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बायोमेडिकल रिसर्च में नैतिकता पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

बायोमेडिकल रिसर्च में नैतिकता पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा अनुसंधान में नैतिक मूल्यों और गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आईटीएस डेंटल कॉलेज, हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर, ग्रेटर नोएडा में दिनांक 06.08.2026 को बायोमेडिकल रिसर्च में नैतिकता विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में संस्थागत एथिक्स कमेटी के सदस्य, एमडीएस/एमएस थीसिस गाइड्स, संकाय सदस्य तथा शोध गतिविधियों से जुड़े शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता की। कुल 45 प्रतिभागियों ने इस अकादमिक कार्यक्रम में भाग लेकर चिकित्सा अनुसंधान से जुड़े नवीनतम नैतिक मानकों एवं नियामकीय दिशानिर्देशों की जानकारी प्राप्त की।इस अवसर पर मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज एवं संबद्ध अस्पताल, नई दिल्ली की डायरेक्टर प्रोफेसर, फार्माकोलॉजी विभाग की मुख्य वक्ता डॉ. शालिनी चावला ने अपने व्याख्यान में बायोमेडिकल रिसर्च में नैतिक सिद्धांतों की अनिवार्यता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी शोध की विश्वसनीयता केवल उसके वैज्ञानिक निष्कर्षों से नहीं, बल्कि शोध प्रक्रिया में अपनाई गई नैतिकता, पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व से निर्धारित होती है। उन्होंने मानव प्रतिभागियों के अधिकारों की सुरक्षा तथा नए औषध एवं नैदानिक परीक्षण नियम, 2019 के प्रमुख प्रावधानों को सरल एवं व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक शोधकर्ता का दायित्व है कि वह समाज एवं प्रतिभागियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नैतिक मानकों का पूर्णतः पालन करे।लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली के डायरेक्टर-प्रोफेसर, फार्माकोलॉजी विभाग के विशिष्ट वक्ता डॉ. ललित कुमार गुप्ता ने गुड क्लीनिकल प्रैक्टिस, दिशानिर्देशों, संस्थान मानक संचालन प्रक्रियाओं, अनुसंधान की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उपायों तथा क्लीनिकल रिसर्च में नियामकीय अनुपालन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।संस्थान के प्रधानाचार्य डॉ. ओमकार के. शेट्टी ने कहा कि चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा अनुसंधान में नैतिकता का पालन गुणवत्तापूर्ण एवं विश्वसनीय शोध की आधारशिला है। शोधकर्ताओं के लिए वैज्ञानिक उत्कृष्टता के साथ-साथ नैतिक मूल्यों का पालन करना भी अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार की कार्यशालाएं हमारे विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं संकाय सदस्यों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्तरदायी एवं नैतिक अनुसंधान करने के लिए प्रेरित करती हैं। संस्थान सदैव शोध उत्कृष्टता, नवाचार एवं नैतिक अनुसंधान संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।आईटीएस – द एजुकेशन ग्रुप के उपाध्यक्ष रोहित चड्ढा ने कार्यशाला की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में चिकित्सा एवं जैव-चिकित्सीय अनुसंधान में नैतिकता का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। उत्कृष्ट शोध केवल वैज्ञानिक ज्ञान से ही नहीं, बल्कि ईमानदारी, पारदर्शिता और नैतिक मूल्यों के पालन से भी संभव होता है। उन्होंने आगे कहा कि हमारा उद्देश्य ऐसी शोध संस्कृति का निर्माण करना है, जो समाज, रोगियों और वैज्ञानिक समुदाय के हितों की रक्षा करते हुए नवाचार एवं उत्कृष्टता को बढ़ावा दे।

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