कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग संकट में, आईबीए गौतम बुद्ध नगर के अध्यक्ष अमित कुमार उपाध्याय ने की तत्काल हस्तक्षेप की मांग
कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग संकट में, आईबीए गौतम बुद्ध नगर के अध्यक्ष अमित कुमार उपाध्याय ने की तत्काल हस्तक्षेप की मांग

ग्रेटर नोएडा। इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन, गौतम बुद्ध नगर के अध्यक्ष अमित कुमार उपाध्याय ने कच्चे माल की लगातार बढ़ती कीमतों और कार्यशील पूंजी की कमी को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि जिले के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। विशेष रूप से गत्ते के डिब्बे, पैकेजिंग, प्लास्टिक, पॉलीबैग, फोम, इंजीनियरिंग और अन्य छोटे उद्योगों पर बढ़ती उत्पादन लागत का सीधा असर पड़ रहा है।उपाध्याय के अनुसार पिछले डेढ़ से दो माह में क्राफ्ट पेपर के दाम करीब 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। इसके अलावा पॉलिमर, प्लास्टिक दाना, इस्पात, तांबा और एल्युमिनियम सहित कई कच्चे माल की कीमतों में भी लगातार वृद्धि हो रही है। कई उत्पादों के दाम हर दो-तीन दिन में बढ़ने से उद्योगों के लिए उत्पादन लागत का अनुमान लगाना और ग्राहकों को स्थिर दर पर माल उपलब्ध कराना मुश्किल हो गया है।उन्होंने जिला प्रशासन और जिला उद्योग केंद्र से मांग की कि कच्चे माल की कीमतों में हो रही वृद्धि को लेकर निर्माताओं, वितरकों, उद्योग संगठनों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक बुलाई जाए। साथ ही यह भी जांच की जाए कि कीमतों में इतनी तेजी से वृद्धि के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं।
कर वापसी में देरी से बढ़ रही परेशानी
अमित कुमार उपाध्याय ने कहा कि इनपुट टैक्स क्रेडिट की राशि लंबे समय तक अटके रहने से छोटे उद्योगों की कार्यशील पूंजी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। उन्होंने बताया कि कई इकाइयां अधिक दर पर कच्चा माल खरीदती हैं, जबकि तैयार उत्पाद पर कम दर से वस्तु एवं सेवा कर लगता है। इसके कारण बड़ी राशि कर वापसी के रूप में अटक जाती है।उन्होंने कहा कि एक ओर कच्चे माल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और दूसरी ओर कर वापसी की राशि समय पर नहीं मिलने से उद्योगों पर दोहरी आर्थिक मार पड़ रही है। कई इकाइयां ग्राहकों को बनाए रखने के लिए कम लाभ या नुकसान में उत्पादन करने को मजबूर हैं।उपाध्याय ने उत्तर प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन और जिला उद्योग केंद्र से कर वापसी की प्रक्रिया सरल एवं समयबद्ध करने, लंबित मामलों के निस्तारण के लिए विशेष शिविर लगाने तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को राहत पैकेज, ब्याज सहायता और कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने की मांग की।
उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग लाखों परिवारों की आजीविका से जुड़े हैं। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयों के सामने बंद होने का संकट खड़ा हो सकता है, जिसका असर रोजगार और औद्योगिक विकास पर भी पड़ेगा। उन्होंने सरकार और प्रशासन से इस मामले में तत्काल ठोस कार्रवाई की मांग की।




