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श्री धार्मिक रामलीला में शिव धनुष भंग से लेकर श्रीराम वनवास तक का भव्य मंचन, भावुक हुए दर्शक

श्री धार्मिक रामलीला में शिव धनुष भंग से लेकर श्रीराम वनवास तक का भव्य मंचन, भावुक हुए दर्शक

ग्रेटर नोएडा। श्री धार्मिक रामलीला में 16 अक्टूबर को छठे दिन सीता स्वयंवर, शिव धनुष भंग, श्रीराम-सीता विवाह, माता सीता की विदाई, मंथरा-कैकई संवाद और भगवान श्रीराम के वनवास तक की लीलाओं का भव्य मंचन किया गया। कलाकारों की शानदार प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। विवाह के प्रसंग में परिसर जयकारों से गूंज उठा, वहीं श्रीराम के वनवास के दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया।

परम पूज्य गोस्वामी सुशील महाराज के दिशा-निर्देशन और युवा अध्यक्ष आनंद भाटी के मार्गदर्शन में आयोजित रामलीला में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल, संसदीय कार्य एवं औद्योगिक विकास विभाग के राज्यमंत्री जसवंत सिंह सैनी और दादरी विधायक तेजपाल नागर रहे।

संस्था के अध्यक्ष आनंद भाटी ने बताया कि सीता स्वयंवर में राजा जनक ने शर्त रखी कि जो भी शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी के साथ माता सीता का विवाह होगा। स्वयंवर में उपस्थित अनेक राजा-महाराजा धनुष को हिला तक नहीं सके। इससे दुखी होकर राजा जनक ने अपनी निराशा व्यक्त की, जिस पर लक्ष्मण ने रघुवंश की वीरता का स्मरण कराया। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से भगवान श्रीराम ने शिव धनुष उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष टूट गया।धनुष टूटने की आवाज सुनकर भगवान परशुराम जनक दरबार पहुंचे। लक्ष्मण और परशुराम के बीच तीखा संवाद हुआ। इसके बाद भगवान श्रीराम के शांत और विनम्र व्यवहार से परशुराम का क्रोध शांत हुआ। भगवान श्रीराम के दिव्य स्वरूप को पहचानकर उन्होंने आशीर्वाद दिया और वहां से प्रस्थान किया।

इसके बाद अयोध्या से राजा दशरथ बारात लेकर जनकपुर पहुंचे, जहां चारों भाइयों का विवाह संपन्न हुआ। माता सीता की विदाई का दृश्य अत्यंत भावुक रहा। इसके बाद अयोध्या में चारों भाइयों और उनकी वधुओं का भव्य स्वागत दिखाया गया। राजतिलक की तैयारियों के बीच मंथरा के बहकावे में आकर कैकई ने राजा दशरथ से भरत के लिए राजगद्दी और भगवान श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांग लिया। पिता के वचन का पालन करते हुए भगवान श्रीराम के वन गमन का दृश्य देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं।

रामलीला के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम और माता सीता के जयकारे लगाए। पूरे परिसर में भक्ति और उल्लास का माहौल बना रहा।

आगामी लीलाओं में होंगे कई आकर्षक प्रसंग

आयोजकों के अनुसार, 17 अक्टूबर को राम-भरत मिलाप, शबरी प्रसंग, राम-हनुमान मिलन, किष्किंधा, बाली वध और अशोक वाटिका के प्रसंगों का मंचन होगा। 18 अक्टूबर को लंका दहन, सेतु निर्माण और रावण-अंगद संवाद प्रस्तुत किए जाएंगे। वहीं, 19 अक्टूबर को लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध तथा राम-कुंभकरण और रावण युद्ध का मंचन होगा।आयोजकों ने बताया कि श्री धार्मिक रामलीला एवं दशहरा महोत्सव का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं को जीवंत रखने के साथ नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और आदर्शों से जोड़ना है।इस अवसर पर संस्था के संस्थापक गोस्वामी सुशील महाराज, संस्थापक राजकुमार नागर, प्रदीप शर्मा, शेर सिंह भाटी, हरवीर मावी, मुख्य संरक्षक नरेश गुप्ता, संरक्षक सुशील नागर, धीरेंद्र भाटी, धीरज शर्मा, बालकिशन सफीपुर, दिनेश गुप्ता, पवन नागर, मनोज गुप्ता, सतीश भाटी, अध्यक्ष आनंद भाटी, महासचिव ममता तिवारी, कोषाध्यक्ष अजय नागर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेश शर्मा बदौली, उमेश गौतम, सत्यवीर मुखिया, रोशनी सिंह, महेश कमांडो, चैन पाल प्रधान, जितेंद्र भाटी, सुभाष भाटी, मनीष डाबर, मीडिया प्रभारी अतुल आनंद, उपाध्यक्ष फिरे प्रधान, पीपी शर्मा, श्याम सुंदर फौजी, यशपाल नागर, सचिव ज्योति सिंह, गीता शागर, राकेश भाटी, भगवत भाटी, तेज कुमार भाटी, सुंदर भाटी, पवन भाटी, वीरपाल मावी और जय शर्मा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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