दूसरों की संपत्ति, चाहे कितनी भी मूल्यवान क्यों न हो, उस पर हमारा कोई अधिकार नहीं।अतुल कृष्ण भारद्वाज
दूसरों की संपत्ति, चाहे कितनी भी मूल्यवान क्यों न हो, उस पर हमारा कोई अधिकार नहीं।अतुल कृष्ण भारद्वाज

ग्रेटर नोएडा ।श्री धार्मिक रामलीला कमेटी के तत्वाधान में रामलीला मैदान ऐछर बिरोड़ा सेक्टर पाई 1 में अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज के अमृत मयी वाणी से श्री राम कथा आयोजन का मंगलवार को नवां दिन था।व्यास जी द्वारा श्रीराम कथा के अंतिम दिवस का वर्णन करते हुए कहा गया कि दूसरों की संपत्ति, चाहे कितनी भी मूल्यवान क्यों न हो, उस पर हमारा कोई अधिकार नहीं है। चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात जब भगवान श्रीराम अयोध्या पहुँचे, तो अयोध्यावासी खुशियों से झूम उठे।श्रीराम कथा के अंतिम दिवस पर कथा व्यास परम पूज्य अतुल कृष्ण भारद्वाज महाराज ने कहा कि रामायण हमें जीवन जीने की सही विधि सिखाती है। यह हमें आदर, सेवा, भोग, त्याग और मर्यादा का महत्व समझाती है, साथ ही यह भी सिखाती है कि दूसरों की संपत्ति पर हमारा कोई अधिकार नहीं है। श्रीराम कथा की अमृत वर्षा के दौरान पूज्य व्यास जी ने सीताहरण, लंका दहन, राम-रावण युद्ध तथा विभीषण के राज्याभिषेक जैसे प्रसंगों की अत्यंत मार्मिक व्याख्या की। कथा प्रसंग में उन्होंने बताया कि भगवान कण-कण में विराजमान हैं। यदि हम समाज के दीन-दुखियों और जरूरतमंदों की सेवा करते हैं, तो वही सच्ची भक्ति है।जिस प्रकार भगवान श्रीराम ने वनवास के समय दीन-दुखियों, वनवासियों और आदिवासियों के कष्ट दूर किए और उन्हें संगठित किया, उसी संगठित शक्ति से समाज की बुराइयों का नाश किया गया। उसी प्रकार आज भी समाज में व्याप्त बुराइयों को समाप्त करने के लिए अच्छे लोगों का संगठित होना आवश्यक है। जब धीरे-धीरे अच्छे लोगों की संख्या बढ़ेगी और वे संगठित होंगे, तो समाज से बुराइयाँ स्वतः ही कम होती जाएँगी। पूज्य व्यास जी ने सभी श्रोताओं से आह्वान किया कि जिस प्रकार श्रीराम ने अपने प्रेम से वनवासियों को अपना भक्त बनाया और उनके कष्ट दूर किए, उसी प्रकार हर राम भक्त को इस पुनीत कार्य में अपना सहयोग देना चाहिए। यह स्वयं भगवान का कार्य है।
कथा के समापन पर पूज्य व्यास जी ने श्रीराम का वर्णन करते हुए कहा कि बुराई और असत्य अधिक समय तक नहीं टिकते। अंततः सत्य की ही विजय होती है और अधर्म पर धर्म की जीत सदैव होती आई है।हनुमान जी की तरह भगवान के नाम का सुमिरन और कीर्तन जीवन का हिस्सा बने इन सारी बातों को महाराज जी ने बड़ी सुगमता से कथा श्रोताओं के सामने रख सबको धन्य किया।
कथा मुख्य यजमान हरवीर मावी सह मुख्य यजमान शेर सिंह भाटी, धीरज शर्मा रहे हैं। दैनिक यजमान पीपी शर्मा जी रहे हैं। इस राम कथा में वरिष्ठ प्रचारक ईश्वर दयाल , स्वामी सुशील जी महाराज, प्रांत प्रचारक वेदपाल, जिला प्रचारक नेम पाल , राजकुमार , अध्यक्ष आनंद भाटी, पंडित प्रदीप शर्मा, कुलदीप शर्मा, दिनेश गुप्ता, पवन नागर, ममता तिवारी, मनीष डावर, अतुल आनंद, फिरे प्रधान, सत्यवीर मुखिया, महेश शर्मा बदौली, उमेश गौतम, रोशनी सिंह, वीरपाल मावी, तेज कुमार भाटी, सुंदर भाटी, भगवत भाटी, ज्योति सिंह, अश्विनी शुक्ला, राकेश बैसोया, रश्मि अरोड़ा, गीता सागर, यशपाल नागर, चैनपाल प्रधान अजय कसाना पवन भाटी राजेश नंबरदार राकेश नंबरदार उपस्थित रहे हैं।




