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ईरान-इजरायल के बीच जारी युद्ध और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण एमएसएमई उद्योगों पर पड़ेगा इसका प्रभाव।अमित उपाध्याय 

ईरान-इजरायल के बीच जारी युद्ध और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण एमएसएमई उद्योगों पर पड़ेगा इसका प्रभाव।अमित उपाध्याय 

ग्रेटर नोएडा ।ईरान-इजरायल के बीच जारी युद्ध और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर गंभीर अनिश्चितता पैदा हो गई है। इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाले समुद्री मार्गों पर संकट के कारण तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात करता है और कच्चे तेल का लगभग 80-90 प्रतिशत आयात विदेशों से होता है। ऐसे में यदि तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होती है या कीमतों में वृद्धि होती है, तो इसका सीधा प्रभाव देश की उद्योग व्यवस्था, परिवहन लागत और उत्पादन लागत पर पड़ेगा। इंडस्ट्रियल बिज़नेस एसोसिएशनके अध्यक्ष अमित उपाध्याय ने कहा कि विशेष रूप से एमएसएमई उद्योगों पर इसका प्रभाव अधिक पड़ेगा, क्योंकि छोटे और मध्यम उद्योग पहले से ही कच्चे माल, बिजली, परिवहन और वित्तीय लागतों के दबाव से जूझ रहे हैं। तेल और गैस की कीमतों में वृद्धि से उत्पादन लागत बढ़ेगी, लॉजिस्टिक्स महंगे होंगे और निर्यात-आयात गतिविधियों पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि एमएसएमई उद्योगों को इस संभावित संकट से बचाने के लिए आवश्यक नीतिगत कदम उठाए जाएं, जैसे ऊर्जा लागत पर राहत, उद्योगों के लिए वैकल्पिक ईंधन व आपूर्ति व्यवस्था तथा निर्यात-आयात से जुड़े उद्योगों को विशेष सहायता प्रदान करना। अंत में उन्होंने कहा कि देश के उद्योग जगत को इस वैश्विक परिस्थिति के प्रति सतर्क रहना होगा और सरकार व उद्योग संगठनों के समन्वय से ही इस चुनौती का प्रभावी समाधान संभव है।

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