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वैश्विक संकट में जूझती MSME—अर्थव्यवस्था की रीढ़ को बचाने का निर्णायक समय।अमित उपाध्याय 

वैश्विक संकट में जूझती MSME—अर्थव्यवस्था की रीढ़ को बचाने का निर्णायक समय।अमित उपाध्याय 

गौतमबुद्धनगर। वैश्विक अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनावों के बीच सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) क्षेत्र अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहा है। ईरान-इज़राइल संघर्ष के चलते वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित हुई हैं, जिसका सीधा असर भारत सहित उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा है।

गौतम बुद्ध नगर, जो देश के प्रमुख औद्योगिक जिलों में शामिल है, इस संकट की मार झेल रहा है। कच्चे माल—जैसे लोहा, तांबा, प्लास्टिक ग्रैन्यूल्स और कागज—की कीमतों में 35% से 50% तक की वृद्धि ने उद्योगों की लागत को असहनीय स्तर तक पहुंचा दिया है। साथ ही ऊर्जा संकट और गैस की कमी ने उत्पादन गतिविधियों को प्रभावित कर दिया है।

स्थिति यह है कि कई सूक्ष्म और लघु उद्योग बंद हो चुके हैं, जबकि जो संचालित हैं वे भी भारी आर्थिक दबाव में काम कर रहे हैं। किराया, बैंक ऋण की किश्तें और कर्मचारियों का वेतन देना उद्यमियों के लिए चुनौती बन चुका है।

औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों की स्थिति भी चिंताजनक है। भोजन और मूलभूत सुविधाएं प्रभावित होने से असुरक्षा का माहौल है, जिसके चलते बड़े पैमाने पर श्रमिक अपने गांवों की ओर पलायन कर रहे हैं। यह न केवल मानव संसाधन का नुकसान है, बल्कि उत्पादन क्षमता पर भी सीधा असर डाल रहा है।

MSME क्षेत्र, जिसे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, रोजगार सृजन, नवाचार और आत्मनिर्भरता में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में इस क्षेत्र की कमजोरी देश की आर्थिक स्थिरता पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।

इस संबंध में अमित उपाध्याय, अध्यक्ष इंडस्ट्रियल बिजनेस संगठन, गौतम बुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियां उद्योगों के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि कच्चे माल की कीमतों में भारी वृद्धि, ऊर्जा संकट और वित्तीय दबाव के कारण MSME क्षेत्र अस्तित्व के संकट से गुजर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार एवं प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप करते हुए कच्चे माल और ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही MSME के लिए विशेष राहत पैकेज, सब्सिडी, कर में छूट और बैंकिंग दायित्वों में अस्थायी राहत प्रदान की जानी चाहिए। नरेन्द्र मोदी के ‘विजन 2047’ और उत्तर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास के लक्ष्य तभी साकार हो सकते हैं, जब वर्तमान संकट का प्रभावी समाधान समय रहते किया जाए।अमित उपाध्याय ने कहा कि यह समय निर्णायक कदम उठाने का है—उद्योगों को बचाने, रोजगार को संरक्षित करने और देश की आर्थिक मजबूती को बनाए रखने के लिए ठोस रणनीति अपनाना अत्यंत आवश्यक है।

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