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आईएचजीएफ दिल्ली मेले में विदेशी खरीदारों की बढ़ी दिलचस्पी, भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों की मांग तेज

आईएचजीएफ दिल्ली मेले में विदेशी खरीदारों की बढ़ी दिलचस्पी, भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों की मांग तेज

तीसरे दिन सस्टेनेबल उत्पादों, प्राकृतिक सामग्री और हस्तनिर्मित कलाकृतियों ने खींचा ध्यान

निर्यातकों को मिले नए ऑर्डर

ग्रेटर नोएडा। इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित 62वें आईएचजीएफ दिल्ली मेला-ऑटम 2026 के तीसरे दिन विदेशी खरीदारों की अच्छी भागीदारी देखने को मिली। 13 से 17 अक्टूबर तक चल रहे इस मेले में भारतीय हस्तशिल्प, घरेलू सजावट, फर्नीचर, फैशन एक्सेसरीज, कपड़े और लाइफस्टाइल उत्पादों की मांग बढ़ी है। खास तौर पर टिकाऊ उत्पादों, प्राकृतिक सामग्री, रिसाइकिल किए गए सामान और हाथ से तैयार किए गए उत्पादों ने अंतरराष्ट्रीय खरीदारों का ध्यान आकर्षित किया। इससे प्रदर्शकों को नए व्यावसायिक संपर्क बनाने के साथ पूछताछ और ऑर्डर मिलने के अवसर भी मिले।

मेले का दौरा भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय की सचिव नीलम शामी राव और हस्तशिल्प विकास आयुक्त अमृत राज ने किया। दोनों अधिकारियों ने मेले में प्रदर्शित भारतीय हस्तशिल्प और विविध उत्पाद संग्रहों की सराहना की। नीलम शामी राव ने कहा कि यह मेला भारतीय निर्माताओं, निर्यातकों, कारीगरों और बुनकरों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मंच बन गया है। हस्तशिल्प क्षेत्र देश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ रोजगार सृजन और ग्रामीण आजीविका को भी बढ़ावा देता है।

हस्तशिल्प विकास आयुक्त अमृत राज ने निर्यातकों से पारंपरिक शिल्पकला की पहचान बनाए रखते हुए नवाचार, गुणवत्ता और टिकाऊ उत्पादन पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया।

हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने बताया कि मेले के शुरुआती तीन दिनों में पुराने और नए, दोनों तरह के खरीदारों ने उत्साह दिखाया है। कई खरीदार पुराने आपूर्तिकर्ताओं के साथ नए निर्यातकों से भी कारोबार करने में रुचि ले रहे हैं। प्रदर्शकों की ओर से कपास और जूट से बने लाइफस्टाइल उत्पाद, प्राकृतिक रंगों से तैयार कपड़े, रिसाइकिल सामग्री से बने सजावटी सामान और पर्यावरण के अनुकूल फैशन एक्सेसरीज पेश की जा रही हैं।

मेले में अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, ताइवान और जापान सहित कई देशों के खरीदार पहुंचे। उनकी रुचि घरेलू सजावट, फर्नीचर, लाइटिंग, कपड़ों और हस्तनिर्मित उत्पादों में देखने को मिली। ब्रिटेन और जर्मनी के खरीदार भारतीय फर्नीचर तथा सजावटी उत्पादों की खरीद में दिलचस्पी दिखा रहे हैं, जबकि जापान के खरीदार टोट बैग और सिलाई से जुड़े उत्पादों की तलाश कर रहे हैं। इससे भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध संभावनाएं उजागर हुई हैं।

मेले के दौरान निर्यातकों को बदलते वैश्विक व्यापार नियमों और तकनीक की जानकारी देने के लिए विशेष संगोष्ठियां भी आयोजित की गईं। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (जीईओ), आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (एईओ), यूरोपीय संघ के वन कटाई संबंधी नियमों के अनुपालन, सप्लाई चेन की निगरानी और पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग जैसे विषय शामिल रहे। इन सत्रों का उद्देश्य निर्यातकों को डिजिटल माध्यमों से खरीदारों तक पहुंच बनाने और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कारोबार करने में मदद करना था।

ईपीसीएच के उपाध्यक्ष सागर मेहता ने कहा कि खरीदारों की सकारात्मक प्रतिक्रिया भारत को हस्तशिल्प और डिजाइन आधारित उत्पादों के प्रमुख सोर्सिंग केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक है। वहीं, स्वागत समिति के अध्यक्ष अवधेश अग्रवाल ने संगोष्ठियों को निर्यातकों के लिए उपयोगी बताया।

ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राजेश रावत ने कहा कि मेले में खरीदारों और आगंतुकों ने उत्पादों की विविधता, आयोजन की सुविधाओं और व्यापारिक गतिविधियों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत से हस्तशिल्प का कुल निर्यात 33,168 करोड़ रुपये (3,754 मिलियन अमेरिकी डॉलर) रहा।पांच दिन तक चलने वाला यह मेला भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक बाजारों से जोड़ने, निर्यात के नए अवसर पैदा करने और भारतीय कारीगरों एवं उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है।

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