कम उम्र में बढ़ रही स्पाइन की समस्याएं, गलत पोश्चर और मोबाइल-लैपटॉप का अधिक इस्तेमाल प्रमुख कारण
कम उम्र में बढ़ रही स्पाइन की समस्याएं, गलत पोश्चर और मोबाइल-लैपटॉप का अधिक इस्तेमाल प्रमुख कारण

ग्रेटर नोएडा। रीढ़ की हड्डी यानी स्पाइन से जुड़ी समस्याएं अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। लंबे समय तक मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल, गलत तरीके से बैठना, व्यायाम की कमी और बढ़ता वजन गर्दन व कमर दर्द की प्रमुख वजह बन रहे हैं। समय पर उपचार नहीं मिलने पर स्लिप डिस्क, सर्वाइकल स्पॉन्डाइलोसिस और साइटिका जैसी समस्याएं गंभीर हो सकती हैं।यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जरी विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादातर मरीजों को दवाओं, फिजियोथेरेपी और जीवनशैली में बदलाव से राहत मिल सकती है। हालांकि, नसों पर अधिक दबाव या गंभीर समस्या होने पर सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
20 से 35 वर्ष के युवाओं में भी बढ़ रहीं समस्याएं
यथार्थ हॉस्पिटल, ओमेगा-1, ग्रेटर नोएडा के सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोसर्जरी डॉ. राहुल शर्मा ने बताया कि युवाओं में गर्दन और कमर दर्द के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। उनकी ओपीडी में आने वाले मरीजों में रीढ़ से संबंधित समस्याएं प्रमुख हैं। उन्होंने बताया कि एक 54 वर्षीय महिला, जिनका वजन लगभग 128 किलोग्राम था, स्लिप डिस्क और साइटिका से परेशान थीं। एंडोस्कोपिक सर्जरी के जरिए नसों पर दबाव हटाया गया, जिसके बाद उन्हें राहत मिली और दो सप्ताह में वह स्वतंत्र रूप से चलने लगीं। उन्होंने युवाओं को नियमित व्यायाम, सही पोश्चर और काम के दौरान बीच-बीच में ब्रेक लेने की सलाह दी।
युवाओं में भी दिख रही स्लिप डिस्क की समस्या
यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा एक्सटेंशन के कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन डॉ. अंकित अग्रवाल ने बताया कि बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक बैठकर काम करना, स्क्रीन का अधिक इस्तेमाल और शारीरिक गतिविधियों की कमी स्पाइन की समस्याओं को बढ़ा रही है। कम उम्र में भी सर्वाइकल स्पॉन्डाइलोसिस और स्लिप डिस्क के मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार दर्द, सुन्नपन, पैरों में झनझनाहट या कमजोरी होने पर चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। गंभीर मामलों में एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी से मरीजों को राहत मिल सकती है। सर्जरी के बाद फिजियोथेरेपी और पुनर्वास भी महत्वपूर्ण हैं।
जटिल सर्जरी के बाद महिला ने फिर शुरू की सामान्य दिनचर्या
यथार्थ हॉस्पिटल, नोएडा के सीनियर कंसल्टेंट एवं न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण शर्मा ने बताया कि हाल ही में 50 वर्षीय महिला की जटिल स्पाइन सर्जरी की गई। उनकी रीढ़ में कई जगह डिस्क की समस्या, जोड़ों में अस्थिरता और टेढ़ापन था। हालत ऐसी थी कि उनके लिए पांच से छह मीटर चलना भी मुश्किल था। सर्जरी के दौरान रीढ़ को सीधा करने के साथ नसों पर पड़ रहे दबाव को दूर किया गया। उपचार और पुनर्वास के बाद महज 15 दिनों में उन्होंने सीढ़ियां चढ़ना शुरू कर दिया और अब अपने दैनिक कार्य करने के साथ पार्क में भी टहल रही हैं।
विशेषज्ञों ने दी सावधानी बरतने की सलाह
विशेषज्ञों के अनुसार, स्पाइन को स्वस्थ रखने के लिए सही पोश्चर अपनाना, नियमित व्यायाम करना, वजन नियंत्रित रखना और लंबे समय तक लगातार बैठने से बचना जरूरी है। मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल करते समय गर्दन को अधिक झुकाने से बचना चाहिए। कैल्शियम या विटामिन-डी की कमी की आशंका होने पर डॉक्टर की सलाह से जांच करानी चाहिए।डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि गर्दन और कमर के लगातार दर्द, पैरों तक फैलने वाले दर्द, सुन्नपन या कमजोरी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बिना चिकित्सकीय सलाह लंबे समय तक दर्द निवारक दवाएं लेने के बजाय समय पर जांच और उचित उपचार कराना जरूरी है। जागरूकता और जीवनशैली में छोटे बदलाव रीढ़ को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।




