स्वर्गीय शिक्षाविद् डॉ. विकास सिंह की प्रथम जयंती पर डॉ. विकास सिंह मेमोरियल फाउंडेशन का हुआ शुभारंभ
स्वर्गीय शिक्षाविद् डॉ. विकास सिंह की प्रथम जयंती पर डॉ. विकास सिंह मेमोरियल फाउंडेशन का हुआ शुभारंभ
श्री दूधेश्वरनाथ मंदिर में सामुदायिक भंडारे का आयोजन एवं आरओ वाटर सुविधा की गई समर्पित

ग्रेटर नोएडा/गाजियाबाद।प्रख्यात शिक्षाविद् एवं शिक्षा क्षेत्र के अग्रणी व्यक्तित्व स्वर्गीय प्रो. (डॉ.) विकास सिंह की प्रथम जयंती के अवसर पर डॉ. विकास सिंह मेमोरियल फाउंडेशन का औपचारिक शुभारंभ किया गया। डॉ. सिंह का निधन 19 अक्टूबर 2025 को हुआ था। उनकी स्मृति में परिवार द्वारा एक विशाल सामुदायिक भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। यह आयोजन उनके जीवन, मूल्यों और समाज सेवा के प्रति समर्पण को श्रद्धांजलि स्वरूप आयोजित किया गया।फाउंडेशन की पहली जनसेवा पहल के रूप में परिवार द्वारा श्री दूधेश्वरनाथ मंदिर में एक आधुनिक वाटर कूलर एवं आरओ जल शुद्धिकरण प्रणाली समर्पित की गई, जिससे वर्षभर श्रद्धालुओं को स्वच्छ एवं शीतल पेयजल उपलब्ध हो सकेगा।डॉ. विकास सिंह देश के प्रतिष्ठित शिक्षा नेताओं में से एक थे और भारत के सबसे युवा कुलपतियों में शामिल रहे। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में 27 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ उन्होंने गीता विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति के रूप में कार्य किया तथा उन्हें भारत के शीर्ष 50 शिक्षाविदों और उच्च शिक्षा नेताओं में स्थान प्राप्त हुआ वे एक प्रतिष्ठित लेखक, TEDx वक्ता, मार्गदर्शक और शैक्षणिक संस्थानों के निर्माता थे। अपनी दूरदर्शी सोच और नेतृत्व क्षमता से उन्होंने हजारों विद्यार्थियों और शिक्षकों को प्रेरित किया। उनकी पुस्तक “Paper to Screen – The Future of Education” अमेज़न किंडल की बेस्टसेलर रही, जबकि शिक्षा में नवाचार के क्षेत्र में उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया।इस अवसर पर परिवार के सदस्यों ने बताया कि डॉ. विकास सिंह मेमोरियल फाउंडेशन की स्थापना उनके शिक्षा, नवाचार, समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के सपनों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है। फाउंडेशन विभिन्न शैक्षिक, सामाजिक, परोपकारी एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के माध्यम से डॉ. सिंह के आदर्शों और मूल्यों को समाज तक पहुंचाने का कार्य करेगा।कार्यक्रम का समापन प्रार्थना, सामुदायिक सेवा और इस संकल्प के साथ हुआ कि एक दूरदर्शी शिक्षाविद् की विरासत को संरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों तक उनके प्रेरणादायक विचारों को पहुंचाया जाएगा।




