श्री द्रोणाचार्य पीजी कॉलेज में आठ दिवसीय ऑनलाइन NEP ओरिएंटेशन एवं संवेदनशीलता कार्यक्रम का समापन
नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शिक्षकों को मिला समग्र प्रशिक्षण
श्री द्रोणाचार्य पीजी कॉलेज में आठ दिवसीय ऑनलाइन NEP ओरिएंटेशन एवं संवेदनशीलता कार्यक्रम का समापन

दनकौर।श्री द्रोणाचार्य पीजी कॉलेज, दनकौर एवं यूजीसी–मालवीय मिशन–टीचर ट्रेनिंग सेंटर, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित आठ दिवसीय ऑनलाइन एनईपी ओरिएंटेशन एवं संवेदनशीलता कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों एवं प्रावधानों से अवगत कराने के साथ बदलती शैक्षणिक जरूरतों, तकनीकी नवाचार, शोध और समावेशी शिक्षा के लिए तैयार करना रहा।कार्यक्रम महाविद्यालय के सचिव रजनीकान्त अग्रवाल के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। आयोजन में प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स का मार्गदर्शन एवं सहयोग तथा कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रश्मि गुप्ता के समन्वित प्रयास महत्वपूर्ण रहे। देश के विभिन्न क्षेत्रों से शिक्षकों एवं शिक्षाविदों ने ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता कर विषय विशेषज्ञों के साथ अकादमिक संवाद किया।आठ दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान भारतीय ज्ञान प्रणाली, उच्च शिक्षा एवं समाज, कौशल विकास, शोध, विद्यार्थी विविधता एवं समावेशी शिक्षा, शैक्षणिक नेतृत्व, शासन एवं प्रबंधन, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, समग्र विकास तथा बहुविषयक शिक्षा जैसे विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान और संवाद आयोजित किए गए।विशेषज्ञों ने भारतीय ज्ञान, दर्शन, संस्कृति एवं परंपराओं को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने, उच्च शिक्षा की सामाजिक भूमिका तथा शिक्षक की बदलती जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की। वहीं कौशल एवं शोध विकास से जुड़े सत्रों में संज्ञानात्मक कौशल, आधुनिक मूल्यांकन, शोध समस्या एवं परिकल्पना निर्माण तथा गुणवत्तापूर्ण शोध के विभिन्न आयामों पर मार्गदर्शन दिया गया।
समावेशी शिक्षा के अंतर्गत दिव्यांगजन, सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित वर्गों, सहायक तकनीक और समावेशी शैक्षणिक वातावरण पर विशेष जोर दिया गया। इसके अलावा शैक्षणिक नेतृत्व, प्रभावी प्रशासन और संस्थागत गुणवत्ता उन्नयन के माध्यम से शिक्षकों की नेतृत्वकारी भूमिका पर भी विचार-विमर्श हुआ।कार्यक्रम के अंतिम चरण में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई ) के शिक्षा में बढ़ते उपयोग पर विशेष चर्चा हुई। प्रतिभागियों को एआई आधारित व्यक्तिगत एवं अनुकूली शिक्षा, डिजिटल सामग्री निर्माण, प्रभावी प्रॉम्प्ट लेखन, जीरो-शॉट एवं वन-शॉट प्रॉम्प्टिंग तथा RAG जैसी तकनीकों की शैक्षणिक उपयोगिता से परिचित कराया गया। विशेषज्ञों ने एआई को शिक्षक का विकल्प नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ उपयोग किए जाने वाले सहायक शैक्षणिक साधन के रूप में अपनाने पर बल दिया।समापन सत्र में समग्र विकास एवं बहुविषयक शिक्षा पर भी विस्तृत अकादमिक विमर्श हुआ। प्रतिभागियों को विभिन्न विषयों के ज्ञान को एकीकृत कर वास्तविक जीवन की जटिल समस्याओं के समाधान की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया।समापन अवसर पर प्रो. दिव्या यू. जोशी, निदेशक, यूजीसी–एमएमटीटीसी, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रश्मि गुप्ता ने यूजीसी–एमएमटीटीसी, कुमाऊँ विश्वविद्यालय के प्रो. लेफ्टिनेंट रीतेश शाह सहित सभी निदेशकों, विशेषज्ञ वक्ताओं, कार्यक्रम अधिकारियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने सचिव रजनीकान्त अग्रवाल के मार्गदर्शन और प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स के निरंतर सहयोग के लिए भी धन्यवाद दिया।डॉ. रश्मि गुप्ता ने कहा कि ऐसे शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल ज्ञानवर्धन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि शिक्षकों को तकनीकी नवाचार, शोध, समावेशिता और बहुविषयक दृष्टिकोण के साथ बदलती शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप तैयार करते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान को कक्षा-कक्ष, शोध एवं संस्थागत कार्यों में प्रभावी रूप से लागू करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के ऑनलाइन संचालन में जतीन का तकनीकी सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा। आठ दिवसीय प्रशिक्षण ने शिक्षकों को ज्ञान, कौशल, तकनीक, शोध, नेतृत्व और भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयामों से जोड़ते हुए एनईपी 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण अकादमिक पहल का रूप लिया।




