होली पर वृद्धावस्था में छोड़ गए अपने, होली के रंग हुए बेरंग। जवान बेटे होने के बावजूद वृद्धाश्रम चला रहे शिव प्रसाद शर्मा बने सहारा
होली पर वृद्धावस्था में छोड़ गए अपने, होली के रंग हुए बेरंग। जवान बेटे होने के बावजूद वृद्धाश्रम चला रहे शिव प्रसाद शर्मा बने सहारा

ग्रेटर नोएडा/आगरा। होली जैसे खुशियों के त्योहार पर भी कुछ बुजुर्ग माता-पिता की आंखें अपने बच्चों की राह देखते-देखते नम हो जाती हैं। ऐसे ही दर्द भरे हालात में रामलाल वृद्धाश्रम में रह रहे 75 वर्षीय बलवीर सिंह और उनकी पत्नी ईश्वरी देवी अपने बेटों के लौटने की उम्मीद में दिनभर प्रतीक्षा करते रहे, लेकिन कोई उन्हें लेने नहीं आया।पचायरी खेड़ा गांव के निवासी बलवीर सिंह और ईश्वरी देवी को उनकी बेटी होलिका दहन से एक दिन पहले सोमवार को रामलाल वृद्धाश्रम छोड़कर चली गई थी। बताया जाता है कि उनका छोटा बेटा शराब पीकर घर में झगड़ा और मारपीट करता था। कई बार धक्का देकर घर से निकाल दिया। ऐसी स्थिति में दंपति को मजबूरी में वृद्धाश्रम आना पड़ा। ईश्वरी देवी की आंखों में आंसू छलक उठते हैं। वे बताती हैं कि उनका परिवार भरा-पूरा है। दो बेटे हैं — बड़ा बेटा संजय सिंह प्राइवेट बैंक में नौकरी करता है और परिवार के साथ रहता है, जबकि छोटा बेटा दीपु स्कूल की गाड़ी चलाता है। गलत संगत में पड़कर वह शराब पीने लगा और अक्सर घर में झगड़ा करता था। मजबूर होकर बुजुर्ग दंपति बड़े बेटे के पास रहने गए, लेकिन वहां भी रोज झगड़ा होने लगा। समाज में बदनामी के डर से उन्होंने बेटी के घर जाना भी उचित नहीं समझा। अंततः बेटी उन्हें वृद्धाश्रम छोड़ गई।होली के दिन दोनों बुजुर्ग माता-पिता को उम्मीद थी कि शायद बेटे उन्हें लेने आएंगे, लेकिन पूरा दिन इंतजार करने के बाद भी कोई नहीं आया। बलवीर सिंह बताते हैं कि उन्होंने बच्चों की परवरिश में कभी कोई कमी नहीं छोड़ी और हर त्योहार पर उनकी हर इच्छा पूरी की।रामलाल वृद्धाश्रम के संचालक शिव प्रसाद शर्मा ने बताया कि वर्तमान में आश्रम में लगभग 370 बुजुर्ग माता-पिता रह रहे हैं। आश्रम की ओर से दोनों बेटों से संपर्क किया गया है और समझौता कराने की कोशिश जारी है ताकि बुजुर्ग दंपति फिर से अपने घर जा सकें




