जिम्स इंजीनियरिंग मैनेजमेंट टेक्निकल कैंपस द्वारा भारत सरकार की फॉरेंसिक विज्ञान पहल के अंतर्गत फॉरेंसिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर 5-दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन
जिम्स इंजीनियरिंग मैनेजमेंट टेक्निकल कैंपस द्वारा भारत सरकार की फॉरेंसिक विज्ञान पहल के अंतर्गत फॉरेंसिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर 5-दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन

ग्रेटर नोएडा।विधि विभाग, जिम्स इंजीनियरिंग मैनेजमेंट टेक्निकल कैंपस (JIMSEMTC), ग्रेटर नोएडा द्वारा “फॉरेंसिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में हालिया प्रगति: अपराध स्थल से न्यायालय तक” विषय पर 05 जनवरी से 09 जनवरी 2026* तक एक 5-दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम हाइब्रिड मोड में आयोजित किया गया। यह फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम भारत सरकार की “फॉरेंसिक साइंस इनिशिएटिव” (फॉरेंसिक साइंस इनिशिएटिव ऑफ़ गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया ) से प्रेरित होकर आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य आपराधिक न्याय प्रणाली को वैज्ञानिक साक्ष्यों, आधुनिक तकनीकों एवं सुदृढ़ विधिक ढांचे के माध्यम से अधिक प्रभावी, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है। कार्यक्रम इस राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप था, जिसमें विधि एवं फॉरेंसिक विज्ञान के अंतःविषय एकीकरण पर विशेष बल दिया गया।इस फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में देशभर के सार्वजनिक एवं निजी शिक्षण संस्थानों से 100 से अधिक प्रतिष्ठित संकाय सदस्यों, विधि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों एवं शोधार्थियों ने सहभागिता की । कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य फॉरेंसिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं विधि के अंतःविषय संबंधों को समझना तथा आपराधिक न्याय प्रणाली में वैज्ञानिक साक्ष्यों की बढ़ती भूमिका पर विमर्श करना था।यह कार्यक्रम डॉ. अमित गुप्ता, चेयरमैन, जिम्स इंजीनियरिंग मैनेजमेंट टेक्निकल कैंपस के दूरदर्शी नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिनके निरंतर सहयोग से इस शैक्षणिक पहल को सफलतापूर्वक संपन्न किया जा सका। संस्थान प्रो. (डॉ.) सचिन यादव, कैंपस डायरेक्टर, तथा प्रो. (डॉ.) पल्लवी गुप्ता, विभागाध्यक्ष*, विधि विभाग के अकादमिक संरक्षण एवं मार्गदर्शन के लिए भी हार्दिक आभार व्यक्त करता है। इस फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का कुशलतापूर्वक संयोजन डॉ. सुधीर द्विवेदी, संयोजक, एफडीपी द्वारा किया गया, जिनके समर्पण एवं प्रयासों से सभी सत्र सुचारु रूप से संपन्न हुए।कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से आए विशिष्ट वक्ताओं ने अपने विशेषज्ञ व्याख्यान प्रस्तुत किए। इनमें प्रो. (डॉ.) आलोक शर्मा, प्रोफेसर, विधि संकाय, दिल्ली विश्वविद्यालय; प्रो. (डॉ.) अंजनी सिंह तोमर, प्रोफेसर ऑफ लॉ एवं प्रमुख, सेंटर फॉर रिसर्च इन क्रिमिनल जस्टिस साइंसेज़, गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (जीएनएलयू ); डॉ. सुरभि माथुर, एसोसिएट प्रोफेसर एवं एसोसिएट डीन, स्कूल ऑफ फॉरेंसिक साइंस, नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज़ यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू ); डॉ. अनुपमा रैना, वैज्ञानिक, जेपीएनए ट्रॉमा सेंटर, एम्स, नई दिल्ली; तथा डॉ. नवजोत कौर कंवल, एसोसिएट प्रोफेसर, फॉरेंसिक विज्ञान विभाग, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर शामिल रहे।कार्यक्रम के दौरान फॉरेंसिक डीएनए प्रोफाइलिंग, डिजिटल एवं साइबर फॉरेंसिक्स, फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी, फॉरेंसिक जांच में सीसीटीवी सर्विलांस की भूमिका एवं उसके विधिक प्रभाव, तथा उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। सत्रों में साक्ष्य के संग्रहण, संरक्षण, चेन ऑफ कस्टडी, साक्ष्य की ग्राह्यता, विशेषज्ञ साक्ष्य, नैतिक चुनौतियाँ, निजता एवं मानवाधिकार जैसे पहलुओं पर विशेष बल दिया गया।पांच दिवसीय कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता, सार्थक चर्चाओं एवं अकादमिक संवाद ने इस एफडीपी को अत्यंत सफल बनाया। यह कार्यक्रम भारत सरकार की फॉरेंसिक विज्ञान पहल के उद्देश्यों के अनुरूप, विधिक शिक्षा में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सुदृढ़ करने तथा न्याय वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ।अंत में, विधि विभाग, जिमसेम्टक द्वारा सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति उनके अमूल्य योगदान एवं सहयोग के लिए हार्दिक धन्यवाद व्यक्त किया गया। संस्थान ने भविष्य में भी इस प्रकार के अकादमिक कार्यक्रमों के आयोजन के माध्यम से विधिक शिक्षा को सशक्त करने तथा आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।



