GautambudhnagarGreater noida news

आईटीएस डेंटल कॉलेज में ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया के आधुनिक उपचार पर कार्यशाला आयोजित

आईटीएस डेंटल कॉलेज में ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया के आधुनिक उपचार पर कार्यशाला आयोजित

विशेषज्ञों ने रोग के सटीक निदान, दर्द प्रबंधन और आधुनिक उपचार तकनीकों की दी जानकारी

ग्रेटर नोएडा। आईटीएस डेंटल कॉलेज, ग्रेटर नोएडा में 13 अक्टूबर 2026 को ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया के आधुनिक उपचार एवं प्रबंधन पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। ओरल मेडिसिन एंड रेडियोलॉजी विभाग और ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग की ओर से एसोसिएशन ऑफ ओरल मैक्सिलोफेशियल सर्जन्स ऑफ इंडिया के दिल्ली-एनसीआर स्टेट चैप्टर के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न दंत चिकित्सा महाविद्यालयों के चिकित्सकों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य चेहरे की नसों से संबंधित इस गंभीर दर्द की स्थिति के निदान, उपचार और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के बारे में जानकारी देना तथा प्रतिभागियों के व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ाना रहा।कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में फोर्टिस हॉस्पिटल, नोएडा के इमरजेंसी मेडिसिन एंड ट्रॉमा विभाग के निदेशक तथा हेड पेन एंड पैलिएटिव केयर डॉ. अनुराग अग्रवाल ने ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया के लक्षणों, निदान और उपचार के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस बीमारी में मरीज को चेहरे पर अत्यंत तीव्र और असहनीय दर्द का अनुभव हो सकता है। ऐसे में समय पर सटीक निदान और मरीज की स्थिति के अनुसार उचित उपचार का चयन बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि दंत चिकित्सकों और अन्य चिकित्सा विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय तथा आधुनिक उपचार पद्धतियों की जानकारी मरीजों को प्रभावी दर्द प्रबंधन और बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायक है।

संस्थान के प्रधानाचार्य डॉ. ओमकार के. शेट्टी ने कहा कि ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया जैसी जटिल स्थिति के प्रभावी प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक जानकारी, सटीक निदान और नवीनतम उपचार तकनीकों का ज्ञान आवश्यक है। इस तरह की कार्यशालाएं चिकित्सकों और विद्यार्थियों को चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे नए विकास से परिचित कराने के साथ उनके नैदानिक कौशल को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

ओरल मेडिसिन एंड रेडियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. सिद्धार्थ श्रीवास्तव ने कहा कि ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया का समय पर निदान प्रभावी उपचार की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है। वहीं, ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु भूटानी ने बताया कि इस बीमारी के प्रबंधन में आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ आवश्यकतानुसार शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

आईटीएस-द एजुकेशन ग्रुप के उपाध्यक्ष सोहिल चड्ढा ने कार्यशाला की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान विद्यार्थियों और चिकित्सकों को उन्नत ज्ञान एवं व्यावहारिक कौशल प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि मरीजों को सुरक्षित, प्रभावी और बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सके।

कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया के आधुनिक निदान एवं उपचार के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई और चिकित्सा विशेषज्ञों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिला।

Related Articles

Back to top button