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जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने रखा किसानों का पक्ष, दिया पत्र। किसान हमारे समुदाय और अर्थव्यवस्था की रीढ हैं, जमीन किसान की सामाजिक प्रतिष्ठा को करती है तय। धीरेंद्र सिंह

जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने रखा किसानों का पक्ष, दिया पत्र

किसान हमारे समुदाय और अर्थव्यवस्था की रीढ हैं, जमीन किसान की सामाजिक प्रतिष्ठा को करती है तय। धीरेंद्र सिंह

विकास की सतत प्रक्रिया में हमे किसानों के योगदान को नही भूलना चाहिए।

शफी मौहम्मद सैफी

ग्रेटर नोएडा। जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रेषित अपने पत्र में कहा कि ’जिस तरीके से प्राधिकरण नियमित बैठक कर, आवंटित की जाने वाली भूमि की दरों को बढाते रहते हैं, उसी अनुपात में उन्हें किसानों की मुआवजा राशि को भी बढाते रहना चाहिए।’’जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह ने अपने पत्र में किसानों का पक्ष रखते हुए आगे कहा कि ’’प्राधिकरण द्वारा अपनी आवंटन दरों को तो, कभी भी बढा लिया जाता है, लेकिन जब किसानों का मुआवजा बढाने की बात आती है तो, सर्वथा कंजूसी परिलक्षित होती है। भूमि, किसानों की आजीविका होती है, इसलिए उनकी जमीन के मुआवजे की दरें, मौजूदा बाजार मूल्य के अनुरूप करना न्याय पूर्ण होगा।’’
इस संबंध में जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह ने मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र का मजमून इस प्रकार है-
मेरे द्वारा पूर्व में भी कई पत्रों के माध्यम से, आपका ध्यान आकृष्ट किए जाने का प्रयास किया जाता रहा है, लेकिन आज जब मैंने सुबह अखबार पढा तो, पाया कि ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा अपनी भूमि आवंटन दरों में अच्छी खासी वृद्धि की है। इसी प्रकार नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा भी समय-समय पर भूमि आवंटन दरों में बेतहाशा वृद्धि की जाती रही है, लेकिन दूसरी तरफ, मैं देखता हूॅ तो, प्राधिकरणों द्वारा स्वंय की तो भूमि आवंटनों दरों में बढोतरी की गयी है, लेकिन उसके अनुपात में, किसानों को वितरित किए जाने वाले मुआवजे की वृद्धि का अनुपात कम नजर आता है। यह असमानता, समान विकास और सतत विकास पर सवाल उठाती है? अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ’’जैसे उनके द्वारा औद्योगिक विकास का रास्ता तय किया जा रहा है, वो उन लोगों के हितों की भी रक्षा करें, जिन्होंने पीढियों से भूमि का पोषण किया है और आज भी कर रहे हैं।’’ स्थानीय किसानों के बीच यह चिंता और आक्रोश का कारण बन रहा है कि ’’प्राधिकरण द्वारा अपनी आवंटन दरों को तो, कभी भी बढा लिया जाता है, लेकिन जब किसानों का मुआवजा बढाने की बात आती है तो, सर्वथा कंजूसी परिलक्षित होती है। भूमि, किसानों की आजीविका होती है, इसलिए उनकी जमीन के मुआवजे की दरें, मौजूदा बाजार मूल्य के अनुरूप होना न्याय पूर्ण होगा।’’ नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरणों द्वारा यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ’’किसानों को दिए जाना वाला मुआवजा, उनकी नई आवंटन दरों के अनुरूप निर्धारित होना चाहिए। साथ ही हमें इस सतत विकास की प्रक्रिया में किसानों के योगदान को भी नही भूलना चाहिए, क्योंकि उसी जमीन पर विकास की नई-नई योजनाएं आपके द्वारा बनायी जा रही हैं, जो पीढियों से किसानों की सामाजिक प्रतिष्ठा रही है और यह भी हमें याद रखना होगा कि किसान हमारे समुदाय और अर्थव्यवस्था की रीढ है, इसलिए उनके हितों को नजर-अंदाज करना, किसी भी रूप में जायज नही ठहराया जा सकता है।’’ आप मेरे पत्र का आशय समझ ही गए होंगे। अतः किसानों के हित में निर्णय लिए जाने हेतु संबंधित को आदेशित करने का कष्ट करें। जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह ने अपर मुख्य सचिव, औद्योगिक एवं अवस्थापना, उत्तर प्रदेश शासन, के साथ-साथ आयुक्त मेरठ मंडल मेरठ, जिलाधिकारी-गौतमबुद्धनगर को तीनों प्राधिकरणों के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों को एक पत्र प्रेषित किया गया

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