वैश्विक संकट के बीच एमएसएमई उद्योगों पर गहराता प्रभाव उद्योगों के अस्तित्व पर संकट, नरेश चौहान उपाध्यक्ष (आईबीए ) की तत्काल सरकारी हस्तक्षेप की मांग
वैश्विक संकट के बीच एमएसएमई उद्योगों पर गहराता प्रभाव उद्योगों के अस्तित्व पर संकट, नरेश चौहान उपाध्यक्ष (आईबीए ) की तत्काल सरकारी हस्तक्षेप की मांग

ग्रेटर नोएडा । वैश्विक स्तर पर उत्पन्न अस्थिरता एवं लगातार बढ़ती लागतों के कारण गौतम बुद्ध नगर के एमएसएमई उद्योग गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। ऊर्जा, कच्चे माल एवं संचालन लागत में अप्रत्याशित वृद्धि ने उद्योगों के संचालन को अत्यंत चुनौतीपूर्ण बना दिया है।इंडस्ट्रियल बिज़नेस एसोसिएशन (आईबीए ) के उपाध्यक्ष नरेश चौहान ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियां “आपदा” के समान हैं, जहां कच्चे माल, गैस एवं धातुओं की कीमतों में भारी उछाल के चलते उद्योगों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो बड़े पैमाने पर उद्योग बंद होने की आशंका है।आईबीए के उपाध्यक्ष नरेश चौहान, जो विभिन्न कंपनियों के लिए प्लास्टिक उत्पाद निर्माण (इंजेक्शन मोल्डिंग ) एवं मोल्ड एंड डाई निर्माण से जुड़े हैं, ने स्थिति को अत्यंत चिंताजनक बताते हुए कहा “पिछले कुछ समय में कच्चे माल के दाम 50% से अधिक बढ़ चुके हैं। स्थिति यह है कि अग्रिम भुगतान करने के बावजूद भी कच्चा माल समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इससे उत्पादन चक्र पूरी तरह बाधित हो रहा है। एलपीजी गैस की कमी के कारण श्रमिक एवं कर्मचारी पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता और प्रभावित हो रही है।इसके अलावा, मशीनों के स्पेयर पार्ट्स की कीमतों में भी अत्यधिक वृद्धि हुई है, जिससे मेंटेनेंस लागत कई गुना बढ़ गई है।दूसरी ओर, हमारे ग्राहक बढ़ी हुई लागत को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं, न ही वे रेट रिवीजन या भुगतान में कोई राहत दे रहे हैं। ऐसे में उद्योगों का संचालन आर्थिक रूप से असंभव होता जा रहा है।”उन्होंने आगे कहा कि“बाजार में अफवाहों का माहौल बना हुआ है और LPG गैस की कालाबाजारी तेजी से बढ़ रही है। इस पर तत्काल प्रभाव से अंकुश लगाया जाना चाहिए। सरकार को चाहिए कि वह ऊर्जा (एलपीजी /पीएनजी ) की सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करे, बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण लगाए और एमएसएमई उद्योगों के लिए एक विशेष राहत पैकेज की घोषणा करे।अत्यंत खेद का विषय है कि अब तक इस गंभीर स्थिति पर शासन-प्रशासन द्वारा उद्यमियों के साथ कोई ठोस बैठक या संवाद नहीं किया गया है।”
आईबीए की प्रमुख मांगें हैं
एलपीजी एवं पीएनजी गैस की निर्बाध एवं प्राथमिकता आधारित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। पीएनजी कनेक्शन हेतु सिक्योरिटी डिपॉजिट एवं प्रक्रियाओं में एमएसएमई के लिए विशेष राहत दी जाए।कच्चे माल एवं धातुओं की कीमतों पर नियंत्रण हेतु सरकारी हस्तक्षेप किया जाए।एलपीजी गैस की कालाबाजारी एवं जमाखोरी पर तत्काल सख्त कार्रवाई हो।एमएसएमई उद्योगों के लिए विशेष राहत पैकेज एवं वित्तीय सहायता की घोषणा की जाए।उद्योग संगठनों के साथ शीघ्र उच्चस्तरीय बैठक आयोजित कर समाधान निकाला जाए।आईबीए अध्यक्ष अमित उपाध्याय ने कहा कि यदि वर्तमान संकट पर तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो इसका व्यापक नकारात्मक प्रभाव न केवल उद्योगों बल्कि प्रदेश एवं देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा, जिससे भारत के विज़न 2047 के लक्ष्य को गंभीर क्षति पहुंच सकती है।




