फोर्टिस ग्रेटर नोएडा के डॉक्टरों ने बचाई 57 वर्षीय मरीज की जान, हाई-रिस्क एंजियोप्लास्टी से हार्ट की क्षमता 10 प्रतिशत से बढ़कर हुई 45 प्रतिशत
फोर्टिस ग्रेटर नोएडा के डॉक्टरों ने बचाई 57 वर्षीय मरीज की जान, हाई-रिस्क एंजियोप्लास्टी से हार्ट की क्षमता 10 प्रतिशत से बढ़कर हुई 45 प्रतिशत

ग्रेटर नोएडा। फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा के कार्डियोलॉजी विभाग ने एक बेहद गंभीर हृदय रोगी का सफलतापूर्वक इलाज कर उसे नया जीवन दिया। 57 वर्षीय मरीज, जिसकी हार्ट पंपिंग क्षमता (इजेक्शन फ्रैक्शन) केवल 10–15 प्रतिशत रह गई थी, हाई-रिस्क इमरजेंसी एंजियोप्लास्टी के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रहा है। उपचार के बाद मरीज की हार्ट पंपिंग क्षमता बढ़कर 45 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिसे विशेषज्ञों ने शानदार रिकवरी बताया है।अस्पताल के अनुसार मरीज पिछले 24 घंटे से सीने में भारीपन, सांस लेने में तकलीफ और गंभीर कार्डियोजेनिक शॉक की स्थिति से जूझ रहा था। उसे अनियंत्रित मधुमेह, उच्च रक्तचाप और फेफड़ों में पानी भरने जैसी गंभीर समस्याएं भी थीं। हालत लगातार बिगड़ने पर उसे तत्काल वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया और आपातकालीन दवाइयों के जरिए स्थिति को नियंत्रित किया गया।
जांच में सामने आया कि मरीज की हृदय की तीन प्रमुख धमनियां गंभीर रूप से अवरुद्ध थीं। हार्ट फेलियर और बेहद कम हार्ट फंक्शन के कारण सामान्य एंजियोप्लास्टी करना अत्यधिक जोखिम भरा था और मरीज को किसी भी समय कार्डियक अरेस्ट आ सकता था।
डॉ. शांतनु सिंघल, कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम ने सबसे पहले मरीज को इंट्रा-एऑर्टिक बैलून पंप (आईएबीपी ) यानी हार्ट-असिस्ट डिवाइस की मदद से स्थिर किया। इसके बाद आपातकालीन एंजियोग्राफी कर हाई-रिस्क एंजियोप्लास्टी की गई। महज 15 मिनट चली इस प्रक्रिया में मुख्य धमनी का अवरोध सफलतापूर्वक हटाया गया।उपचार के बाद मरीज ने तेजी से रिकवरी की। अगले ही दिन उसे वेंटिलेटर और हार्ट-असिस्ट पंप से हटा लिया गया। एक सप्ताह के भीतर हार्ट की पंपिंग क्षमता 10 प्रतिशत से बढ़कर 35 प्रतिशत हो गई और बाद में यह 45 प्रतिशत तक पहुंच गई। फिलहाल मरीज पूरी तरह स्वस्थ है, नियमित फॉलो-अप पर आ रहा है और जल्द ही कार्डियक रिहैबिलिटेशन पूरा कर अपने पेशेवर जीवन में भी वापसी करेगा।इस सफलता पर डॉ. शांतनु सिंघल ने कहा कि मरीज की स्थिति बेहद गंभीर थी। फेफड़ों में पानी भर चुका था और ब्लड प्रेशर 200/100 तक पहुंच गया था। ऐसे में पहले हार्ट-असिस्ट पंप के जरिए मरीज को स्थिर किया गया और फिर विशेष ‘लो-डाई’ तकनीक से अवरुद्ध धमनी को खोला गया। समय रहते किए गए इस उपचार से कार्डियक अरेस्ट का खतरा टल गया और मरीज का हार्ट फंक्शन उल्लेखनीय रूप से बेहतर हो गया।फोर्टिस नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. शानू शर्मा ने कहा कि यह सफलता अस्पताल की विशेषज्ञ टीम, आधुनिक तकनीक और समय पर किए गए उपचार का परिणाम है। गंभीर से गंभीर हृदय रोगियों के इलाज में उन्नत चिकित्सा सुविधाएं कई बार जीवन बचाने में निर्णायक साबित होती हैं।




