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राष्ट्रीय सेवा योजना के सात दिवसीय विशेष शिविर में पर्यावरण संरक्षण एवं जल संवर्धन पर दिया जागरूकता का संदेश

राष्ट्रीय सेवा योजना के सात दिवसीय विशेष शिविर में पर्यावरण संरक्षण एवं जल संवर्धन पर दिया जागरूकता का संदेश

ग्रेटर नोएडा ।श्री द्रोणाचार्य पी.जी. कॉलेज, दनकौर की राष्ट्रीय सेवा योजना (एन.एस.एस.) इकाई द्वारा आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर के पंचम दिवस का कार्यक्रम ग्राम सलारपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय, विकासखंड दनकौर में अत्यंत उत्साह एवं सामाजिक जागरूकता के वातावरण में संपन्न हुआ। यह शिविर महाविद्यालय के सचिव एवं प्रबंधक रजनीकांत अग्रवाल तथा प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स के संरक्षण में तथा कार्यक्रम अधिकारी डॉ. प्रशांत कनौजिया एवं सहायक कार्यक्रम अधिकारी अमित नागर के निर्देशन में संचालित किया जा रहा है। पंचम दिवस के कार्यक्रम का प्रारंभ प्रातःकाल स्वयंसेवकों द्वारा श्रमदान एवं स्वच्छता अभियान से किया गया। स्वयंसेवकों ने प्राथमिक विद्यालय परिसर में उगी हुई घास, अनावश्यक पौधों तथा कंटीली झाड़ियों को हटाकर पूरे प्रांगण की समुचित साफ-सफाई की तथा झाड़ू लगाकर स्वच्छता का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। एकत्रित कूड़े को विद्यालय परिसर के बाहर निर्धारित स्थान पर रखा गया, जिसे नगर निगम द्वारा उठाया जाता है। श्रमदान के पश्चात स्वयंसेवकों के लिए दोपहर भोजन की व्यवस्था की गई। भोजन के उपरांत स्वयंसेवकों ने अनुशासन एवं स्वच्छता का परिचय देते हुए अपने द्वारा उत्पन्न कूड़े-करकट को विद्यालय परिसर में स्थापित डस्टबिन में डालकर स्वच्छता के प्रति अपनी जिम्मेदारी का परिचय दिया। इसके उपरांत ग्राम सलारपुर के ग्राम प्रधान अखिलेश प्रधान ने शिविर स्थल पर उपस्थित होकर स्वयंसेवकों के साथ वृक्षारोपण किया तथा पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अधिकाधिक वृक्ष लगाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वृक्ष पृथ्वी के प्राण हैं और इनके संरक्षण के बिना मानव जीवन की कल्पना संभव नहीं है। पंचम दिवस का मुख्य विषय “पर्यावरण प्रदूषण, वृक्षारोपण एवं जल संरक्षण” निर्धारित किया गया, जिसके अंतर्गत एक लघु संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की मुख्य वक्ता शशि नागर (विभागाध्यक्ष, बी.एड. विभाग, द्रोणाचार्य पी.जी. कॉलेज, दनकौर) रहीं। उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण प्रदूषण मानव सभ्यता के समक्ष एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। यदि मानव प्रकृति के साथ संतुलन स्थापित नहीं करेगा, तो भविष्य में जल, वायु और भूमि सभी संकटग्रस्त हो सकते हैं। उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें तथा जल संरक्षण के प्रति समाज में व्यापक जागरूकता फैलाएं। इसी क्रम में डॉ. निशा शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्वच्छ एवं संतुलित पर्यावरण ही स्वस्थ जीवन की आधारशिला है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। यदि हम प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहेंगे तो हमारा जीवन भी स्वस्थ और संतुलित रहेगा।शिक्षा विभाग के प्राध्यापक इंद्रजीत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि वृक्ष मानव जीवन के लिए अमूल्य धरोहर हैं। वृक्ष न केवल हमें प्राणवायु प्रदान करते हैं, बल्कि पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक वृक्ष अवश्य लगाना चाहिए और उसकी देखभाल भी करनी चाहिए। सहायक कार्यक्रम अधिकारी श्री अमित नागर ने अपने वक्तव्य में कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज के समय की सबसे बड़ी सामाजिक आवश्यकता है। उन्होंने स्वयंसेवकों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे जल संरक्षण, वृक्षारोपण तथा स्वच्छता के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करें और राष्ट्रीय सेवा योजना के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाएँ। कार्यक्रम अधिकारी डॉ. प्रशांत कनौजिया ने अपने संबोधन में कहा कि प्रकृति और मानव जीवन का संबंध अत्यंत गहरा और अभिन्न है। यदि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तो मानव जीवन भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे राष्ट्रीय सेवा योजना के मूल उद्देश्य “समाज सेवा के माध्यम से व्यक्तित्व विकास” को आत्मसात करते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज को जागरूक करने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँ। संगोष्ठी के उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें स्वयंसेवकों ने नुक्कड़ नाटक, कविता पाठ, देशभक्ति से ओत-प्रोत शेर-ओ-शायरी तथा विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्रप्रेम का प्रेरणादायी संदेश प्रस्तुत किया। स्वयंसेवकों की इन प्रभावशाली प्रस्तुतियों ने उपस्थित सभी लोगों को अत्यंत प्रभावित किया और कार्यक्रम को अत्यंत रोचक एवं प्रेरणादायक बना दिया। इस प्रकार राष्ट्रीय सेवा योजना के सात दिवसीय विशेष शिविर के पंचम दिवस का कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और जल संवर्धन के महत्वपूर्ण संदेश के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसने स्वयंसेवकों के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों को भी प्रकृति के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा प्रदान की।

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