शारदा विश्वविद्यालय ने आयकर अधिनियम 2025 के प्रावधानों पर प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त अपर्णा करण के साथ इंटरैक्टिव सत्र का किया आयोजन
शारदा विश्वविद्यालय ने आयकर अधिनियम 2025 के प्रावधानों पर प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त अपर्णा करण के साथ इंटरैक्टिव सत्र का किया आयोजन

ग्रेटर नोएडा । शारदा विश्वविद्यालय में नए लागू किए गए आयकर अधिनियम, 2025 के प्रमुख प्रावधानों पर एक इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया, जिसका उद्देश्य छात्रों, फैकल्टी और पेशेवरों के बीच देश के आधुनिक प्रत्यक्ष कर ढांचे की समझ को बढ़ावा देना था। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती अपर्णा करण, प्रधान मुख्य आयुक्त आयकर, कानपुर (UP वेस्ट एवं उत्तराखंड) उपस्थित रहीं, तथा अन्य गणमान्य अतिथियों — मीनाक्षी जे. गोस्वामी — प्रमुख आयुक्त आयकर, नोएडा, दीपिका मित्तल — प्रमुख आयुक्त आयकर, एवं संजय कुमार चौरसिया — अतिरिक्त आयुक्त आयकर, गाजियाबाद द्वारा कार्यक्रम की गरिमामय उपस्थिति दर्ज कराई गई।
नया आयकर अधिनियम, 2025 संसद द्वारा पारित होकर 1 अप्रैल 2026 से लागू होने जा रहा है, और यह प्रत्यक्ष कर कानूनों की संरचना को सरल बनाने, स्पष्टता बढ़ाने, विवादों को कम करने तथा अनुपालन तंत्र को मजबूत करने वाला एक व्यापक सुधार है। शारदा यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर वाई. के. गुप्ता ने कहा: प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त अपर्णा करण जैसे विचारशील अधिकारियों के साथ इस प्रकार के सत्रों का आयोजन हमारे दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें हम छात्रों और पेशेवरों को नीति निर्माताओं से जोड़ते हैं। यह हमें ऐसे संवादों को प्रोत्साहित करने का अवसर प्रदान करता है जो हितधारकों को सशक्त बनाते हैं और हमारे छात्रों और फैकल्टी को विकसित हो रही राष्ट्रीय नीतियों की प्रत्यक्ष जानकारी प्रदान करते हैं।मुख्य अतिथि अपर्णा करण, प्रधान मुख्य आयुक्त आयकर, कानपुर (UP वेस्ट एवं उत्तराखंड) ने कहा: “नया आयकर अधिनियम, 2025 हमारे कर ढांचे को सरल बनाने, अधिक पारदर्शी और करदाताओं के अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। छात्रों, पेशेवरों और नागरिकों के साथ सीधे संवाद स्थापित करके हम इसके प्रावधानों को स्पष्ट करना चाहते हैं तथा यह दर्शाना चाहते हैं कि आधुनिक प्रक्रियाएँ व्यक्तियों और व्यवसायों दोनों के लिए कैसे लाभकारी होंगी। यह आवश्यक है कि करदाता केवल नियमों को ही नहीं, बल्कि इस सुधार की भावना को भी समझें, जो स्पष्टता, डिजिटल एकीकरण और न्यायसंगतता को बढ़ावा देती है। मैं सक्रिय भागीदारी और खुले संवाद के लिए प्रोत्साहित करती हूँ ताकि प्रत्येक हितधारक आत्मविश्वास से इस नए कानून को समझ सके और सूचित अनुपालन की संस्कृति में योगदान दे सके।”इस अवसर पर डॉ. अजय अग्रवाल, वित्त अधिकारी; डॉ. आर. सी. सिंह, डीन अकादमिक; डॉ. आर. पी. सिंह, सलाहकार; गोपाल गुप्ता, डीन; डॉ. देबासिस मल्लिक; डॉ. रूचि गर्ग; अखिल गुप्ता तथा सभी विभागों के प्रमुख, संकाय सदस्य और स्टाफ उपस्थित रहे।



