ग्राइंडर हादसे में कटे अंगूठे को यथार्थ हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने माइक्रो सर्जरी से जोड़ा, समय पर इलाज से बचा हाथ
ग्राइंडर हादसे में कटे अंगूठे को यथार्थ हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने माइक्रो सर्जरी से जोड़ा, समय पर इलाज से बचा हाथ

ग्रेटर नोएडा।काम के दौरान ग्राइंडर मशीन से हुए गंभीर हादसे में पूरी तरह कटे अंगूठे को यथार्थ हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा यूनिट के डॉक्टरों ने सफल माइक्रो सर्जरी के जरिए जोड़कर एक बार फिर चिकित्सा क्षेत्र में मिसाल पेश की है। करीब 4.5 से 5 घंटे तक चली जटिल माइक्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद मरीज का अंगूठा सफलतापूर्वक रिप्लांट कर दिया गया और फिलहाल उसकी हालत पूरी तरह संतोषजनक बताई जा रही है।ग्रेटर नोएडा निवासी एक युवक इलेक्ट्रिशियन काम के दौरान ग्राइंडर मशीन से लकड़ी काट रहा था, तभी मशीन हाथ से फिसल गई और उसका अंगूठा जड़ से कट गया। गंभीर हालत में कटे हुए अंगूठे के साथ मरीज कई अस्पतालों में इलाज के लिए गया, लेकिन केस की जटिलता के चलते वहां से मना कर दिया गया। इसके बाद किसी परिचित की सलाह पर मरीज को यथार्थ हॉस्पिटल लाया गया, जहां समय रहते उसका उपचार संभव हो सका।यथार्थ हॉस्पिटल के डायरेक्टर एवं हेड – प्लास्टिक, एस्थेटिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी डॉ. सौरभ के. गुप्ता ने बताया कि शरीर के किसी अंग के पूरी तरह कट जाने की स्थिति में पहले 6 घंटे को ‘गोल्डन पीरियड’ माना जाता है। इसी अवधि में माइक्रोस्कोपिक सर्जरी के जरिए कटे हुए अंग को सफलतापूर्वक जोड़ा जा सकता है। इस प्रक्रिया में बेहद बारीक नसों और रक्त वाहिकाओं को माइक्रोस्कोप की सहायता से खोजकर आपस में जोड़ा जाता है, ताकि रक्त प्रवाह दोबारा सामान्य हो सके।डॉ. सौरभ ने बताया कि इस मामले में सबसे बड़ी चुनौती कटे हुए अंगूठे की नसों और रक्त वाहिकाओं को हाथ की नसों से इस तरह जोड़ना था, जिससे अंगूठा दोबारा जीवित रह सके। इस प्रक्रिया को माइक्रो सर्जिकल रिप्लांटेशन कहा जाता है।मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए बिना देरी किए उसे ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। डॉ. सौरभ के. गुप्ता, डॉ. ईदेन बिलाल सहित तीन प्लास्टिक सर्जनों की टीम ने लगभग 4.5 से 5 घंटे तक चली अत्यंत जटिल माइक्रो सर्जरी के बाद अंगूठे को सफलतापूर्वक जोड़ दिया। सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी संतोषजनक है और वह पूरी तरह स्वस्थ बताया जा रहा है।मरीज ने सफल इलाज के लिए डॉक्टरों और यथार्थ हॉस्पिटल की टीम का आभार जताया। वहीं डॉ. सौरभ ने कहा कि इस तरह की दुर्घटनाएं आम हैं, लेकिन यदि मरीज को सही समय पर उन्नत चिकित्सा सुविधा मिल जाए तो गंभीर से गंभीर चोट का भी सफल उपचार संभव है। माइक्रोस्कोपिक सर्जरी जैसी अत्याधुनिक सुविधा बहुत कम अस्पतालों में उपलब्ध है और यथार्थ हॉस्पिटल इस दिशा में लगातार सफल प्रयास कर रहा है।



