इनोवेटिव ग्रुप ऑफ कॉलेजेस में आपराधिक न्याय प्रणाली पर हुआ विशेष अतिथि व्याख्यान
इनोवेटिव ग्रुप ऑफ कॉलेजेस में आपराधिक न्याय प्रणाली पर हुआ विशेष अतिथि व्याख्यान

ग्रेटर नोएडा।इनोवेटिव ग्रुप ऑफ कॉलेजेस, ग्रेटर नोएडा के लॉ विभाग द्वारा हाल ही में “आपराधिक अभ्यास और प्रक्रिया के मूल सिद्धांत” (Fundamentals of Criminal Practice and Procedure) विषय पर एक अत्यंत ज्ञानवर्धक विशेष अतिथि व्याख्यान (Guest Lecture) का आयोजन किया गया। यह सत्र छात्रों को कानूनी सिद्धांतों के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया की व्यावहारिक और वास्तविक दुनिया की चुनौतियों से परिचित कराने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। इस पूरे व्याख्यान का सफल आयोजन और प्रबंधन इनोवेटिव इंस्टिट्यूट ऑफ लॉ के प्राचार्य, डॉ. मृत्युंजय पांडे के सक्षम नेतृत्व और अकादमिक निदेशक, डॉ. तितिक्षा शर्मा के विशेष मार्गदर्शन में किया गया। इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम के मुख्य वक्ता (Speaker) पूर्व श्री आर. के. उपाध्याय, जो एक सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश एवं स्थायी लोक अदालत के सेवानिवृत्त अध्यक्ष रहे! तथा उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा के पूर्व सदस्य और उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व कानूनी सलाहकार भी रहे हैं, उन्होंने अपने विशाल न्यायिक अनुभव को छात्रों के साथ साझा किया। उनके साथ, अतिथि के रूप में प्रख्यात कानूनी विशेषज्ञ श्री सुभाष गुप्ता भी उपस्थित रहे, जिन्होंने सत्र को और अधिक व्यावहारिक आयाम प्रदान किया।अपने संबोधन में, आर. के. उपाध्याय ने आपराधिक कानून के सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों में से एक, ‘दोहरे खतरे’ (Double Jeopardy) पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद के प्रावधानों को समझाते हुए बताया कि किसी भी व्यक्ति पर एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार मुकदमा क्यों नहीं चलाया जा सकता और क्यों यह सिद्धांत नागरिक स्वतंत्रता के लिए इतना महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस सिद्धांत के अनुप्रयोग और इसके अपवादों को स्पष्ट करने के लिए न्यायालयों के वास्तविक और ऐतिहासिक फैसलों के उदाहरण दिए, जिससे छात्रों को विषय की सैद्धांतिक और व्यावहारिक समझ विकसित हुई। इसके पश्चात, उन्होंने आपराधिक अभ्यास (Criminal Practice) के दैनिक पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने एक युवा अधिवक्ता को पुलिस जांच से लेकर न्यायालय में आरोप तय होने (framing of charges) और अंतिम बहस तक की प्रक्रिया में किन कदमों का पालन करना चाहिए, इस पर मूल्यवान सुझाव दिए। उन्होंने ज़ोर दिया कि आपराधिक न्याय में सफलता के लिए केवल कानून का ज्ञान ही काफी नहीं है, बल्कि जांच अधिकारियों, पीड़ितों और अन्य अधिवक्ताओं के साथ प्रभावी ढंग से संवाद करने की क्षमता भी आवश्यक है।व्याख्यान का एक महत्वपूर्ण भाग साक्ष्य (Evidence) और गवाहों (Witnesses) पर केंद्रित था। श्री आर. के. उपाध्याय ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत सबूतों की प्रासंगिकता (relevance), स्वीकार्यता (admissibility) और विश्वसनीयता (credibility) जैसे पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों को सिखाया कि एक गवाह की गवाही को कोर्ट में किस तरह से पेश किया जाता है और जिरह (Cross-Examination) के माध्यम से सत्य को कैसे स्थापित किया जाता है। उन्होंने वास्तविक उदाहरणों से बताया कि कैसे एक कमजोर गवाह या एक छोटा सा भौतिक साक्ष्य भी किसी बड़े आपराधिक मामले का रुख बदल सकता है। उन्होंने ‘शत्रुतापूर्ण गवाह’ (Hostile Witness) की अवधारणा और उससे निपटने की कानूनी प्रक्रिया को भी समझाया। अतिथि श्री सुभाष गुप्ता ने भी विभिन्न पेचीदा आपराधिक मामलों में अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा किया और छात्रों को कोर्ट रूम के अंदर के तनावपूर्ण माहौल में भी शांत और तर्कसंगत बने रहने की सलाह दी। उन्होंने छात्रों को नैतिकता (ethics) के महत्व पर जोर दिया, क्योंकि एक आपराधिक वकील की ज़िम्मेदारी सिर्फ अपने मुवक्किल के प्रति नहीं, बल्कि संपूर्ण न्याय प्रणाली के प्रति होती है।
शैक्षणिक निदेशक डॉ. तितिक्षा शर्मा ने कार्यक्रम के सफलतापूर्वक संपन्न होने पर गहन/अत्यंत प्रसन्नता व्यक्त की।” प्राचार्य डॉ. मृत्युंजय पांडे ने वक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “न्यायपालिका के दिग्गजों से सीधे संवाद करने का यह अवसर छात्रों के लिए कानूनी शिक्षा के प्रति उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाएगा। हमें विश्वास है कि इस व्याख्यान से मिली जानकारी और प्रेरणा हमारे छात्रों को न केवल सफल वकील, बल्कि न्याय के सच्चे प्रहरी बनने में मदद करेगी।” इस पूरे सत्र ने लॉ के छात्रों को आपराधिक कानून के प्रति एक गहरी और व्यावहारिक समझ प्रदान की और उन्हें कानूनी पेशे में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार किया।



