नासा विशेषज्ञ डॉ. अशोक प्रजापति ने 600 से अधिक इंजीनियरिंग छात्रों को किया प्रेरित
नासा विशेषज्ञ डॉ. अशोक प्रजापति ने 600 से अधिक इंजीनियरिंग छात्रों को किया प्रेरित

ग्रेटर नोएडा। नोएडा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (NIET), ग्रेटर नोएडा में 600 से अधिक इंजीनियरिंग छात्रों के लिए प्रेरणादायक एवं संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया। सत्र में नासा से जुड़े डॉ. अशोक प्रजापति ने छात्रों के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए “असफलता सफलता की ओर बढ़ाया गया एक कदम है” विषय पर विचार रखे।
डॉ. प्रजापति ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि असफलता को रुकावट नहीं, बल्कि सीखने और आगे बढ़ने का अवसर समझना चाहिए। उन्होंने इंजीनियरिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त प्रणालियों और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा किए।
उन्होंने अपने शुरुआती जीवन का एक प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि वह गांव से स्कूल तक प्रतिदिन करीब 12 किलोमीटर साइकिल चलाकर जाते थे। लंबी दूरी को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर पूरा करने की रणनीति ने उनकी सोच बदल दी। उन्होंने बताया कि यही तरीका आगे चलकर जटिल समस्याओं को छोटे और प्रबंधनीय कार्यों में बांटने की उनकी कार्यशैली का आधार बना, जिसे आज आधुनिक इंजीनियरिंग में एजाइल प्रैक्टिस के रूप में देखा जाता है।
डॉ. प्रजापति ने कहा कि सफल इंजीनियर वह नहीं होता जो कभी असफल न हो, बल्कि वह होता है जो असफलता से सीखकर अपनी रणनीति में बदलाव करे और लगातार आगे बढ़ता रहे। उन्होंने छात्रों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, क्लाउड कंप्यूटिंग, स्वायत्त प्रणालियों और उन्नत सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग जैसी उभरती तकनीकों के साथ लगातार अपने कौशल को विकसित करने की सलाह दी।
NIET के निदेशक डॉ. विनोद कापसे ने छात्रों को अनुभवी पेशेवरों और उद्योग विशेषज्ञों से सीखने के अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। वहीं, संस्थान के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी डॉ. इरफान अली ने तकनीकी नवाचार, व्यावहारिक शिक्षा और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकसित करने पर जोर दिया। सत्र के दौरान छात्रों ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, करियर, उच्च शिक्षा, नवाचार और उद्यमिता सहित विभिन्न विषयों पर डॉ. प्रजापति से संवाद किया। उन्होंने छात्रों को बताया कि पहली नौकरी, किसी परीक्षा में असफलता या किसी परियोजना की विफलता भविष्य तय नहीं करती, बल्कि सीखने और दोबारा प्रयास करने की क्षमता ही सफलता की दिशा निर्धारित करती है। कार्यक्रम का समापन प्रेरक संदेश के साथ हुआ कि “असफलता से डरने के बजाय प्रयास न करने से डरना चाहिए।” 600 से अधिक छात्रों की भागीदारी ने तकनीक और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में युवाओं की बढ़ती रुचि को भी प्रदर्शित किया।




