युवाओं का कोर ब्रांच से मोहभंग, वेदिका फाउंडेशन एवं जे पैन ट्यूबलर कंपनी ने उठाए बड़े कदम
युवाओं का कोर ब्रांच से मोहभंग, वेदिका फाउंडेशन एवं जे पैन ट्यूबलर कंपनी ने उठाए बड़े कदम

ग्रेटर नोएडा ।देश में कोर टेक्निकल ब्रांच (जैसे मैकेनिकल, सिविल, इलेक्ट्रिकल) में बढ़ते संकट के बीच हाल ही में जे पैन ट्यूबलर कॉम्पोनेंट्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर जिग्नेश पांचाल एवं वेदिका फाउंडेशन की संस्थापक डॉ.सपना आर्या के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में तकनीकी शिक्षा की वर्तमान स्थिति और इंडस्ट्री की जरूरतों के बीच बढ़ते अंतर पर गहन चर्चा हुई।बैठक में इस बात पर चिंता जताई गई कि आज के समय में अधिकांश छात्र आईटी और सॉफ्टवेयर क्षेत्रों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, जिसके कारण कोर टेक्निकल ब्रांच में रुचि लगातार घटती जा रही है। इसका सीधा असर उद्योगों पर पड़ रहा है, जहां योग्य और प्रशिक्षित इंजीनियरों की कमी महसूस की जा रही है, जिससे उत्पादन और नवाचार दोनों प्रभावित हो रहे हैं। जिग्नेश पांचाल ने अपनी बात रखते हुए कहा कि इंडस्ट्री को ऐसे इंजीनियरों की आवश्यकता है जिनके पास केवल डिग्री ही नहीं बल्कि व्यावहारिक ज्ञान और तकनीकी दक्षता भी हो। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा प्रणाली को इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार अपडेट किया जाना चाहिए और कॉलेजों व उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना समय की मांग है।वहीं डॉ.सपना आर्या ने तकनीकी शिक्षा में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे। उन्होंने बताया कि वेदिका फाउंडेशन छात्रों को स्किल-बेस्ड ट्रेनिंग, इंडस्ट्री एक्सपोजर और प्रैक्टिकल लर्निंग के माध्यम से तैयार करने की दिशा में कार्य कर रही है, ताकि वे वास्तविक कार्य परिस्थितियों के लिए बेहतर रूप से सक्षम बन सकें। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इंडस्ट्री और शिक्षा संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी स्थापित की जाएगी, जिससे छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही वास्तविक कार्य अनुभव मिल सके। साथ ही, कोर टेक्निकल ब्रांच को छात्रों के लिए अधिक आकर्षक बनाने के उद्देश्य से जागरूकता अभियान चलाने पर भी सहमति बनी। एचआर हेड पल्लवी राजपूत ने इस गहराते संकट को देखते हुए कहा कि यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में कोर सेक्टर में कुशल इंजीनियरों की भारी कमी देखने को मिल सकती है। ऐसे में यह बैठक तकनीकी शिक्षा और इंडस्ट्री के बीच सेतु बनाने की दिशा में एक सकारात्मक और महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।




