ग्रेटर नोएडा सेक्टर-36 में नियमों की धज्जियां उड़ाकर खुली शराब की दुकान; मंदिर, स्कूल और अस्पताल के पास आबकारी नीति का खुला उल्लंघन, निवासियों ने रोका संचालन।
ग्रेटर नोएडा सेक्टर-36 में नियमों की धज्जियां उड़ाकर खुली शराब की दुकान; मंदिर, स्कूल और अस्पताल के पास आबकारी नीति का खुला उल्लंघन, निवासियों ने रोका संचालन।

ग्रेटर नोएडा |गौतम बुद्ध नगर के सेक्टर-36 में उस समय भारी तनाव और आक्रोश की स्थिति पैदा हो गई, जब सेक्टर के ही एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के भीतर शराब की दुकान (लिक्वर शॉप ) खोलने की कोशिश की गई। आज दुकान के उद्घाटन का पहला दिन था, लेकिन सेक्टर के जागरूक निवासियों और आरडब्ल्यूए के कड़े विरोध के कारण उद्घाटन के बावजूद दिनभर शराब की एक भी बूंद नहीं बिक सकी।सेक्टर-36 के निवासियों का आरोप है कि यह दुकान आबकारी विभाग के उन कड़े नियमों का उल्लंघन कर रही है, जो रिहायशी इलाकों में शराब की दुकानों के संचालन को प्रतिबंधित करते हैं। विशेष रूप से यह दुकान निम्नलिखित के बेहद करीब स्थित है:
मुख्य मंदिर: जहाँ सुबह-शाम सैकड़ों श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए आते हैं।
स्कूल: जहाँ छोटे बच्चों का आना-जाना लगा रहता है और शराब की दुकान उनके मानसिक विकास पर बुरा प्रभाव डालेगी।
अस्पताल: जहाँ मरीजों को शांति और सुरक्षित वातावरण की आवश्यकता होती है।
दुकान मालिक का दावा है कि उनके पास वैध लाइसेंस है और उन्होंने सभी मानक पूरे किए हैं। इसके उलट, सेक्टरवासियों का तर्क है कि रिहायशी परिसर के भीतर ऐसी दुकान को लाइसेंस मिलना ही भ्रष्टाचार या मिलीभगत का संकेत है। निवासियों का कहना है कि शाम के समय यहाँ असामाजिक तत्वों का जमावड़ा शुरू हो जाएगा, जिससे महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष डॉ.अजय भाटी कहते हैं कि
“हम अपने सेक्टर को शराब का अड्डा नहीं बनने देंगे। आबकारी नियमों के अनुसार मंदिर, स्कूल और अस्पताल के पास ऐसी दुकानें अवैध हैं। प्रशासन को तुरंत इस स्थान की भौतिक नपती (Physical Verification) करानी चाहिए। जब तक यह दुकान यहाँ से स्थानांतरित (Shift) नहीं होती, हमारा विरोध जारी रहेगा और हम एक भी बोतल की बिक्री नहीं होने देंगे।”
निवासियों ने जिलाधिकारी और जिला आबकारी अधिकारी को संबोधित ज्ञापन तैयार कर लिया है। सेक्टर-36 की जनता ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि प्रशासन ने 24 घंटे के भीतर दुकान को बंद करने या शिफ्ट करने का आदेश नहीं दिया, तो वे सड़क जाम करने और बड़े पैमाने पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।




