विश्व कैंसर दिवस पर जिम्स ने लगाया जागरूकता कैंप, 50 से अधिक लोगों की जांच
विश्व कैंसर दिवस पर जिम्स ने लगाया जागरूकता कैंप, 50 से अधिक लोगों की जांच

ग्रेटर नोएडा।विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर चिकित्सा विशेषज्ञों ने सिर और गर्दन, स्तन सहित अन्य कैंसर में शीघ्र निदान की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि समय पर पहचान से न सिर्फ इलाज आसान होता है, बल्कि मरीजों की जान भी बचाई जा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में कैंसर के कुल मामलों में सिर और गर्दन के कैंसर की हिस्सेदारी काफी अधिक है, लेकिन जागरूकता की कमी के चलते इनका पता अक्सर उन्नत अवस्था में चलता है।चिकित्सकों ने बताया कि सिर और गर्दन के कैंसर मुख्य रूप से मुख गुहा, गला, स्वरयंत्र, नाक, साइनस और लार ग्रंथियों को प्रभावित करते हैं। तंबाकू का सेवन (धूम्रपान व बिना धूम्रपान वाला तंबाकू), शराब, सुपारी चबाने की आदत और खराब मौखिक स्वच्छता इसके प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) संक्रमण भी विशेष रूप से गले के कैंसर के लिए एक उभरता हुआ जोखिम कारक माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस श्रेणी के कैंसर के शुरुआती लक्षण बेहद हल्के होते हैं, जिन्हें लोग सामान्य समस्या समझकर अनदेखा कर देते हैं। न भरने वाले मुंह के छाले, लगातार गले में खराश, निगलने में दिक्कत, आवाज में बदलाव, गर्दन में बिना कारण सूजन, कान में दर्द या मुंह में सफेद व लाल धब्बे जैसे लक्षणों को गंभीरता से लेने की जरूरत है। समय रहते जांच कराने से उपचार के नतीजे और जीवित रहने की दर में उल्लेखनीय सुधार होता है।विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर ओटोरिनोलैरिंगोलॉजी एवं हेड एंड नेक सर्जरी विभाग द्वारा ग्रेटर नोएडा के बिसरख स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक कैंसर जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में ब्रिगेडियर डॉ. राकेश कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में प्रोफेसर एवं ईएनटी विभाग के प्रमुख डॉ. हुकम सिंह, डॉ. मोनिका पटेल, डॉ. श्रुति पांडे और डॉ. एस.के. मिश्रा ने 50 से अधिक लोगों की मुंह, गर्दन और स्तन कैंसर की जांच की। इस दौरान नर्सिंग स्टाफ द्वारा कैंसर जागरूकता को लेकर एक नुक्कड़ नाटक भी प्रस्तुत किया गया, जिसे लोगों ने सराहा।चिकित्सा विशेषज्ञों ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि यदि सिर और गर्दन के कैंसर का शुरुआती अवस्था में पता चल जाए तो अधिकांश मामलों में इन्हें रोका और पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। इसके लिए तंबाकू छोड़ना, शराब का सेवन सीमित करना, मौखिक स्वच्छता बनाए रखना, किसी भी संदिग्ध लक्षण पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना और नियमित स्क्रीनिंग कराना बेहद जरूरी है।विशेषज्ञों का मानना है कि सिर और गर्दन के कैंसर से प्रभावी ढंग से लड़ने के लिए स्वास्थ्य पेशेवरों, नीति निर्माताओं, मीडिया और आम जनता को मिलकर प्रयास करने होंगे। सामूहिक जागरूकता और समय पर इलाज से रोके जा सकने वाले कैंसर से होने वाली मौतों में कमी लाई जा सकती है और लोगों के जीवन की गुणवत्ता बेहतर की जा सकती है।




