथ समझौता ज्ञापन पर किए हस्ताक्षर 

ग्रेटर नोएडा।समकालीन चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान में नैतिक और सभ्यतागत भारतीय मूल्यों के समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए, गवर्नमेंट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (जीआईएमएस), ग्रेटर नोएडा ने प्रो. एम.एम. गोयल नीडोनॉमिक्स फाउंडेशन के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।इस सहयोग का उद्देश्य प्रो. मदन मोहन गोयल द्वारा प्रतिपादित नीडोनॉमिक्स को अंधाधुंध ग्रीडोनॉमिक्स के नैतिक विकल्प के रूप में स्थापित करना है, जिससे स्वास्थ्य शिक्षा, शासन और संस्थागत विकास के केंद्र में आवश्यकता-आधारित सोच, नैतिक उत्तरदायित्व और सततता को रखा जा सके।यह एमओयू डॉ. (ब्रिगेडियर) राकेश गुप्ता, निदेशक, जीआईएमएस द्वारा हस्ताक्षरित किया गया। उन्होंने इस साझेदारी को एक रणनीतिक ज्ञान-आधारित गठबंधन बताते हुए कहा कि यह संस्थान की शैक्षणिक, अनुसंधान एवं संगठनात्मक गतिविधियों को समृद्ध करेगा। इस अवसर पर प्रो. एम.एम. गोयल को “जीआईएमएस का मित्र ” के रूप में नामित किया गया, जो उनके बौद्धिक योगदान और मूल्य-आधारित दृष्टि की औपचारिक मान्यता है।सहयोग पर विश्वास व्यक्त करते हुए प्रो. एम.एम. गोयल ने कहा कि यह साझेदारी जीआईएमएस की विशिष्ट पहचान (यूएसपी) के रूप में उभरेगी और आज की स्वास्थ्य शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में आवश्यक सचेत, नैतिक और आवश्यकता-आधारित दृष्टिकोण को सुदृढ़ करेगी।एमओयू के अंतर्गत, जीआईएमएस में अनुसंधान, शैक्षणिक गतिविधियों और पाठ्यक्रम विकास में नीडोनॉमिक्स को एकीकृत किया जाएगा। इसके साथ-साथ क्षमता निर्माण कार्यक्रम, कार्यशालाएँ और वेबिनार आयोजित किए जाएंगे, जिनका केंद्रबिंदु स्वास्थ्य सेवा में नैतिक निर्णय-निर्माण होगा। यह समझौता ज्ञापन इस विश्वास को और सुदृढ़ करता है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में वास्तविक उत्कृष्टता केवल तकनीक और तकनीकी कौशल तक सीमित नहीं है, बल्कि नैतिकता, संवेदना और संयम को अपनाने में निहित है—जो नीडोनॉमिक्स की मूल भावना है।इस अवसर पर प्रो. गोयल ने अपनी नवीनतम पुस्तक “गीता-प्रेरित नीडोनॉमिक्स: सतत भविष्य के लिए एक व्यवहारिक समाधान” की प्रति डॉ. (ब्रिगेडियर) राकेश कुमार गुप्ता को भेंट की।

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