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पेड़ से गिरा युवक, चेनसॉ (इलेक्ट्रिक आरी) से फटा पेट – बाहर आ गई छोटी आंत,यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने बचाई 27 वर्षीय युवक की जान

पेड़ से गिरा युवक, चेनसॉ (इलेक्ट्रिक आरी) से फटा पेट – बाहर आ गई छोटी आंत,यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने बचाई 27 वर्षीय युवक की जान

गंभीर हादसा: पेट की दीवार पूरी तरह क्षतिग्रस्त, छोटी आंत बाहर निकली

तीन घंटे चली जटिल सर्जरी: त्वरित निर्णय और सर्जिकल विशेषज्ञता से संभव हुआ जीवनदान

नोएडा।एक पल की चूक जानलेवा साबित हो सकती है, लेकिन समय पर मिला विशेषज्ञ उपचार जीवनदान भी दे सकता है। नोएडा में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां 27 वर्षीय युवक को यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा एक्सटेंशन के डॉक्टरों ने असंभव प्रतीत होने वाली स्थिति से सुरक्षित बाहर निकाला। युवक पेड़ पर चढ़कर चेनसॉ मशीन (इलेक्ट्रिक आरी) से डालियां काट रहा था। अचानक संतुलन बिगड़ गया और चलती हुई चेनसॉ सीधे उसके पेट पर जा लगी। चोट इतनी गंभीर थी कि पेट की दीवार फट गई और छोटी आंत का बड़ा हिस्सा शरीर से बाहर आ गया। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल उसे अस्पताल पहुंचाया।इमरजेंसी में लाए जाने के समय मरीज की स्थिति अत्यंत गंभीर थी। अत्यधिक रक्तस्राव और खुले पेट के घाव के कारण संक्रमण का गंभीर खतरा था। डॉक्टरों की टीम ने बिना समय गंवाए तुरंत सर्जरी करने का निर्णय लिया।ऑपरेशन के दौरान पाया गया कि छोटी आंत तीन अलग-अलग स्थानों से फटी हुई थी। क्षतिग्रस्त हिस्सों को हटाकर आंत को पुनः जोड़ा गया। साथ ही मेसेन्ट्री (आंत को रक्त पहुंचाने वाली झिल्ली) में कई गहरे चीरे थे, जिन्हें सावधानीपूर्वक ठीक कर रक्तस्राव नियंत्रित किया गया। यह जटिल सर्जरी लगभग तीन घंटे तक चली।इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा एक्सटेंशन के मिनिमल एक्सेस, बैरिएट्रिक, रोबोटिक एवं जनरल सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. कपिल कोचर ने किया। उन्होंने बताया, “इस तरह के मामलों में हर मिनट कीमती होता है। टीमवर्क, त्वरित निर्णय और सर्जिकल सटीकता ही मरीज की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यदि थोड़ी भी देरी होती, तो परिणाम अलग हो सकते थे।”सर्जरी के बाद मरीज को एक दिन सर्जिकल आईसीयू में निगरानी में रखा गया। 48 घंटे के भीतर उसकी स्थिति स्थिर होने पर उसे सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। संक्रमण से बचाव और पोषण प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया।सबसे राहत की बात यह रही कि नौवें दिन मरीज बिना व्हीलचेयर के, अपने पैरों पर स्वस्थ होकर अस्पताल से घर लौटा।यह मामला दर्शाता है कि अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं, अनुभवी सर्जिकल टीम और समय पर लिया गया सटीक निर्णय मिलकर असंभव प्रतीत होने वाली परिस्थितियों में भी जीवन बचा सकते हैं।

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