एयरपोर्ट विस्थापित किसानों को बड़ी राहत, आवंटित भूखंडों की रजिस्ट्री शुरू
एयरपोर्ट विस्थापित किसानों को बड़ी राहत, आवंटित भूखंडों की रजिस्ट्री शुरू

जेवर। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए अपनी जमीन देने वाले विस्थापित किसानों के लिए शुक्रवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। वर्षों से लंबित आवंटित भूखंडों की रजिस्ट्री का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। जेवर बांगर में पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन योजना के तहत आवंटित भूखंडों की रजिस्ट्री प्रक्रिया आज से शुरू कर दी गई।
जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह की मौजूदगी में सब-रजिस्ट्रार कार्यालय, जेवर में प्रथम चरण में पांच विस्थापित किसानों के भूखंडों की रजिस्ट्री कराई गई। इनमें नगला शरीफ खां के उमर मोहम्मद, दयानतपुर खेड़ा के हंसराज और ओमप्रकाश तथा रोही गांव के जयवीर सिंह और प्रेमवती शामिल हैं।बताया गया कि वर्ष 2020-21 में विस्थापित परिवारों के लिए कुल 3065 भूखंडों के आरक्षण/आवंटन पत्र जारी किए गए थे। हालांकि, वर्ष 2022 से रजिस्ट्री का मामला लंबित होने के कारण किसानों को आवंटित भूखंडों पर विधिवत मालिकाना हक नहीं मिल पा रहा था। अब पांच किसानों की रजिस्ट्री के साथ इस प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत हो गई है।
विधायक धीरेन्द्र सिंह ने कहा कि जेवर के किसानों ने एयरपोर्ट परियोजना के लिए अपनी पुश्तैनी जमीन देकर देश और प्रदेश के विकास में ऐतिहासिक योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि विस्थापित किसानों को आवंटित भूखंडों का मालिकाना हक मिलना उनका अधिकार है और अब शेष पात्र किसानों की रजिस्ट्री भी क्रमबद्ध तरीके से कराई जाएगी।उन्होंने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताते हुए कहा कि एयरपोर्ट के लिए जमीन देने वाले किसान केवल भूमि दाता नहीं, बल्कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा के वास्तविक भागीदार हैं।जेवर विधायक ने संबंधित अधिकारियों से रजिस्ट्री प्रक्रिया को अभियान के रूप में तेज करने और सभी पात्र विस्थापित किसानों को जल्द से जल्द उनके आवंटित भूखंडों का मालिकाना हक दिलाने के निर्देश दिए।
पांच किसानों की रजिस्ट्री से शुरू हुई यह प्रक्रिया उन हजारों प्रभावित परिवारों के लिए उम्मीद की बड़ी किरण मानी जा रही है, जो लंबे समय से अपने आवंटित भूखंडों के कानूनी मालिकाना हक का इंतजार कर रहे थे।




