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प्रख्यात फिल्मनिर्माता एवं प्रोडक्शन डिज़ाइनर वैशाली सिन्हा ने एकल चित्र प्रदर्शनी एनेक्सी आर्ट गैलरी, इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में की आयोजित,संजय सिंह व सुनीता केजरीवाल भी हुए शामिल 

प्रख्यात फिल्मनिर्माता एवं प्रोडक्शन डिज़ाइनर वैशाली सिन्हा ने एकल चित्र प्रदर्शनी एनेक्सी आर्ट गैलरी, इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में की आयोजित,संजय सिंह व सुनीता केजरीवाल भी हुए शामिल 

नई दिल्ली।प्रख्यात फिल्मनिर्माता एवं प्रोडक्शन डिज़ाइनर वैशाली सिन्हा ने हाल ही में अपनी बहुप्रतीक्षित एकल चित्र प्रदर्शनी एनेक्सी आर्ट गैलरी, इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित की है। इस प्रदर्शनी का औपचारिक उद्घाटन संजय सिंह , राज्यसभा सांसद द्वारा किया गया। सुनीता केजरीवाल सहित कई अन्य राजनीतिक एवं सामाजिक हस्तियों ने भी प्रदर्शनी में उपस्थित होकर कलाकार के कार्यों की सराहना की। उद्घाटन अवसर पर कला, संस्कृति और जनजीवन से जुड़े अनेक गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।वैशाली सिन्हा एक स्थापित प्रोडक्शन डिज़ाइनर और फिल्मनिर्माता हैं, जिन्होंने भारतीय सिनेमा में दो दशकों से अधिक समय तक प्रभावशाली दृश्य संसार रचा है। वे Haddi के लिए फ़िल्मफ़ेयर नामांकित रह चुकी हैं। 20 से अधिक फ़िल्मों में अपने रचनात्मक योगदान के साथ उन्होंने राऊडी राठौड़ , गब्बर इज बैक सहित कई चर्चित फ़िल्मों में प्रोडक्शन डिज़ाइनर के रूप में कार्य किया है। उनके द्वारा निर्मित सेट्स और दृश्य संरचनाएँ भव्यता, गहराई और सांस्कृतिक संवेदनशीलता का अद्भुत उदाहरण रही हैं। यही सिनेमाई दृष्टि अब उनके कैनवास पर सशक्त अभिव्यक्ति के रूप में दिखाई देती है।प्रदर्शनी में प्रस्तुत कृतियों में उनकी विशिष्ट बोल्ड ब्रश-स्ट्रोक्स, सशक्त रेखांकन और बहुस्तरीय टेक्सचर प्रमुख आकर्षण हैं। उनकी कला वैदिक संस्कृति, भारतीय मिथकीय प्रतीकों और पारंपरिक सौंदर्यशास्त्र से गहराई से प्रेरित है। अश्व, बिल्ली और अन्य पशु आकृतियाँ उनके चित्रों में केवल दृश्य तत्व नहीं, बल्कि ऊर्जा, चेतना, साहस और आध्यात्मिक शक्ति के प्रतीक के रूप में उभरती हैं।Hayagriva, Kalki और Dadhikra से प्रेरित कृतियाँ दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। इन चित्रों में गतिशीलता और आध्यात्मिक तीव्रता का अद्भुत संतुलन दिखाई देता है।“नीले घोड़े वाले” शीर्षक कृति, जो गुरु गोबिन्द सिंह से जुड़े प्रसिद्ध नीले अश्व की स्मृति से प्रेरित है, दर्शकों की विशेष पसंद बनी हुई है। विद्युत-नीले और गहरे रंगों में रचित यह चित्र वीरता, आस्था और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक बनकर उभरता है। स्त्री और बिल्ली के संयुक्त रूपांकनों में द्वैत, संरक्षण और रहस्यात्मक सौंदर्य का सूक्ष्म चित्रण भी दर्शकों को आकर्षित कर रहा है।यह प्रदर्शनी 27 फ़रवरी तक प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से सायं 7 बजे तक दर्शकों के लिए खुली रहेगी। कला प्रेमी और आम दर्शक इस अवधि में आकर इस अनूठे कलात्मक अनुभव का हिस्सा बन सकते हैं।इस सफल आयोजन के माध्यम से वैशाली सिन्हा ने स्वयं को न केवल एक कुशल प्रोडक्शन डिज़ाइनर और फिल्मनिर्माता के रूप में, बल्कि एक सशक्त और मौलिक समकालीन कलाकार के रूप में भी स्थापित किया है, जिनकी कला में मिथक, गति और आधुनिक संवेदना का अद्भुत संगम दिखाई देता है।

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