Bulandshahr

एटा से आगरा और फिर बुलंदशहर पहुंचा गंभीर नवजात, KGM C की NICU टीम ने बचाई जान

एटा से आगरा और फिर बुलंदशहर पहुंचा गंभीर नवजात, KGM C की NICU टीम ने बचाई जान

कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज में गंभीर रूप से बीमार नवजात का सफल उपचार, हालत में हुआ उल्लेखनीय सुधार

बुलंदशहर। कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज (केजीएमसी), बुलंदशहर की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) ने गंभीर रूप से बीमार एक नवजात का सफल उपचार कर चिकित्सा सेवा का प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। जन्म के तुरंत बाद गंभीर जटिलताओं से जूझ रहे इस नवजात को बेहतर उपचार की उम्मीद में एटा से आगरा और फिर बुलंदशहर लाया गया था। यहां चिकित्सकों की निगरानी, समर्पित उपचार और टीमवर्क से बच्चे की हालत में उल्लेखनीय सुधार हुआ, जिसके बाद उसे चिकित्सकीय रूप से स्थिर अवस्था में मां के साथ घर भेज दिया गया।

जन्म के बाद बिगड़ी थी नवजात की हालत

परिजनों के अनुसार, जन्म के तुरंत बाद बच्चा नहीं रोया और बाद में उसे दौरे पड़ने लगे। आगरा में शुरुआती उपचार के दौरान परिवार को कथित तौर पर बच्चे के बचने की संभावना बेहद कम होने की बात बताई गई। इसके बाद परिजन बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर नवजात को केजीएमसी बुलंदशहर लेकर पहुंचे।

मेडिकल कॉलेज में भर्ती के समय बच्चे की स्थिति अत्यंत गंभीर थी। चिकित्सकीय जांच में नवजात के गंभीर हाइपॉक्सिक-इस्केमिक एन्सेफैलोपैथी (HIE) से पीड़ित होने की जानकारी सामने आई। यह एक गंभीर स्थिति है, जिसमें जन्म के आसपास मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलने से नुकसान पहुंच सकता है।

NICU में गहन निगरानी के साथ हुआ उपचार

नवजात को एनआईसीयू में भर्ती कर विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार शुरू किया गया। बच्चे को लगभग दो दिनों तक CPAP एवं वेंटिलेटरी श्वसन सहायता, दौरे नियंत्रित करने के लिए दवाएं और अन्य आवश्यक सहायक उपचार दिया गया। लगातार निगरानी और समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप के साथ उसकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार दर्ज किया गया।

बच्चे का उपचार डॉ. ब्रजेन्द्र सिंह, डॉ. अरुण, डॉ. नरेंद्र, डॉ. वेमानंद एवं डॉ. मनीषा ने बाल रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. नेहा ठाकुर के मार्गदर्शन में किया। चिकित्सकीय टीम के समन्वित प्रयासों और निरंतर देखभाल से नवजात की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। मेडिकल कॉलेज के अनुसार, जांच में एचआईई की गंभीरता ग्रेड-II से ग्रेड-I तक सुधरी। स्थिति स्थिर होने पर बच्चे को उसकी मां के साथ घर भेज दिया गया।

प्राचार्य डॉ. संगीता अनेजा ने दी बधाई

इस उपलब्धि पर कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज, बुलंदशहर की प्राचार्य डॉ. संगीता अनेजा ने उपचार करने वाले चिकित्सकों और संपूर्ण एनआईसीयू टीम को बधाई दी। उन्होंने टीम की निष्ठा, चिकित्सकीय दक्षता और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता की सराहना करते हुए कहा कि गंभीर मरीजों के उपचार में समन्वित प्रयास और समर्पण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

परिवार के लिए निराशा के बीच जगी उम्मीद

एटा से शुरू होकर आगरा होते हुए बुलंदशहर तक पहुंचा यह सफर नवजात के परिजनों के लिए चिंता और अनिश्चितता से भरा रहा। हालांकि, केजीएमसी की एनआईसीयू टीम के प्रयासों से बच्चे की हालत में सुधार हुआ और परिवार को राहत मिली।

यह उपलब्धि गंभीर रूप से बीमार नवजातों के उपचार में समय पर रेफरल, विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं और प्रशिक्षित चिकित्सकीय टीम की अहमियत को रेखांकित करती है। केजीएमसी बुलंदशहर के बाल रोग विभाग और एनआईसीयू टीम का यह प्रयास नवजात देखभाल के क्षेत्र में समर्पण और मानवीय संवेदनशीलता का उदाहरण है।

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