पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह का बड़ा फैसला। इंडस्ट्रीज के लिए DCP पद सृजित, अलग पुलिस व्यवस्था । 15 हजार इकाइयों, 2 लाख कंपनियों और 4 लाख श्रमिकों पर रखी जाएगी नजर, शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर फोकस
पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह का बड़ा फैसला। इंडस्ट्रीज के लिए DCP पद सृजित, अलग पुलिस व्यवस्था
15 हजार इकाइयों, 2 लाख कंपनियों और 4 लाख श्रमिकों पर रखी जाएगी नजर, शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर फोकस

नोएडा: हाल ही में हुए श्रमिक आंदोलन के बाद गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए अलग पुलिस व्यवस्था लागू कर दी है। इस नई व्यवस्था के तहत “पुलिस उपायुक्त (डीसीपी ) इंडस्ट्रीज” का पद तदर्थ आधार पर सृजित किया गया है, जो औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े सभी मुद्दों की निगरानी और समन्वय करेगा।कमिश्नरेट के तीनों जोनों में करीब 15 हजार रजिस्टर्ड औद्योगिक इकाइयाँ संचालित हैं, जिनमें लघु, मध्यम, बृहद और बहुराष्ट्रीय कंपनियां शामिल हैं। इनसे जुड़े लगभग 2 लाख औद्योगिक प्रतिष्ठानों में करीब 4 लाख श्रमिक कार्यरत हैं। ऐसे में इंडस्ट्रीज सेक्टर को संवेदनशील और महत्वपूर्ण मानते हुए यह विशेष पुलिस व्यवस्था लागू की गई है।नई व्यवस्था के तहत डीसीपी(इंडस्ट्रीज) के अधीन एक सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी ), तीन निरीक्षक और विभिन्न रैंकों के 25 पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। यह टीम औद्योगिक इकाइयों, श्रमिक संगठनों और श्रमिकों के साथ सीधे संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करेगी। इस सेल का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित करना, श्रम कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित कराना और किसी भी प्रकार के विवाद या आंदोलन की स्थिति में समय रहते प्रभावी कार्रवाई करना है। साथ ही, अलग-अलग जोनों की पुलिस को औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं की त्वरित सूचना देकर बेहतर कानून व्यवस्था बनाए रखना भी प्राथमिकता होगी।कमिश्नरेट द्वारा यह भी निर्देश दिए गए हैं कि इस प्रस्ताव को स्थायी रूप देने के लिए तीन दिनों के भीतर पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश, लखनऊ और गृह विभाग को भेजा जाएगा। इसके अलावा अपर पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) द्वारा जल्द ही एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार कर जारी किया जाएगा। यह इंडस्ट्रीज पुलिस सेल तत्काल प्रभाव से कार्य करना शुरू कर चुका है।पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के इस फैसले को औद्योगिक क्षेत्र में कानून व्यवस्था मजबूत करने और श्रमिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




